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मथुरा: तीन अंतरराज्यीय असलहा तस्कर गिरफ्तार
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मथुरा। कोसीकलां में पकड़े गए असलहा तस्करों की जानकारी देते एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर।
- फोटो : KOSI
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कोसीकलां (मथुरा)। इलाका पुलिस ने शुक्रवार को अंतरराज्यीय असलहा तस्करी गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ लिया। इनके पास से चार पिस्तौल एवं भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। बदमाशों के सरगना सहित एक आरोपी भाग जाने में सफल रहा। आरोपी मध्य प्रदेश के इंदौर से पिस्तौल लाकर हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली में सप्लाई करते थे।
प्रभारी निरीक्षक प्रमोद पंवार ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर शाहपुर रजबहा के समीप से घेराबंदी कर तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि दो लोग मौका पाकर भाग गए। पकड़े गए युवकों के कब्जे से पुलिस ने चार पिस्टल, 32 बोर के 11 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम हक्कू उर्फ हकमुददीन, छोटन, होकल उर्फ उमरद्दीन निवासी गांव नगला उटावड़ बताया। भागे साथियों का नाम गिरोह का सरगना तैययब तथा अरसद बताया है।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि अरशद, तैययब मध्य प्रदेश के इंदौर के समीप से 12-13 हजार रुपये में पिस्टल खरीद कर पकड़े गए आरोपियों को 20 हजार में बेच देते थे। इसके बाद वह पिस्टल को हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में 25 हजार तक में बेचकर करीब पांच हजार रुपये मुनाफा कमाते थे। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस अभिरक्षा में बताया कि 20 अगस्त को हरियाणा से कुछ लोग पिस्टल खरीदने आए थे, जो संख्या में उनसे ज्यादा होने के कारण करीब चार पिस्टल छीन ले गए।
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हूबहू फैक्टरी मेड हैं अवैध पिस्टलें
पुलिस का मानना है कि तस्करों के पास मिलीं पिस्तौल हूबहू फैक्टरी मेड पिस्तौल की तरह हैं। इनकी मैग्जीन में 10 बुलेट लोड किए जा सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि पिस्टल बनाने वाले कारीगर या तो किसी गन फैक्टरी के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं या फैक्टरी से संपर्क में हैं। हथियार बनाने वालों की तलाश में पुलिस की एक टीम इंदौर भेजी जाएगी।
फोन पर होती है डीलिंग
खरीदार से फोन पर डीलिंग होती थी और हथियार की आपूर्ति बाइक से करते थे। इससे पुलिस को शक नहीं होता था। पांच साल से सक्रिय ये गिरोह कई प्रांतों में दो हजार से अधिक असलहों की तस्करी कर चुका है। गिरोह 20 से 30 हजार रुपये में पिस्टल बेचता था।
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प्रभारी निरीक्षक प्रमोद पंवार ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर शाहपुर रजबहा के समीप से घेराबंदी कर तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि दो लोग मौका पाकर भाग गए। पकड़े गए युवकों के कब्जे से पुलिस ने चार पिस्टल, 32 बोर के 11 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम हक्कू उर्फ हकमुददीन, छोटन, होकल उर्फ उमरद्दीन निवासी गांव नगला उटावड़ बताया। भागे साथियों का नाम गिरोह का सरगना तैययब तथा अरसद बताया है।
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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि अरशद, तैययब मध्य प्रदेश के इंदौर के समीप से 12-13 हजार रुपये में पिस्टल खरीद कर पकड़े गए आरोपियों को 20 हजार में बेच देते थे। इसके बाद वह पिस्टल को हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में 25 हजार तक में बेचकर करीब पांच हजार रुपये मुनाफा कमाते थे। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस अभिरक्षा में बताया कि 20 अगस्त को हरियाणा से कुछ लोग पिस्टल खरीदने आए थे, जो संख्या में उनसे ज्यादा होने के कारण करीब चार पिस्टल छीन ले गए।
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हूबहू फैक्टरी मेड हैं अवैध पिस्टलें
पुलिस का मानना है कि तस्करों के पास मिलीं पिस्तौल हूबहू फैक्टरी मेड पिस्तौल की तरह हैं। इनकी मैग्जीन में 10 बुलेट लोड किए जा सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि पिस्टल बनाने वाले कारीगर या तो किसी गन फैक्टरी के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं या फैक्टरी से संपर्क में हैं। हथियार बनाने वालों की तलाश में पुलिस की एक टीम इंदौर भेजी जाएगी।
फोन पर होती है डीलिंग
खरीदार से फोन पर डीलिंग होती थी और हथियार की आपूर्ति बाइक से करते थे। इससे पुलिस को शक नहीं होता था। पांच साल से सक्रिय ये गिरोह कई प्रांतों में दो हजार से अधिक असलहों की तस्करी कर चुका है। गिरोह 20 से 30 हजार रुपये में पिस्टल बेचता था।