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मोदी से मुलायम तक सब रहे निशाने पर
अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:53 AM IST
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मायावती
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री का नौ बार नाम लिया, पूरे भाषण में निशाने पर रखा, जनता से पूछा, श्री नरेंद्र मोदी ने विदेशों से काला धन लाकर गरीबों के खाते में 15-20 लाख रुपये जमा कराने का जो वादा किया था, वो पूरा हुआ या नहीं।
मोहन भागवत: आरएएस के हेड कहते हैं कि हिंदुओं को आबादी बढ़ानी चाहिए, उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहिए कि उन बच्चों के लिए रोजी और रोटी का इंतजाम कर पाएंगे या नहीं।
मुलायम सिंह यादव: श्री अखिलेश यादव को मुझे बुआ कहने का नैतिक अधिकार नहीं, क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने दो जून 1995 को (गेस्ट हाउस कांड) मुझ पर जो हमला कराया था, उसे लोग भूले नहीं हैं।
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अखिलेश यादव: भाषण के बीच में मुख्यमंत्री पर उनका नाम लेकर हमला बोला। महिला अपराध पर तो यहां तक कह दिया कि श्री अखिलेश यादव को राखी बंधवाने का नैतिक अधिकार नहीं क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।
शिवपाल यादव: नाम नहीं लिया, लेकिन अखिलेश के साथ उनके मतभेद की खबरों पर तीर चलाया। बोलीं, अपनी विफलता छिपाने के लिए यह लोग पहले परिवार में झगड़े का नाटक करते हैं और बाद में एक दूसरे की तारीफ करते हैं।
शीला दीक्षित: बगैर नाम लिए कहा, कांग्रेस ने बुजुर्ग महिला को यूपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया, जो पहले कहती थीं कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग दिल्ली को गंदा करते हैं।
सोनिया गांधी: न कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का सीधे नाम लिया और न ही उपाध्यक्ष राहुल गांधी का। हालांकि कांग्रेस को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
स्वामी प्रसाद मौर्य: नाम लिए बगैर निशाने पर रखा। कहा, ऐसे स्वार्थी नेता दूसरे दलों में जाकर बसपा पर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे नेताओं के पीछे समाज के लोग नहीं जाते।
मोहन भागवत: आरएएस के हेड कहते हैं कि हिंदुओं को आबादी बढ़ानी चाहिए, उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहिए कि उन बच्चों के लिए रोजी और रोटी का इंतजाम कर पाएंगे या नहीं।
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मुलायम सिंह यादव: श्री अखिलेश यादव को मुझे बुआ कहने का नैतिक अधिकार नहीं, क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने दो जून 1995 को (गेस्ट हाउस कांड) मुझ पर जो हमला कराया था, उसे लोग भूले नहीं हैं।
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अखिलेश यादव: भाषण के बीच में मुख्यमंत्री पर उनका नाम लेकर हमला बोला। महिला अपराध पर तो यहां तक कह दिया कि श्री अखिलेश यादव को राखी बंधवाने का नैतिक अधिकार नहीं क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं।
शिवपाल यादव: नाम नहीं लिया, लेकिन अखिलेश के साथ उनके मतभेद की खबरों पर तीर चलाया। बोलीं, अपनी विफलता छिपाने के लिए यह लोग पहले परिवार में झगड़े का नाटक करते हैं और बाद में एक दूसरे की तारीफ करते हैं।
शीला दीक्षित: बगैर नाम लिए कहा, कांग्रेस ने बुजुर्ग महिला को यूपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया, जो पहले कहती थीं कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग दिल्ली को गंदा करते हैं।
सोनिया गांधी: न कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का सीधे नाम लिया और न ही उपाध्यक्ष राहुल गांधी का। हालांकि कांग्रेस को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
स्वामी प्रसाद मौर्य: नाम लिए बगैर निशाने पर रखा। कहा, ऐसे स्वार्थी नेता दूसरे दलों में जाकर बसपा पर टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे नेताओं के पीछे समाज के लोग नहीं जाते।