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गर्भवती महिलाओं से तेजी से फैल रही ये बीमारी, बच्चे के विकास पर पड़ सकता है असर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 19 Oct 2018 03:01 AM IST
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गर्भावस्था में महिलाएं मधुमेह की गिरफ्त में तेजी से आ रही हैं। सामान्य महिला रोगी के मुकाबले जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था में होने वाला मधुमेह) रोगियों की संख्या दोगुनी से अधिक है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में जेस्टेशनल डायबिटीज की जांच अनिवार्य कर दी गई है।
आगरा के लेडी लायल में औसतन हर महीने 150-180 गर्भवती महिलाओं की मधुमेह की जांच हो रही है। इसमें से 18 से 40 जेस्टेशनल डायबिटीज के मरीज पाए गए। सामान्य महिलाओं में 16 से 20 मरीज मधुमेह के मिले।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोंस बनने पर ग्लूकोज बनता है, इससे शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसके कारण 16 फीसदी तक महिलाएं जेस्टेशनल डायबिटीज की चपेट में आ जाती हैं।
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आगरा के लेडी लायल में औसतन हर महीने 150-180 गर्भवती महिलाओं की मधुमेह की जांच हो रही है। इसमें से 18 से 40 जेस्टेशनल डायबिटीज के मरीज पाए गए। सामान्य महिलाओं में 16 से 20 मरीज मधुमेह के मिले।
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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोंस बनने पर ग्लूकोज बनता है, इससे शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसके कारण 16 फीसदी तक महिलाएं जेस्टेशनल डायबिटीज की चपेट में आ जाती हैं।
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इस बात का रखें ध्यान
खानपान ठीक करने पर 25 फीसदी मरीजों में जेस्टेशनल डायबिटीज नियंत्रित की जा सकती है। इसकी जांच गर्भधारण के 24वें सप्ताह या फिर छठे महीने में 75 ग्राम ग्लूकोज पिलाने के दो घंटे बाद की जाती है। रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 140 एमजी से ज्यादा होने पर गर्भवती जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित हैं।
गर्भस्थ शिशु के विकास पर पड़ता है असर
जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिला के शिशु का विकास प्रभावित होता है। लेडी लायल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजू बंसल ने बताया कि जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़िता का प्रसव कराने में जटिलता आती हैं।
प्री-मैच्योर डिलीवरी का भी खतरा रहता है। शिशु ओवर वेट हो सकता है। जेस्टेशनल डायबिटीज शिकार महिलाओं के एक तिहाई बच्चों में प्री-डायबिटीज के लक्षण पाए गए।
गर्भस्थ शिशु के विकास पर पड़ता है असर
जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिला के शिशु का विकास प्रभावित होता है। लेडी लायल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रंजू बंसल ने बताया कि जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़िता का प्रसव कराने में जटिलता आती हैं।
प्री-मैच्योर डिलीवरी का भी खतरा रहता है। शिशु ओवर वेट हो सकता है। जेस्टेशनल डायबिटीज शिकार महिलाओं के एक तिहाई बच्चों में प्री-डायबिटीज के लक्षण पाए गए।