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पुराने पन्नों से: नेहरू को हराने के लिए उद्योगपतियों ने खोल दिया था खजाना...परिणाम देखकर सभी ने पकड़ लिया माथा
Wed, 10 Apr 2024 11:46 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अशोक सिंह, आगरा
अशोक सिंह, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 10 Apr 2024 11:46 AM IST
सार
एक समय समाजवाद की तरफ झुकाव रखने वाले नेहरू को हराने के लिए उद्योगपतियों ने अपना खजाना खोल दिया था। लेकिन परिणाम देखकर सभी अपना माथा पकड़कर बैठ गए थे। क्योंकि वह नेहरू को हरा नहीं पाए थे।
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नेहरू को हराने के लिए उद्योगपतियों ने लगा दिया था पूरा जोर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इन दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टियों में घमासान मचा हुआ है। खुद की जीत के लिए पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं। जनता के सामने खुद को बेहतर साबित करने में जुटी हैं। कई बार किसी समुदाय/संगठन द्वारा पार्टियों का गुणा गणित बिगाड़ने की कोशिश भी की जाती है।
ऐसा ही एक किस्सा 1952 में हुआ। जब धनकुबेरों ने पंडित नेहरू को हराने के लिए अपना खजाना खोल दिया था। बताते चलें कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का झुकाव समाजवाद की ओर था। देश के उद्योगपतियों को उनकी आर्थिक नीतियां नापसंद थीं। पहले चुनाव में नेहरू ने जौनपुर-इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से उतरने का फैसला किया।
देशभर के उद्योगपति उन्हें हराने के लिए एकजुट हो गए। उन्होंने जनसंघ के समर्थन से खड़े प्रभुदत्त ब्रह्रमचारी की जीत के लिए जी तोड़ प्रयास किया। नेहरू को हराने के लिए थैलियों के मुंह खोल दिए, लेकिन नेहरू के व्यक्तित्व और प्रसिद्धि के आगे ब्रह्मचारी जमानत भी नहीं बचा सके।
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ऐसा ही एक किस्सा 1952 में हुआ। जब धनकुबेरों ने पंडित नेहरू को हराने के लिए अपना खजाना खोल दिया था। बताते चलें कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का झुकाव समाजवाद की ओर था। देश के उद्योगपतियों को उनकी आर्थिक नीतियां नापसंद थीं। पहले चुनाव में नेहरू ने जौनपुर-इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से उतरने का फैसला किया।
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देशभर के उद्योगपति उन्हें हराने के लिए एकजुट हो गए। उन्होंने जनसंघ के समर्थन से खड़े प्रभुदत्त ब्रह्रमचारी की जीत के लिए जी तोड़ प्रयास किया। नेहरू को हराने के लिए थैलियों के मुंह खोल दिए, लेकिन नेहरू के व्यक्तित्व और प्रसिद्धि के आगे ब्रह्मचारी जमानत भी नहीं बचा सके।
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