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आगरा कथा: अकबर ने बनवाया नूरी दरवाजा, भगत सिंह ने दी नई पहचान, जानिए इसका इतिहास
Thu, 18 Mar 2021 12:02 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 18 Mar 2021 12:02 AM IST
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आगरा कथा: नूरी दरवाजा
- फोटो : अमर उजाला
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मुगल काल में शहंशाह अकबर ने नूरी दरवाजे का निर्माण कराया था, लेकिन नूरी दरवाजे को नई पहचान तब मिली, जब अंग्रेजी हुकूमत में क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त और भगवान ने नूरी दरवाजे की दो मंजिला कोठी में एक साल का समय बिताया।
इतिहासकार राज किशोर राजे ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि भगत सिंह ने नूरी गेट पर मकान नंबर 1784 लाला छन्नोमल से पांच रुपये प्रति माह के किराए पर लिया था। यहां अब भगत सिंह द्वार है और उनकी प्रतिमा भी स्थापित है। राज किशोर राजे के मुताबिक नूरी दरवाजा स्थित एक दो मंजिला मकान आज भी मौजूद है, जहां भगत सिंह साथियों के साथ यहां रहे थे। नूरी दरवाजे पर ही अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ने की रणनीति साथियों के साथ तैयार की थी। भगत सिंह ने अपना नाम बदलकर बलराज रखा था।
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अब होता है पेठे बनाने का काम
अब नूरी दरवाजा पेठा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां घर-घर में पेठा बनाने के कारखाने हैं। नूरी गेट पर ही शहर के प्रतिष्ठित पेठा व्यापारियों की दुकानें हैं, जबकि पुरानी हवेलियों और कोठियों के अंदर पेठा और बताशे बनाने के कारखाने हैं।
व्यापार का प्रमुख केंद्र था आगरा
राजकिशोर राजे ने बताया कि मुगलिया दौर में आगरा व्यापार का बड़ा केंद्र रहा। अकबर के समय में देश का ही नहीं, एशिया के प्रमुख बाजार लाहौर और आगरा थे। अकबर के वजीर ए आजम रहे अबुल फजल ने भी इसका वर्णन किया है। दरी-गलीचे, शॉल, मसाले, हाथी दांत, सूती वस्त्र, लोहे के हथियार का कारोबार होता था। आगरा और सीकरी में सिक्कों की टकसालें थीं।
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इतिहासकार राज किशोर राजे ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि भगत सिंह ने नूरी गेट पर मकान नंबर 1784 लाला छन्नोमल से पांच रुपये प्रति माह के किराए पर लिया था। यहां अब भगत सिंह द्वार है और उनकी प्रतिमा भी स्थापित है। राज किशोर राजे के मुताबिक नूरी दरवाजा स्थित एक दो मंजिला मकान आज भी मौजूद है, जहां भगत सिंह साथियों के साथ यहां रहे थे। नूरी दरवाजे पर ही अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ने की रणनीति साथियों के साथ तैयार की थी। भगत सिंह ने अपना नाम बदलकर बलराज रखा था।
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अब होता है पेठे बनाने का काम
अब नूरी दरवाजा पेठा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां घर-घर में पेठा बनाने के कारखाने हैं। नूरी गेट पर ही शहर के प्रतिष्ठित पेठा व्यापारियों की दुकानें हैं, जबकि पुरानी हवेलियों और कोठियों के अंदर पेठा और बताशे बनाने के कारखाने हैं।
व्यापार का प्रमुख केंद्र था आगरा
राजकिशोर राजे ने बताया कि मुगलिया दौर में आगरा व्यापार का बड़ा केंद्र रहा। अकबर के समय में देश का ही नहीं, एशिया के प्रमुख बाजार लाहौर और आगरा थे। अकबर के वजीर ए आजम रहे अबुल फजल ने भी इसका वर्णन किया है। दरी-गलीचे, शॉल, मसाले, हाथी दांत, सूती वस्त्र, लोहे के हथियार का कारोबार होता था। आगरा और सीकरी में सिक्कों की टकसालें थीं।