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अब चार महीने नहीं हो सकेंगे मांगलिक कार्य
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कासगंज/ सोरों। मंगलवार को देवशयनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास शुरू हो जाएंगे। इसके साथ ही चार माह तक विवाह, यज्ञोपवित, मुंडन सहित सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। देवोत्थान एकादशी के बाद ही ये कार्य आरंभ होंगे।
व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में चातुर्मास कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। इन चार माह को व्रत, भक्ति, तप और साधना का माह माना जाता है। संतजन यात्रा बंद कर आश्रम, मंदिर या मुख्य स्थान पर रहकर व्रत और साधना का पालन करते हैं। ज्योतिषाचार्य मुकुंद बल्लभ भट्ट कहते हैं कि मान्यता है कि चार माह में भगवान विष्णु शयन हेतु सागर की ओर चले जाते हैं और ब्रह्मांड का नियंत्रण भोलेनाथ के हाथ में आ जाता है। इसलिए चार मास तक भोलेनाथ की पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पंडित राहुल वशिष्ठ ने बताया कि हिंदू धर्म में चतुर्मास, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष देव शयनी एकादशी से शुरू होते हैं और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष देवउठनी एकादशी तिथि तक रहते हैं। पंडित प्रद्युम्न निर्भय ने बताया कि. प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है। इसके बाद शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं।
इन नियमों का करें पालन:
फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना और स्नान करना और अधिकतर समय मौन रहना चाहिए। दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए।
इन का करें परित्याग
श्रावण मास में दूध, शक्कर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस-मदिरा और भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल आदि का त्याग कर देना चाहिए।
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चतुर्मास की अवधि
देवशयनी एकादशी 20 जुलाई 2021
देवात्थान एकादशी 14 नवंबर 2021
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व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में चातुर्मास कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। इन चार माह को व्रत, भक्ति, तप और साधना का माह माना जाता है। संतजन यात्रा बंद कर आश्रम, मंदिर या मुख्य स्थान पर रहकर व्रत और साधना का पालन करते हैं। ज्योतिषाचार्य मुकुंद बल्लभ भट्ट कहते हैं कि मान्यता है कि चार माह में भगवान विष्णु शयन हेतु सागर की ओर चले जाते हैं और ब्रह्मांड का नियंत्रण भोलेनाथ के हाथ में आ जाता है। इसलिए चार मास तक भोलेनाथ की पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पंडित राहुल वशिष्ठ ने बताया कि हिंदू धर्म में चतुर्मास, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष देव शयनी एकादशी से शुरू होते हैं और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष देवउठनी एकादशी तिथि तक रहते हैं। पंडित प्रद्युम्न निर्भय ने बताया कि. प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है। इसके बाद शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं।
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इन नियमों का करें पालन:
फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना और स्नान करना और अधिकतर समय मौन रहना चाहिए। दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए।
इन का करें परित्याग
श्रावण मास में दूध, शक्कर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस-मदिरा और भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल आदि का त्याग कर देना चाहिए।
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चतुर्मास की अवधि
देवशयनी एकादशी 20 जुलाई 2021
देवात्थान एकादशी 14 नवंबर 2021