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कैलाश मेलाः दुर्लभ हैं शिवलिंग के ऐसे दर्शन, स्वयं भगवान परशुराम ने की स्थापना
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:55 PM IST
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आगरा में कैलाश महादेव मंदिर
- फोटो : google
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श्रावण मास के तीसरे सोमवार को आगरा में कैलाश महादेव मंदिर में भक्ति का सावन बरसेगा। लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को पहुंचेंगे। आगरा में कैलाशपति महादेव का दरबार पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां एक साथ दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा संयोग दुलर्भ ही मिलता है।
कैलाश महादेव के मेले का उद्घाटन रविवार 23 जुलाई को शाम पांच बजे होगा। महंत निर्मल गिरी के मुताबिक मेले का उद्घाटन एससी आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया करेंगे। यह मेला सिकंदरा स्मारक से लेकर कैलाश मंदिर मोड़ तक लगेगा। रविवार शाम को नेशनल हाईवे का रूट डायवर्ट रहेगा।
रविवार रात दो बजे से मंदिर में पूजा शुरू हो जाएगी। रुद्राभिषेक और आरती के बाद सोमवार सुबह चार बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। दिन में भी कांवड़ चढ़ेंगे। रात 11 बजे फिर रुद्राभिषेक और उसके बाद आरती होगी।
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कैलाश उत्सव समिति की ओर से शनिवार को भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे का उद्घाटन नगर आयुक्त अरुण प्रकाश और गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह ने किया। संस्था के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल और निर्देश तिवारी ने बताया कि भंडारा तीन दिन तक चलेगा।
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कैलाश महादेव के मेले का उद्घाटन रविवार 23 जुलाई को शाम पांच बजे होगा। महंत निर्मल गिरी के मुताबिक मेले का उद्घाटन एससी आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया करेंगे। यह मेला सिकंदरा स्मारक से लेकर कैलाश मंदिर मोड़ तक लगेगा। रविवार शाम को नेशनल हाईवे का रूट डायवर्ट रहेगा।
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रविवार रात दो बजे से मंदिर में पूजा शुरू हो जाएगी। रुद्राभिषेक और आरती के बाद सोमवार सुबह चार बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। दिन में भी कांवड़ चढ़ेंगे। रात 11 बजे फिर रुद्राभिषेक और उसके बाद आरती होगी।
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कैलाश उत्सव समिति की ओर से शनिवार को भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे का उद्घाटन नगर आयुक्त अरुण प्रकाश और गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह ने किया। संस्था के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल और निर्देश तिवारी ने बताया कि भंडारा तीन दिन तक चलेगा।
ये है मंदिर की मान्यता
अागरा में कैलाश महादेव मंदिर
- फोटो : google
मंदिर के मठ महंत महेश गिरि के मुताबिक, शिवलिंग भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमद्गिनी के द्वारा स्थापित किए गए थे। दोनों ने मंदिर में एक-एक शिवलिंग स्थापित किया। कम मंदिरों में दो शिव लिंग स्थापित हैं।
महर्षि परशुराम के पिता की माता का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से बमुश्किल छह किलो मीटर की दूरी पर स्थिति है। मंदिर के आसपास की छटा और कालिंदी का कलरव लोगों को आनंदित करती है।
मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धर्मशालाएं श्रद्धालुओं की ओर से मनोकामना पूरी होने पर बनवाई गई हैं। मंदिर के आसपास व्यवस्था मुकम्मल न होने पर कैलाश मंदिर प्रबंधन समिति के संयोजक सतीश चंद गोस्वामी ने कहा कि कैलाश मार्ग का निर्माण कार्य तक नहीं कराया गया है।
महर्षि परशुराम के पिता की माता का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से बमुश्किल छह किलो मीटर की दूरी पर स्थिति है। मंदिर के आसपास की छटा और कालिंदी का कलरव लोगों को आनंदित करती है।
मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धर्मशालाएं श्रद्धालुओं की ओर से मनोकामना पूरी होने पर बनवाई गई हैं। मंदिर के आसपास व्यवस्था मुकम्मल न होने पर कैलाश मंदिर प्रबंधन समिति के संयोजक सतीश चंद गोस्वामी ने कहा कि कैलाश मार्ग का निर्माण कार्य तक नहीं कराया गया है।