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Agra News: कॉपर वायर के फंदों से लेते थे तेंदुओं की जान, पांच और गिरफ्तार, 6 कंकाल बरामद
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आगरा। तेंदुए की खाल तस्करी मामले में वन विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। जांच आगे बढ़ने पर मध्य प्रदेश के शिवपुरी निवासी पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों की निशानदेही पर छह तेंदुओं के कंकाल बरामद किए गए हैं। इनमें एक कंकाल मुरैना और पांच शिवपुरी के जंगलों से मिले हैं।
डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से जंगलों में तेंदुओं का शिकार करते थे। गिरोह के सदस्य पहले घने जंगलों में ऐसे रास्तों की पहचान करते थे, जहां तेंदुओं की आवाजाही अधिक रहती थी। इसके बाद वहां कॉपर वायर और क्लच वायर से फंदे लगाए जाते थे। शिकार की तलाश में निकला तेंदुआ जैसे ही फंदे में फंसता, वह निकल नहीं पाता।
फंदे में जकड़ने के बाद शिकारी डंडों से उस पर हमला कर उसे मार डालते थे। इसके बाद खाल, हड्डियों और अन्य अंगों की तस्करी की जाती थी। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मध्य प्रदेश के जंगलों से सटे गांवों के रहने वाले हैं। उन्हें जंगल के रास्तों, वन्यजीवों की गतिविधियों और शिकार के ठिकानों की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से वे बिना किसी संदेह के जंगलों में जाकर फंदे लगाते और वारदात को अंजाम देते थे।
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तस्करों की कस्टडी रिमांड हुई खत्म
23 जुलाई को गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पुलिस रिमांड रविवार को समाप्त हो गई है। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है। वहीं, एमपी के शिवपुरी में पकड़े गए पांच आरोपियों को भी एमपी न्यायिक अभिरक्षा के लिए भेज दिया गया है। डीएफओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग और मध्य प्रदेश (एसटीएसएफ) के संयुक्त अभियान से इस संगठित गिरोह तक पहुंचना संभव हो सका। मामले में अभी जांच जारी है। गिरोह के एक-दो अन्य सदस्य की भी पहचान हो चुकी है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
जाल बिछाकर पकड़ा
वन विभाग ने 23 जुलाई को बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार तस्करों को 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किया था। टीम ने करीब 20 दिन तक खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क बनाए रखा और उन्हें अधिक कीमत देने का लालच देकर आगरा बुलाया। जैसे ही आरोपी सैंया स्थित होटल के पास खाल लेकर पहुंचे, वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओजी की संयुक्त टीम ने उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि तेंदुओं का शिकार मध्य प्रदेश के जंगलों में किया जाता था और उनकी खाल दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा तक सप्लाई की जाती थी। इसी पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ी।
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डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से जंगलों में तेंदुओं का शिकार करते थे। गिरोह के सदस्य पहले घने जंगलों में ऐसे रास्तों की पहचान करते थे, जहां तेंदुओं की आवाजाही अधिक रहती थी। इसके बाद वहां कॉपर वायर और क्लच वायर से फंदे लगाए जाते थे। शिकार की तलाश में निकला तेंदुआ जैसे ही फंदे में फंसता, वह निकल नहीं पाता।
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फंदे में जकड़ने के बाद शिकारी डंडों से उस पर हमला कर उसे मार डालते थे। इसके बाद खाल, हड्डियों और अन्य अंगों की तस्करी की जाती थी। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मध्य प्रदेश के जंगलों से सटे गांवों के रहने वाले हैं। उन्हें जंगल के रास्तों, वन्यजीवों की गतिविधियों और शिकार के ठिकानों की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से वे बिना किसी संदेह के जंगलों में जाकर फंदे लगाते और वारदात को अंजाम देते थे।
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तस्करों की कस्टडी रिमांड हुई खत्म
23 जुलाई को गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पुलिस रिमांड रविवार को समाप्त हो गई है। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है। वहीं, एमपी के शिवपुरी में पकड़े गए पांच आरोपियों को भी एमपी न्यायिक अभिरक्षा के लिए भेज दिया गया है। डीएफओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग और मध्य प्रदेश (एसटीएसएफ) के संयुक्त अभियान से इस संगठित गिरोह तक पहुंचना संभव हो सका। मामले में अभी जांच जारी है। गिरोह के एक-दो अन्य सदस्य की भी पहचान हो चुकी है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
जाल बिछाकर पकड़ा
वन विभाग ने 23 जुलाई को बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार तस्करों को 10 तेंदुओं की खाल के साथ गिरफ्तार किया था। टीम ने करीब 20 दिन तक खरीदार बनकर तस्करों से संपर्क बनाए रखा और उन्हें अधिक कीमत देने का लालच देकर आगरा बुलाया। जैसे ही आरोपी सैंया स्थित होटल के पास खाल लेकर पहुंचे, वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओजी की संयुक्त टीम ने उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि तेंदुओं का शिकार मध्य प्रदेश के जंगलों में किया जाता था और उनकी खाल दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा तक सप्लाई की जाती थी। इसी पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ी।