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6.5 करोड़ खर्च, फिर भी मशीनों का ‘कैंसर’ नहीं हो रहा खत्म
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जिला अस्पताल स्थित कैंसर यूनिट
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। जिले की कैंसर यूनिट संचालन में एकबार फिर से रोड़ा अटक गया है। यहां लगी मशीनों का ‘कैंसर’ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब कार्यदायी संस्था सीमेंस ने खराब मशीनों के पार्ट्स उपलब्ध कराने में हाथ खड़े कर दिए हैं। 6.50 करोड़ की लागत से रखी गई मशीनें अब काम नहीं कर सकती हैं। पांच दिन पूर्व हुई जांच के बाद संस्था सीमेंस ने अपना पत्र सीएमस को भेज दिया है।
सीएम के निर्देश पर प्रदेश भर के कैंसर यूनिट को संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टीम भेजकर यूनिट में लगी मशीनों की जांच कराई गई थी। 27 जून को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी। सीएमएस ने इस संबंध में कार्यदायी संस्था सीमेंस को पत्र लिख पार्ट्स के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कही थी। लेकिन कार्यदायी संस्था सीमेंस ने सीएमएस को जवाब देते हुए बताया कि उनके पास इन मशीनों के पार्ट्स अब नहीं मिल सकते।
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नौ साल पहले स्थापित मशीनों के पार्ट्स बनना हुआ बंद
मैनपुरी। कार्यदायी संस्था सीमेंस ने सीएमएस को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2010 में उनके द्वारा जो मशीनें भेजी गई थीं उनका मॉडल काफी पुराना हो चुका है। उनके पार्ट्स भी मिलना बंद हो गए हैं। कार्यदायी संस्था ने कहा कि अब इन मशीनों के उपकरण उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
मैनपुरी। जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। लेकिन एक बार फिर से यूनिट संचालन में रोड़ा अटक गया है। जिले में कैंसर यूनिट होने के बाद भी कैंसर पीड़ित मरीजों को दिल्ली व ग्वालियर में उपचार कराना पड़ रहा है। जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या कम नहीं है। 500 से अधिक लोग वर्तमान में जिले में कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिन्हें सिकाई आदि के लिए ग्वालयिर व दिल्ली जाना पड़ता है।
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सीएम के निर्देश पर प्रदेश भर के कैंसर यूनिट को संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टीम भेजकर यूनिट में लगी मशीनों की जांच कराई गई थी। 27 जून को जिले में पहुंची डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने यूनिट की जांच की थी। कार्यदायी संस्था सीमेंस के सीनियर मैनेजर डॉ. अशोक चौधरी, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फिरोजाबाद के आरएसओ डॉ. नसीम अहमद, लखनऊ से अभिषेक गहलोत आदि की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
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टीम ने कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब होने के साथ ही लगभग दो करोड़ का खर्च आने की बात कही थी। सीएमएस ने इस संबंध में कार्यदायी संस्था सीमेंस को पत्र लिख पार्ट्स के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कही थी। लेकिन कार्यदायी संस्था सीमेंस ने सीएमएस को जवाब देते हुए बताया कि उनके पास इन मशीनों के पार्ट्स अब नहीं मिल सकते।
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नौ साल पहले स्थापित मशीनों के पार्ट्स बनना हुआ बंद
मैनपुरी। कार्यदायी संस्था सीमेंस ने सीएमएस को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2010 में उनके द्वारा जो मशीनें भेजी गई थीं उनका मॉडल काफी पुराना हो चुका है। उनके पार्ट्स भी मिलना बंद हो गए हैं। कार्यदायी संस्था ने कहा कि अब इन मशीनों के उपकरण उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
2005 में हुई थी यूनिट की स्थापना
मैनपुरी। जिले में कैंसर के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए वर्ष 2005 में कैंसर यूनिट के लिए सात करोड़ की धनराशि जारी की गई थी। वर्ष 2010 में 6.50 करोड़ की लागत से यहां मशीनों की स्थापना कराई गई थी। लेकिन एक बार फिर से यूनिट संचालन में रोड़ा अटक गया है। जिले में कैंसर यूनिट होने के बाद भी कैंसर पीड़ित मरीजों को दिल्ली व ग्वालियर में उपचार कराना पड़ रहा है। जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या कम नहीं है। 500 से अधिक लोग वर्तमान में जिले में कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिन्हें सिकाई आदि के लिए ग्वालयिर व दिल्ली जाना पड़ता है।