{"_id":"5d6381f48ebc3e01702cf457","slug":"girls-tortured-in-red-light-area-of-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सामने आया कश्मीरी बाजार के बंद कमरों का स्याह सच, नर्क बन गई थी 11 युवतियों की जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामने आया कश्मीरी बाजार के बंद कमरों का स्याह सच, नर्क बन गई थी 11 युवतियों की जिंदगी
Tue, 27 Aug 2019 12:23 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 27 Aug 2019 12:23 AM IST
विज्ञापन
पुलिस ने 11 युवतियों को कराया मुक्त
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा के कश्मीरी बाजार स्थित कोठों से मुक्त कराई गईं 11 युवतियां नौकरी का झांसा देकर लाई गईं थीं। पुलिस की पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें कैद करके रखा जाता था। खर्च के लिए रुपये भी नहीं दिए जाते थे। विरोध करने पर मारपीट तक होती थी।
कश्मीरी बाजार में सात कोठों पर 23 अगस्त को प्रयागराज की गुड़िया संस्था की सूचना पर पुलिस टीम ने छापा मारा था। इस दौरान 21 संचालिका, 11 ग्राहक और 11 पीड़ित युवतियों को पकड़ा था। पुलिस ने उद्धार अधिकारी मिंदर सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। 11 युवतियों को नारी संप्रेक्षण गृह भेजा गया। इनमें नेपाल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असोम, आगरा की दो-दो और मेरठ की एक हैं।
इनसे पहले पूछताछ भी की गई थी। युवतियों ने बताया कि उन्हें परिचित युवक नौकरी का झांसा देकर अपने साथ ले गए थे। इसके बाद एक जगह रखा गया। बाद में उन्हें कोठों पर लाकर बेच दिया गया। इसके बाद उन्हें कैद करके रखा जाने लगा।
विज्ञापन
बाद में देह व्यापार कराने लगे। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। उन्हें कोठे से बाहर भी जाने नहीं दिया जाता है। जब कभी बाहर जाने की कोशिश करते हैं तो संचालिका मारपीट करती थी। कोठे के गेट पर एक व्यक्ति निगरानी करता रहता था।
विज्ञापन
कश्मीरी बाजार में सात कोठों पर 23 अगस्त को प्रयागराज की गुड़िया संस्था की सूचना पर पुलिस टीम ने छापा मारा था। इस दौरान 21 संचालिका, 11 ग्राहक और 11 पीड़ित युवतियों को पकड़ा था। पुलिस ने उद्धार अधिकारी मिंदर सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। 11 युवतियों को नारी संप्रेक्षण गृह भेजा गया। इनमें नेपाल, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असोम, आगरा की दो-दो और मेरठ की एक हैं।
विज्ञापन
इनसे पहले पूछताछ भी की गई थी। युवतियों ने बताया कि उन्हें परिचित युवक नौकरी का झांसा देकर अपने साथ ले गए थे। इसके बाद एक जगह रखा गया। बाद में उन्हें कोठों पर लाकर बेच दिया गया। इसके बाद उन्हें कैद करके रखा जाने लगा।
विज्ञापन
बाद में देह व्यापार कराने लगे। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। उन्हें कोठे से बाहर भी जाने नहीं दिया जाता है। जब कभी बाहर जाने की कोशिश करते हैं तो संचालिका मारपीट करती थी। कोठे के गेट पर एक व्यक्ति निगरानी करता रहता था।
कोठे में बने हैं छोटे से कमरे
जिन कोठों में युवतियां रह रही थी, उनमें छोटे से कमरे बने हैं। इन कमरों में तीन से चार युवतियों को रखा जाता था। यहीं पर देह व्यापार भी कराया जा रहा था। बाहर संचालिका बैठकर निगरानी करती हैं। वहीं दलाल भी सक्रिय रहते हैं।
गुड़िया संस्था के समन्वयक उमाशंकर ने बताया कि हमारी संस्था ने कई जिलों में रेस्क्यू आपरेशन करके तीन हजार से अधिक युवतियों को देह व्यापार से मुक्ति दिलाई है। पश्चिम बंगाल और नेपाल की युवतियों को नौकरी और शादी का झांसा देकर लाया जा रहा है।
कोठों से मुक्त कराई गईं 11 युवतियों को घर भेजने की कवायद की जाएगी। गुड़िया संस्था के पदाधिकारी युवतियों की काउंसिलिंग करेंगे। उनके असली नाम और पते की जानकारी लेंगे। इसके बाद युवतियों को घर भेजा जाएगा।
गुड़िया संस्था के समन्वयक उमाशंकर ने बताया कि हमारी संस्था ने कई जिलों में रेस्क्यू आपरेशन करके तीन हजार से अधिक युवतियों को देह व्यापार से मुक्ति दिलाई है। पश्चिम बंगाल और नेपाल की युवतियों को नौकरी और शादी का झांसा देकर लाया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: कोठों से मुक्त कराई गईं युवतियों की आपबीती, शादी का झांसा देकर 'अपनों' ने बेचा
एक बार देह व्यापार में फंसने के बाद युवतियां बाहर नहीं निकल पाती हैं। एक से दो लाख में बेच दी जाती हैं। पुलिस को देह व्यापार की जानकारी होती है। मगर, कार्रवाई नहीं की जाती है।कोठों से मुक्त कराई गईं 11 युवतियों को घर भेजने की कवायद की जाएगी। गुड़िया संस्था के पदाधिकारी युवतियों की काउंसिलिंग करेंगे। उनके असली नाम और पते की जानकारी लेंगे। इसके बाद युवतियों को घर भेजा जाएगा।