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नवरात्र: देवी मां की चमत्कारिक आरती देखने को उमड़े हजारों भक्त, नवमी को होगी लट्ठ पूज
Tue, 09 Apr 2019 05:52 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 09 Apr 2019 05:52 PM IST
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देवी मां की चामत्कारिक आरती
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा की तहसील छाता के गांव नरी-सेंमरी स्थित मंदिर में नवरात्र पर देवी मां का अनूठा मेला चल रहा है। यह मेला अपने विशेष दो दिनों के लिए जाना जाता है। तीज की आरती और नवमी की लट्ठ पूजा। इस दौरान मेले में देवी दर्शन के लिए हजारों भक्त यहां आते हैं।
सोमवार शाम को तीज की चमत्कारिक आरती का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धांधू भगत के वंशजों ने चामत्कारिक आरती की। दीपकों की ज्वाला सफेद कपड़े की चादर के आरपार निकल गई, मगर चादर नहीं जली। यह देख मंदिर प्रांगण देवी मां के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
मान्यता है कि नरी-सेंमरी वाली देवी मां को धांधू भगत नगरकोट (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश से अपने साथ लाए थे। नरी-सेंमरी मंदिर पर लगने वाले मेला में आगरा के धांधू भगत के परिजनों की चमत्कारिक आरती आकर्षण का केंद्र होती है। आरती तीज को होती हैं।
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सोमवार शाम को तीज की चमत्कारिक आरती का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धांधू भगत के वंशजों ने चामत्कारिक आरती की। दीपकों की ज्वाला सफेद कपड़े की चादर के आरपार निकल गई, मगर चादर नहीं जली। यह देख मंदिर प्रांगण देवी मां के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
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मान्यता है कि नरी-सेंमरी वाली देवी मां को धांधू भगत नगरकोट (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश से अपने साथ लाए थे। नरी-सेंमरी मंदिर पर लगने वाले मेला में आगरा के धांधू भगत के परिजनों की चमत्कारिक आरती आकर्षण का केंद्र होती है। आरती तीज को होती हैं।
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नवमी को लट्ठ पूजा
प्रथम आरती पूर्व एमएलसी अनुराग शुक्ला ने शाम सात बजे की। बड़े-बड़े दीपकों की तेज लौ के ऊपर सफेद चादर को रखा गया। लौ चादर के आरपार निकल रही थी, मगर चादर नहीं जली। धांधू भगत के तीन और परिजनों ने देवी मां की आरती कर पूजा-अर्चना की।
तीज की आरती के बाद चैत्र शुक्ल नवमी के दिन देवी मां की लट्ठ पूजा की जाएगी। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु तलवार, भाले, बल्लम, लाठी आदि हथियार लेकर आते हैं और जबरन दर्शन कर प्रसाद लूटने का प्रयास करते हैं। सदियों से यह परंपरा अब भी निभाई जाती है।
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तीज की आरती के बाद चैत्र शुक्ल नवमी के दिन देवी मां की लट्ठ पूजा की जाएगी। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु तलवार, भाले, बल्लम, लाठी आदि हथियार लेकर आते हैं और जबरन दर्शन कर प्रसाद लूटने का प्रयास करते हैं। सदियों से यह परंपरा अब भी निभाई जाती है।
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