नहीं रहे संगीतज्ञ पंडित केशव तलेगांवकर, कोरोना से जंग जीतने के बाद टूट गई सांसों की डोर
- कोरोना को मात देने के बाद तबीयत बिगड़ी और सांसों की डोर टूट गई
- पंडित केशव तलेगांवकर के निधन की खबर सुनकर संगीत प्रेमी स्तब्ध रह गए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुर और ताल के धनी पंडित केशव रघुनाथ तलेगांवकर (65) सोमवार रात 8:25 बजे दुनिया को अलविदा कह गए। कुछ दिन पहले ही कोरोना को मात देकर वह अस्पताल से घर पहुंचे थे, लेकिन निमोनिया के कारण तबीयत फिर से बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ हुई और अस्पताल में उपचार के दौरान ही सांसों की डोर टूट गई।
उनके पिता रघुनाथ तलेगांवकर ग्वालियर घराने के संगीतज्ञ थे। वे आगरा में आकर बस गए। यहीं पर केशव तलेगांवकर का जन्म हुआ। उनकी खूबी यह थी कि वह गिटार, तबला और गायन में महारथ हासिल थी। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि कोई संगीतज्ञ संगीत की इतनी विधाओं में पारंगत हो।
बड़े संगीतज्ञों के साथ साझा किया मंच
देश के सभी बड़े संगीतज्ञों के साथ उन्होंने मंच साझा दिया। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, चीन सहित 10 से अधिक देशों में संगीत का जादू बिखेरा। भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए चीन में तीन साल रहे।
आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिशासी एवं तलेगांवकर परिवार के बेहद करीबी श्रीकृष्ण ने बताया कि 15 दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिकंदरा में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां जांच में कोरोना मिला।
चार दिन पहले ठीक होकर तलेगांवकर घर पहुंच गए थे। फिर से उन्हें निमोनिया की शिकायत हुई। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर फिर से अस्पताल लाया गया। वहां उनका निधन हो गया।
पूरा परिवार संगीत को समर्पित
तलेगांवकर परिवार के सभी सदस्य संगीत को समर्पित हैं। केशव तलेगांवकर के तीनों भाई संगीतज्ञ हैं। पत्नी प्रतिभा सुर ताल की धनी है। दो बेटियों में बड़ी डॉ. मेघा की शादी हो चुकी है। वह और छोटी बेटी शुभा भी संगीतज्ञ हैं।
गजल गायक सुधीर नारायण ने बताया कि पंडित केशव तलेगांवकर संगीत कला केंद्र और पंडित रघुनाथ तलेगांवकर चेरीटेबल ट्रस्ट के संस्थापक और भगवती देवी जैन कन्या महाविद्यालय में संगीत विभाग के सेवानिवृत विभागाध्यक्ष थे। पहले उनके पिता और फिर वह नाद महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन कराया। यह परंपरा 55 साल से चल रही है। इसमें पंडित रवि शंकर सहित देश के बड़े संगीतज्ञ आ चुके हैं।