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अब गांव की सड़कें हुईं 'ऑनलाइन', एक क्लिक पर दिखेगा हाल, गड्ढे भी देंगे दिखाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला एटा
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:45 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों का हाल इंटरनेट पर भी देख सकेंगे। सड़क पर हुए गड्ढे कंप्यूटर पर दिखाई देंगे। समय से पहले सड़क के उखड़ने पर ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार ने यह नई पहल की है।
सड़कों की जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) मैपिंग कराई गई है। इसके जरिए गांवों की सड़कों का हाल एक क्लिक पर दिख सकेगा। दरअसल, गांव की सड़कों के विकास के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की थी।
इस योजना के तहत गांव की जर्जर सड़कों को नए तरीके से बनाया गया, लेकिन आलम यह हुआ कि सड़कों के समय से पहले ही जर्जर और बदहाल होने की शिकायतें आने लगीं। कहीं-कहीं यह भी हुआ कि सड़क सही होने के बाद दोबारा प्रस्ताव भेजकर बजट स्वीकृत करा लिया गया।
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सड़कों की जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) मैपिंग कराई गई है। इसके जरिए गांवों की सड़कों का हाल एक क्लिक पर दिख सकेगा। दरअसल, गांव की सड़कों के विकास के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की थी।
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इस योजना के तहत गांव की जर्जर सड़कों को नए तरीके से बनाया गया, लेकिन आलम यह हुआ कि सड़कों के समय से पहले ही जर्जर और बदहाल होने की शिकायतें आने लगीं। कहीं-कहीं यह भी हुआ कि सड़क सही होने के बाद दोबारा प्रस्ताव भेजकर बजट स्वीकृत करा लिया गया।
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सड़कों की जीआईएस मैपिंग
अब सरकार ने सड़कों की जीआईएस मैपिंग करा दी है। इसके तहत हर सड़क को अक्षांश-देशांतर के साथ ऑनलाइन टैग किया गया है। इसके जरिए अधिकारी कंप्यूटर पर सड़क की स्थिति जान पाएंगे।
इसके साथ ही समय से पहले सड़क के बदहाल होने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। ग्राम्य विकास विभाग द्वारा कराई गई जीआईएस मैपिंग में फिलहाल सभी सड़कों का हाल ठीक पाया गया है, लेकिन भविष्य में जवाबदेही तय करने के लिए पहल सार्थक साबित हो सकती है।
एटा जिले में फिलहाल नौ संपर्क मार्गों का निर्माण ग्राम्य विकास विभाग के जिम्मे है। वर्ष 2017-18 में स्वीकृत इन मार्गों का निर्माण बजट के अभाव में अटका है। जून 2018 तक छह संपर्क मार्गों का 7.55 किमी काम पूरा हो चुका है।
जबकि 4.61 किमी काम पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए विभाग ने सात करोड़ रुपये की शासन से मांग की है। विभाग की मानें तो 12.160 किमी के काम के लिए 1.49 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इसके साथ ही समय से पहले सड़क के बदहाल होने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। ग्राम्य विकास विभाग द्वारा कराई गई जीआईएस मैपिंग में फिलहाल सभी सड़कों का हाल ठीक पाया गया है, लेकिन भविष्य में जवाबदेही तय करने के लिए पहल सार्थक साबित हो सकती है।
एटा जिले में फिलहाल नौ संपर्क मार्गों का निर्माण ग्राम्य विकास विभाग के जिम्मे है। वर्ष 2017-18 में स्वीकृत इन मार्गों का निर्माण बजट के अभाव में अटका है। जून 2018 तक छह संपर्क मार्गों का 7.55 किमी काम पूरा हो चुका है।
जबकि 4.61 किमी काम पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए विभाग ने सात करोड़ रुपये की शासन से मांग की है। विभाग की मानें तो 12.160 किमी के काम के लिए 1.49 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
आरईएस के सहायक अभियंता एपी सिंह का कहना है कि जिले की सभी सड़कों की जीआईएस मैपिंग करा दी गई है। इससे सड़कों की स्थिति ऑनलाइन पता लगती रहेगी। वहीं अन्य सड़कों के निर्माण को बजट की मांग की गई है।
क्या कहते हैं आंकड़े
254 सड़कें हैं जिले में योजना के तहत
680 किमी सड़कों का हुआ है निर्माण
138 करोड़ रुपये से कराया गया निर्माण
09 सड़कों का चल रहा है निर्माण कार्य
क्या कहते हैं आंकड़े
254 सड़कें हैं जिले में योजना के तहत
680 किमी सड़कों का हुआ है निर्माण
138 करोड़ रुपये से कराया गया निर्माण
09 सड़कों का चल रहा है निर्माण कार्य
क्या है जीआइएस
जीआइएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से किसी क्षेत्र की मैपिंग की जाती है। इसके बाद प्राप्त डाटा के माध्यम से कहीं भी बैठकर कंप्यूटर के जरिए उस पूरे क्षेत्र की सटीक जानकारी हासिल की कर ली जाती है। खासकर इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल जमीन, कृषि, रक्षा, परमाणु विज्ञान, नक्शा, टाउन प्लानर, मैपिंग, मोबाइल में खूब होता है।