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सावन का तीसरा सोमवार: कैलाशपति के दरबार में लगी भक्तों की कतार, बम बम भोले की गूंज
Mon, 05 Aug 2019 04:40 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 05 Aug 2019 04:40 PM IST
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कैलाश मंदिर में जलाभिषेक करते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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सावन के तीसरे सोमवार को आगरा के प्राचीन कैलाश महादेव मंदिर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर में भोले बाबा का अभिषेक प्रारंभ हो गया। लाखों की संख्या भक्त पहुंचे और जल, गंगाजल आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया।
श्रावण मास के चारों सोमवार को शहर के प्रमुख चार शिवालयों पर मेले का आयोजन किया जाता है। पहले सोमवार को श्री राजेश्वर महादेव, दूसरे सोमवार को बल्केश्वर महादेव और तीसरे सोमवार को कैलाश महादेव का मेला लगता है। चौथे सोमवार को पृथ्वीनाथ मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है।
इसी श्रंखला में तीसरे सोमवार को मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन रविवार शाम को हुआ था। सोमवार सुबह तीन बजे भगवान भोले नाथ का श्रृंगार किया और मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के खोल दिए गए। हर हर महादेव और बम भोले के जयकारे के साथ ही अभिषेक प्रारंभ हो गए।
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श्रावण मास के चारों सोमवार को शहर के प्रमुख चार शिवालयों पर मेले का आयोजन किया जाता है। पहले सोमवार को श्री राजेश्वर महादेव, दूसरे सोमवार को बल्केश्वर महादेव और तीसरे सोमवार को कैलाश महादेव का मेला लगता है। चौथे सोमवार को पृथ्वीनाथ मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है।
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इसी श्रंखला में तीसरे सोमवार को मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन रविवार शाम को हुआ था। सोमवार सुबह तीन बजे भगवान भोले नाथ का श्रृंगार किया और मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के खोल दिए गए। हर हर महादेव और बम भोले के जयकारे के साथ ही अभिषेक प्रारंभ हो गए।
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बड़ी संख्या में पहुंचे कावड़ियों ने पहले अभिषेक किया। इसके बाद भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ने लगी। भक्तों ने जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, इत्र आदि से भगवान का अभिषेक किया। उन्हें शक्कर, बेल पत्र, धतूरा, पुष्प तिल आदि अर्पित किए। सुबह से शाम तक अभिषेक का दौर चला।
कैलाश मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। गुरुद्वारा का गुरु का ताल से यातायात व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया गया। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार डीएफएमडी लगाया गया।
कैलाश मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। गुरुद्वारा का गुरु का ताल से यातायात व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया गया। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार डीएफएमडी लगाया गया।