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जानते सब कुछ, मानते फिर भी नहीं
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:22 AM IST
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एड्स के प्रति जागरूकता के लिए दीवार से लेकर टीवी तक का सहारा लिया। फिर भी एड्स के लिए सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है। एसएन मेडिकल कालेज के एआरटी (एंटी रेट्रा वायरल थेरेपी) सेंटर के मुताबिक 65 फीसदी मरीजों में यही वजह मिली। हैरत की बात इसमें शिक्षित और उच्च घरों के लोग भी हैं। 15 फीसदी मरीज संक्रमित रक्त चढ़ने से तो 12 फीसदी ऐसे रहे, जिनको पैदाइश ही बीमारी मिली। एआरटी सेंटर में 6537 मरीज रजिस्टर्ड हैं। 2653 नियमित इलाज में हैं। 160 मरीज 15 साल से नीचे के हैं। महिला-पुरुषों का औसत लगभग है। सबसे ज्यादा मरीज कम पढ़े-लिखे या फिर अनपढ़ हैं। इनमें वाहन चालक, सेक्स वर्करों की संख्या ज्यादा है। सीनियर मेडिकल आफिसर डा. रेखा टंडन बताती हैं कि लोग पहले से ज्यादा सावधान जरूर हुए हैं। फिर भी यौन संबंध बनाने में लापरवाही ही बड़ा कारण है।
क्या है एचआईवी और एड्स:
एचआईवी शरीर में मिलने पर मरीज को पॉजिटिव करार दिया जाता है। ये वायरस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम करता है। मरीज में टीबी, निमोनिया, डायरिया, खुजली जैसी कई बीमारियां घर कर जाती हैं।
स्वस्थ दिनचर्या की जरूरत
काउंसलर शीतल तोमर बताती हैं कि मरीजों को नियमित इलाज और स्वस्थ दिनचर्या को प्रेरित करते हैं। उनको नियमित व्यायाम, साफ-सफाई, नशाखोरी का परहेज, पौष्टिक आहार की सीख दी जाती है।
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अब हर विजिट पर 100 रुपये
एड्स पीड़ितों का इलाज बाधित न हो इसके लिए मरीज को हर ओपीडी में आने पर 100 रुपये सरकार मदद दी जाती है। इनका ये पैसा चिकित्सक की संस्तुति पर उनके एकाउंट में जमा होता है।
सरकारी मदद को करना पड़ता है संघर्ष
मरीजों को सरकारी मदद के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे लोगों की मदद के लिए आगरा पॉजिटिव पीपल वेलफेयर सोसाइटी कार्य करती है। समाजवादी पेंशन योजना, बीमारी अनुदान, विधवा पेंशन योजना का लाभ दिलाया जाता है। राशन कार्ड, आधार कार्ड, के अलावा जनधन योजना के तहत एकाउंट भी खोले जाते हैं। अध्यक्ष महफूज खान ने बताया कि आवेदन करने वाले आधे मरीजाें को ही समाजवादी पेंशन योजना मिल पाई है।
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क्या है एचआईवी और एड्स:
एचआईवी शरीर में मिलने पर मरीज को पॉजिटिव करार दिया जाता है। ये वायरस शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम करता है। मरीज में टीबी, निमोनिया, डायरिया, खुजली जैसी कई बीमारियां घर कर जाती हैं।
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स्वस्थ दिनचर्या की जरूरत
काउंसलर शीतल तोमर बताती हैं कि मरीजों को नियमित इलाज और स्वस्थ दिनचर्या को प्रेरित करते हैं। उनको नियमित व्यायाम, साफ-सफाई, नशाखोरी का परहेज, पौष्टिक आहार की सीख दी जाती है।
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एड्स पीड़ितों का इलाज बाधित न हो इसके लिए मरीज को हर ओपीडी में आने पर 100 रुपये सरकार मदद दी जाती है। इनका ये पैसा चिकित्सक की संस्तुति पर उनके एकाउंट में जमा होता है।
सरकारी मदद को करना पड़ता है संघर्ष
मरीजों को सरकारी मदद के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे लोगों की मदद के लिए आगरा पॉजिटिव पीपल वेलफेयर सोसाइटी कार्य करती है। समाजवादी पेंशन योजना, बीमारी अनुदान, विधवा पेंशन योजना का लाभ दिलाया जाता है। राशन कार्ड, आधार कार्ड, के अलावा जनधन योजना के तहत एकाउंट भी खोले जाते हैं। अध्यक्ष महफूज खान ने बताया कि आवेदन करने वाले आधे मरीजाें को ही समाजवादी पेंशन योजना मिल पाई है।