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मूल्यांकन में हैडिंग से जवाब तक हूबहू मिले

Tue, 05 Jul 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Tue, 05 Jul 2016 02:01 AM IST
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Heading in the exact evaluation of the answers given
काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर - फोटो : अमर उजाला
परीक्षक ने विवि के एमए हिंदी पहले साल के प्रथम प्रश्न पत्र में सामूहिक नकल की पुष्टि, उत्तरपुस्तिकाएं सीज
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मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी कफन यथार्थवादी है ... इसी वाक्य से शुरू उत्तरपुस्तिकाएं मिलीं 

पेपर था एमए हिंदी प्रथम साल का पहला पेपर आधुनिक गद्य साहित्य, प्रश्न पूछा था, प्रेमचंद्र की कहानी कफन के बारे में लिखिए ...जवाब लिखा मिला ‘मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी कफन यथार्थवादी है। एक, दो फिर तीसरी कापी में जवाब इसी वाक्य से शुरू। परीक्षक सेंट जोंस कालेज के हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. श्रीभगवान शर्मा का दिमाग चकरा गया। देखा पूरे बंडल का यही हाल। फिर क्या परीक्षक ने पहले प्रश्न से अंतिम तक के जवाबों का मिलान किया। परीक्षक दंग रह गए, कोड संख्या 6822714 से 6822725 तक की कापियों में हैडिंग से लेकर जवाब तक की एक-एक लाइन हूबहू एक ही मिली। परीक्षक ने पूरे बंडल को सामूहिक नकल की पुष्टि करते हुए सीज कर दिया। मामला डा. बीआरए विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस स्थित सेठ पदमचंद संस्थान का है। यहां चार दिन पूर्व से ही एमए हिंदी का मूल्यांकन शुरू हुआ है। प्रभारी डा. पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि सामूहिक नकल की पुष्टि हुई है, इसे कुलसचिव को सौंपा जाएगा।

70 फीसदी कापियों में नकल का अंदेशा 
परीक्षक 70 फीसदी कापियों में नकल का अंदेशा जता रहे हैं। इनमें हल हुए प्रश्नों का क्रम, जवाब भी लगभग एक जैसा, शब्द और बीच में लाइन कहीं-कहीं मिस है। परीक्षक मानते हैं कि इन्हें बोल-बोलकर नकल कराई गई होगी, जिससे जल्दबाजी में कोई वाक्य छूट गया है। 
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कापियां मिलाने से नकल पकड़ना मुश्किल 
रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी ने मूल्यांकन में पारदर्शिता बनाने के लिए अलग-अलग सेंटर की कापियां एक दूसरे में मिला दीं, इससे सेंटरों पर विभिन्न कोड नंबर वाली कापियां पहुंच रही हैं। इससे सामूहिक नकल की कापियां आसानी से पकड़ में नहीं आ रहीं। 
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बिना सचल दल के र्हुईं परीक्षाएं 
पंद्रह दिन की परीक्षा निपटने के बाद आठ सचल दल बनाए गए। दस दिन में 25 कालेजों में सामूहिक नकल पकड़ी गई। सचल दल पर कालेज संचालकों ने उगाही का आरोप लगाकर कुलपति आवास पर हंगामा किया तो सचल दल ने कालेजों में छापामार कार्रवाई बंद कर दी। इस तरह अधिकांश परीक्षाएं बिना सचल दल के हुईं। 


पिछले सत्र के सभी 56 कालेजों को क्लीन चिट 
नकल को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालय अधिकारियों की पूरी शह है। अंदाजा इसी से कि 2014-15 सत्र में सचल दल ने 54 कालेजों में सामूहिक नकल की पुष्टि कर परीक्षा निरस्त करने और सेंटर न बनाने की संस्तुति की। अधिकारियों ने सभी कालेजों को इस सत्र की मुख्य परीक्षा से पहले क्लीन चिट दे दी। इन्हीं अधिकारियों ने  पर्यवेक्षकों की निगरानी में परीक्षा कराने की बात कही, लेकिन पर्यवेक्षकों को नियुक्त ही नहीं किया। 
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