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Agra News: युवक की हत्या करने वाले को आजीवन कारावास की सजा
Wed, 03 Sep 2025 11:32 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 03 Sep 2025 11:32 PM IST
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मैनपुरी। थाना किशनी क्षेत्र के नगला अहिर में 20 साल पहले युवक की फायरिंग करके हत्या करने वाले को एफटीसी द्वितीय के जज कुलदीप सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 225000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
नगला अहिर के रहने वाले जगन्नाथ ने नौ मई 2005 को थाना किशनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसने वर्ष 2004 में गांव के ही रामसिंह और ध्यान सिंह से एक खेत का बैनामा कराया था। इसे लेकर दोनों के परिवार का सतीश उर्फ नीतीश उनसे रंजिश मानता था। नौ मई को वह अपने पुत्र सर्वेंद्र, धीरज, भाई बालकराम के साथ खेत पर गए थे। तभी खेत पर अपने परिजन के साथ आए सतीश ने फायरिंग करके सर्वेंद्र की हत्या कर दी। बालकराम और जगन्नाथ घायल हो गए।
पुलिस ने जांच करने के बाद परिजन के खिलाफ तो चार्जशीट न्यायालय में भेज दी। सतीश का नाम निकाल दिया। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज कुलदीप सिंह की कोर्ट में हुई। एडीजीसी क्रिमिनल मनोज कुमार वर्मा की दलील के बाद सतीश को न्यायालय में तलब किया गया। एडीजीसी ने गवाहों की गवाही कराई। गवाही के आधार पर सतीश को सर्वेंद्र की हत्या करने, बालकराम और जगन्नाथ को गंभीर रूप से घायल करने का दोषी पाया गया। एफटीसी द्वितीय के जज ने उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाकर 225000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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जमानत के बाद हो गया था फरार
न्यायालय द्वारा तलब किए जाने के बाद सतीश न्यायालय में हाजिर हुआ। उसने न्यायालय से अपनी जमानत करा ली। जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया। जब सतीश न्यायालय में नहीं पहुंचा तो उसके खिलाफ बिना जमानती वारंट जारी किए गए। पुलिस ने सतीश को पकड़कर जेल भेज दिया। इसके बाद उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। बुधवार को उसको जेल से ही निर्णय सुनने के लिए न्यायालय लाया गया। सजा होने के बाद उसको जेल भेज दिया गया।
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नगला अहिर के रहने वाले जगन्नाथ ने नौ मई 2005 को थाना किशनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसने वर्ष 2004 में गांव के ही रामसिंह और ध्यान सिंह से एक खेत का बैनामा कराया था। इसे लेकर दोनों के परिवार का सतीश उर्फ नीतीश उनसे रंजिश मानता था। नौ मई को वह अपने पुत्र सर्वेंद्र, धीरज, भाई बालकराम के साथ खेत पर गए थे। तभी खेत पर अपने परिजन के साथ आए सतीश ने फायरिंग करके सर्वेंद्र की हत्या कर दी। बालकराम और जगन्नाथ घायल हो गए।
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पुलिस ने जांच करने के बाद परिजन के खिलाफ तो चार्जशीट न्यायालय में भेज दी। सतीश का नाम निकाल दिया। मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज कुलदीप सिंह की कोर्ट में हुई। एडीजीसी क्रिमिनल मनोज कुमार वर्मा की दलील के बाद सतीश को न्यायालय में तलब किया गया। एडीजीसी ने गवाहों की गवाही कराई। गवाही के आधार पर सतीश को सर्वेंद्र की हत्या करने, बालकराम और जगन्नाथ को गंभीर रूप से घायल करने का दोषी पाया गया। एफटीसी द्वितीय के जज ने उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाकर 225000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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जमानत के बाद हो गया था फरार
न्यायालय द्वारा तलब किए जाने के बाद सतीश न्यायालय में हाजिर हुआ। उसने न्यायालय से अपनी जमानत करा ली। जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया। जब सतीश न्यायालय में नहीं पहुंचा तो उसके खिलाफ बिना जमानती वारंट जारी किए गए। पुलिस ने सतीश को पकड़कर जेल भेज दिया। इसके बाद उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। बुधवार को उसको जेल से ही निर्णय सुनने के लिए न्यायालय लाया गया। सजा होने के बाद उसको जेल भेज दिया गया।