फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Hearing on Chambal Sanctuary matter to be held in Supreme Court today

अवैध खनन, पर्यावरण से खिलवाड़: अफसरों की बढ़ेगी मुश्किल, चंबल सेंक्चुअरी मामले में आज SC में सुनवाई

Tue, 11 Aug 2026 06:33 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Tue, 11 Aug 2026 06:33 AM IST
सार

चंबल सेंक्चुअरी में बालू के अवैध खनन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की मुश्किल बढ़ सकती है। मंगलवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। 

विज्ञापन
Hearing on Chambal Sanctuary matter to be held in Supreme Court today
चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा की चंबल सेंक्चुअरी में बालू के अवैध खनन को रोकने और पर्यावरण पर पड़ रहे असर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन नहीं हुआ है। चंबल सेंक्चुअरी से जुड़े तीनों राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मॉडल एसओपी तैयार हो सकी और न ही समान कार्ययोजना बनाई गई। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की ओर से चंबल नदी के ईको सिस्टम की रिपोर्ट भी नहीं सौंपी गई है। इसी तरह नेशनल हाईवे अथॉरिटी और पर्यावरण मंत्रालय ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी को अनुपालन से जुड़ा कोई ब्योरा नहीं दिया है।
विज्ञापन


 

यह तथ्य सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी चौथी रिपोर्ट में रखे हैं। कमेटी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गरकोटी की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट में 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर राज्य सरकारों और पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े बिंदुओं पर ब्योरा पेश किया गया है। इस रिपोर्ट में सीईसी के सदस्य सचिव ने कहा है कि तीनों राज्यों ने अनुपालन की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें अधिसूचनाओं का जारी करना, अंतिम रूप देना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, प्रवर्तन टीमों का गठन और निगरानी शामिल है। हालांकि एनएचएआई और पर्यावरण मंत्रालय ने अनुपालन रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

सीईसी ने सेंक्चुअरी में शामिल जमीन पर की है सिफारिश
सीईसी सदस्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने केवल सेंक्चुअरी क्षेत्र की राजस्व भूमि को संरक्षित या आरक्षित वनों में परिवर्तित करने की सिफारिश की है। ग्राम भूमि या निजी भूमि को संरक्षित या आरक्षित वनों में परिवर्तित करने की सिफारिश नहीं की है। यह सिफारिश भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 52 के तहत वन विभाग की प्रवर्तन शक्तियों पर लगी सीमाओं को दूर करने के उद्देश्य से की गई है। यह अवैध रूप से खनन की गई रेत और उपकरणों को जब्त करने के संबंध में है।

 
विज्ञापन

अनुपालन पर सुनवाई आज
चंबल सेंक्चुअरी की सुरक्षा और वन क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े मामले में अनुपालन पर सीईसी की इस रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी।



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed