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Hathras Accident: 14 मौतों के बाद की चीत्कार...हादसे में घायल रती सुन न सके ये शोर, अस्पताल में फिर भर्ती

Tue, 10 Sep 2024 09:09 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 10 Sep 2024 09:09 AM IST
सार

हाथरस हादसे में सैमरा गांव के 14 लोगों की मौत के बाद गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस हादसे में घायल बैंड मास्टर रती जब घर आए, तो चीत्कार का शोर दिल में आघात कर रहा था। शायद यही वजह रही कि उनके सीने में दर्द उठा। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। 
 

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Hathras Accident: Screams after 14 deaths  Rati injured in accident admitted to hospital again
Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सैमरा गांव में हाथरस सड़क हादसे की वजह से सोमवार को भी गमगीन माहौल रहा। गलियों में जहां सन्नाटा पसरा दिखा वहीं मृतकों के घर चीत्कार मची रही। रविवार को घायल बुजुर्ग रती मास्टर को परिजन घर लेकर आए थे। मगर, सोमवार सुबह उनके सीने में दर्द उठा तो उन्हें फिर से आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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सैमरा में मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और एत्मादपुर के विधायक धर्मपाल सिंह पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। पीड़ितों ने उन्हें बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से घोषित दो-दो लाख रुपये के चेक तो मिल गए लेकिन केंद्र सरकार वाली राशि नहीं मिली। विधायक ने इस पर उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द ही यह राशि मिल जाएगी।
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हादसे में घायलों का उपचार आगरा और अलीगढ़ के अस्पतालों में जारी है। रदोपहर में गांव की हर गली सूनी थी। इक्का-दुक्का दुकानें खुलीं थीं। वहां बैठे लोग भी केवल हादसे की ही बात कर रहे थे। गांव की गलियों में जहां बच्चे खेला करते थे, वहां भी सन्नाटा रहा। मृतकों के घरों के सामने गांव के पुरुष खामोश और गमगीन बैठे थे। महिलाओं की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। मार्मिक दृश्य लोगों को झकझोर रहा था।

 

धर्म की टूटी दीवार, बने मददगार
सैमरा गांव में पिछले चार दिन से मातम पसरा है। पीड़ित पांच घरों में खाना नहीं बन रहा है। इनके लिए भोजन की व्यवस्था गांव के लोग ही कर रहे हैं। गांव में ठाकुर बिरादरी के ज्यादा लोग हैं। सभी ने मदद के लिए चंदा किया है।

 
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भाई का सेहरा सजाने से पहले उठ गया हामिद का जनाजा
हादसे में अपने बेटे, बहू, बेटी, दो नाती, एक धेवते को गंवा चुके चुन्नासी खां हाथों से विकलांग हैं। वे रुंधे गले से बताते हैं कि काफी समय पहले अग्निकांड में उनका शरीर जल गया था। जान अल्लाह के रहम से बच गई। मगर, विकलांग हो गए। गांव-कस्बे के लोगों से मदद मिल रही है। नेता लोग भी आए थे। वह भी बैंड मास्टर थे। बेटा हामिद, जो इस हादसे में मारा गया, वह फेरी लगाकर बर्तन बेचता था। उसकी कमाई से ही घर चल रहा था। पांच माह पहले छोटी बेटी की शादी की थी। हामिद ने अपने छोटे भाई दानिश के निकाह का अरमान सजा रखा था। 2 लाख रुपये की वीसी डाली हुई है। जब बेटा हामिद नहीं रहा तो उस वीसी को अब कौन भरेगा। छोटा बेटा दानिश भी बर्तन बेचता है। परंतु, उस अकेले की कमाई से उनका घर नहीं चल पाएगा।
 
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