Agra: दो साल से लापता किशोरी दिल्ली में मिली, रेड लाइट एरिया में फंसने से बची, जालिमों के चंगुल से ऐसे हुई आजाद
आगरा से दो साल पहले लापता हुई किशोरी दिल्ली में मिली। इस दौरान उसे कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा है। वह रेड लाइट एरिया में फंस गई थी, वहां से भागकर सीधे थाने पहुंची।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में अपने हौसले के बूते जब एक किशोरी जालिमों के चंगुल से भागी तो दिल्ली के थाने में पहुंचकर ही दम लिया। रास्ते में सांस फूलती रही, लेकिन उसने भागना नहीं छोड़ा। यह फिल्म की शूटिंग नहीं बल्कि जीवन की ऐसी सच्चाई है, जिसका सामना सिर्फ अपराजिता ही कर सकती है।
दो साल पहले ट्रांस यमुना क्षेत्र की 13 साल की एक किशोरी शहर से अचानक लापता हो गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब होने के कारण वह भीख मांगने पर मजबूर थी। नौ मार्च 2020 को गुमशुदगी की रिपोर्ट उसके पिता ने थाना एत्माद्दौला में दर्ज कराई। पुलिस व परिजन दोनों अपने-अपने तरीके से उसे तलाशने की कोशिश कर रहे थे।
उधर, दिल्ली में 13 सितंबर 2020 को करीब छह महीने बाद किशोरी रेड एरिया से भागती हुई थाने पहुंच गई। कुछ दिन तक दिल्ली में उसे शेल्टर होम में रखा गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसे तीन मई को आगरा भेज दिया। इस मामले में मंगलवार को उसके कोर्ट में बयान दर्ज हुए।
इच्छा- पढ़ाई करूं, पैरों पर खड़ी हो सकूं
संघर्षों से हार नहीं मानने वाली किशोरी अब 15 साल की हो चुकी है। उसका कहना है कि वह पढ़ना चाहती है। पढ़ने का उसे बचपन से ही बहुत शौक था लेकिन परिस्थितियों ने पढ़ाई नहीं करने दी। अब इच्छा है कि मैं पढ़ाई करूं, अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं।
कक्षा नौ में करा रहे प्रवेश
बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि किशोरी का कक्षा नौ में दाखिला कराया जा रहा है। उसकी पढ़ाई का खर्चा भी उठाया जाएगा। महिला कल्याण विभाग से प्रयास कर किशोरी को मुआवजा दिलाएंगे। परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। दिल्ली से लाने के लिए ही पिता के पास पैसे नहीं थे। बड़ी मुश्किलों से एक हजार रुपये का इंतजाम कर किशोरी को दिल्ली से आगरा लाया जा सका था।