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जन्माष्टमीः मध्यरात्रि को प्रकट हुए नंदलाल, घंटे-घड़ियालों से गूंजा नंदभवन
Sat, 24 Aug 2019 12:11 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नंदगांव-मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नंदगांव-मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 24 Aug 2019 12:11 AM IST
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जन्मस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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ब्रजवासियों के सखा और भक्तों के आराध्य बाल कृष्ण ने शुक्रवार को आधी रात ठीक 12 बजे काली अंधियारी रात में एक बार फिर अवतार लिया। कन्हैया के जन्म के बाद नंदबाबा का पैतृक गांव नंदगांव कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। नंदगांव की विशेष परंपरा के अनुसार पंचांगों की काल गणना के उलट रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।
दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे नंदगांव के गोस्वामीवृंदों द्वारा नंदभवन में अष्टछाप के कवियों एवं अन्य महानुभावों की वाणियों का गायन किया गया। समाज गायन का दौर लगभग तीन घंटे से अधिक चला।
संध्या के समय बरसाना के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा धोती, बगलबंदी से सुसज्जित हो नंदभवन पहुंचें जिसके बाद दोनों गांवों के गोस्वामीजनों के मध्य संयुक्त समाज गायन का दौर चला। इस दौरान लाला के जन्म की बधाइयां गाई गईं। समाज गायन के पश्चात बरसाना से आए गोस्वामी समाज को उपहार स्वरूप बधाई का लड्डू भेंट किया गया।
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दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे नंदगांव के गोस्वामीवृंदों द्वारा नंदभवन में अष्टछाप के कवियों एवं अन्य महानुभावों की वाणियों का गायन किया गया। समाज गायन का दौर लगभग तीन घंटे से अधिक चला।
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संध्या के समय बरसाना के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा धोती, बगलबंदी से सुसज्जित हो नंदभवन पहुंचें जिसके बाद दोनों गांवों के गोस्वामीजनों के मध्य संयुक्त समाज गायन का दौर चला। इस दौरान लाला के जन्म की बधाइयां गाई गईं। समाज गायन के पश्चात बरसाना से आए गोस्वामी समाज को उपहार स्वरूप बधाई का लड्डू भेंट किया गया।
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नंदगांव स्थित नंदबाबा मंदिर में समाज गायन करते नंदगांव व बरसाना के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
रात्रि दस बजे मंदिर प्रांगण में ढांढ पुरोहित द्वारा नंदबाबा की वंशावली का बखान किया गया। मध्यरात्रि को मंदिर के गर्भ गृह में गोस्वामीयों ने पंचामृत से लाला के श्रीविग्रह का गुप्त अभिषेक किया।
अभिषेक के बाद पट खुलते ही भगवान के दर्शनों को देशी विदेशी श्रद्धालुओं का तांता लग गया। पट खुलते ही नंद के लाला की जय, यशोदा नंदन की जय से वातावरण गुंजायमान हो गया।
ढांढिनियां मचल रही मोह नंद घर लै चलौ...
श्रीकृष्ण जन्म से पूर्व ढांड ढांडिन लीला का आयोजन नंदभवन में किया गया। कान्हा के जन्म की सुन गोवर्धन से आए ढांढ़ी ढांढ़िन ने नंदबाबा के भवन में पहुंचकर उनकी वंशावली से जुडे़ पदों को सुनाया।
इस दौरान लाला की बधाई गाते हुए ढांढ़िन नंदभवन में मचल जाती हैं और लाला होने की खुशी में नंदबाबा से नेग मांगती हैं। इस अद्भुत लीला को देखकर श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो जाते हैं। इस दौरान ढांढिनियां मचल रही मोहे नंद घर लै चलौ आदि पदों का गायन किया गया।
अभिषेक के बाद पट खुलते ही भगवान के दर्शनों को देशी विदेशी श्रद्धालुओं का तांता लग गया। पट खुलते ही नंद के लाला की जय, यशोदा नंदन की जय से वातावरण गुंजायमान हो गया।
ढांढिनियां मचल रही मोह नंद घर लै चलौ...
श्रीकृष्ण जन्म से पूर्व ढांड ढांडिन लीला का आयोजन नंदभवन में किया गया। कान्हा के जन्म की सुन गोवर्धन से आए ढांढ़ी ढांढ़िन ने नंदबाबा के भवन में पहुंचकर उनकी वंशावली से जुडे़ पदों को सुनाया।
इस दौरान लाला की बधाई गाते हुए ढांढ़िन नंदभवन में मचल जाती हैं और लाला होने की खुशी में नंदबाबा से नेग मांगती हैं। इस अद्भुत लीला को देखकर श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो जाते हैं। इस दौरान ढांढिनियां मचल रही मोहे नंद घर लै चलौ आदि पदों का गायन किया गया।
प्रसूता की भांति यशोदा मइया के सिर पर बांधी पट्टी
नंदबाबा मंदिर में अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते हैं। कृष्ण बलराम का शृंगार कर मां यशोदा के सिर पर प्रसूता की भांति पट्टी बांध दी जाती है। दर्शनों का सौभाग्य सेवायतों को ही प्राप्त होता है। शयन के समय नव प्रसूता के लिए औषधिप्रद वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। जन्म के बाद कन्हैया ने कटि काछनी में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
गोस्वामी समाज के युवकों को बांधी राखी
रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने से वंचित रहे भाइयों की कलाई पर बहनों ने राखी बांधी। नंदगांव में जन्माष्टमी पर भी राखी बांधने की परंपरा है। कृष्ण बलराम को नंदोत्सव के अवसर पर राखी बांधी जाएगी।
नंदभवन में आज नंदोत्सव के कार्यक्रम
नंदगांव बरसाना के गोपों के बीच संयुक्त समाज गायन, दोनों गांवों के गोपों के बीच हास परिहास, प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध, दधि कांधौ, बांस बधाई, शंकर लीला, संध्या को एतिहासिक विशाल दंगल होगा।
नंदबाबा मंदिर में अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते हैं। कृष्ण बलराम का शृंगार कर मां यशोदा के सिर पर प्रसूता की भांति पट्टी बांध दी जाती है। दर्शनों का सौभाग्य सेवायतों को ही प्राप्त होता है। शयन के समय नव प्रसूता के लिए औषधिप्रद वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। जन्म के बाद कन्हैया ने कटि काछनी में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
गोस्वामी समाज के युवकों को बांधी राखी
रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने से वंचित रहे भाइयों की कलाई पर बहनों ने राखी बांधी। नंदगांव में जन्माष्टमी पर भी राखी बांधने की परंपरा है। कृष्ण बलराम को नंदोत्सव के अवसर पर राखी बांधी जाएगी।
नंदभवन में आज नंदोत्सव के कार्यक्रम
नंदगांव बरसाना के गोपों के बीच संयुक्त समाज गायन, दोनों गांवों के गोपों के बीच हास परिहास, प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध, दधि कांधौ, बांस बधाई, शंकर लीला, संध्या को एतिहासिक विशाल दंगल होगा।