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महात्मा गांधी जयंती विशेष: जहां पेट दर्द दूर करने आए थे बापू, वहां का पानी कर रहा बीमार; 1000 लोग हुए दिव्यांग

Wed, 02 Oct 2024 04:29 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 02 Oct 2024 04:29 PM IST
सार

95 साल पहले 1929 में महात्मा गांधी 11 दिनों तक एत्माद्दौला की बगीची में रहे थे। पेट दर्द के बाद त्वचा रोग निदान के लिए वृथला के कुंड में भी स्नान करने भी गए थे। 

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Gandhi Jayanti water of place where Bapu had come to get rid of his stomach ache is now making people sick
गांधी स्मारक आगरा - फोटो : संवाद

विस्तार

आगरा के एत्माद्दौला स्मारक से सटी बगीची के कुएं का पानी पीकर अपना पेट दर्द ठीक करने के लिए महात्मा गांधी आए थे। बापू 95 साल पहले यमुना नदी के किनारे बसी इस बगीची में रुके थे।11 दिन तक वह यमुना किनारे की बगीची में रहे। पेट दर्द ठीक होने के बाद ही गए। आज उस आगरा में भूगर्भ जल लोगों को बीमार कर रहा है। पानी में फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा होने से पट्टी पचगईं, पचगाई खेड़ा और ग्वालियर रोड के गांवों में भूगर्भ जल पीने से लोगों की हड्डियां टेढ़ी हो रही हैं।

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गांधी स्मारक में लगी पट्टिका में दर्ज है कि 11 से 21 सितंबर 1929 तक महात्मा गांधी यमुना पार बृजमोहन दास मेहरा की बगीची में कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और प्रभावती के साथ प्रवास के लिए आए थे। वह पेट दर्द से पीड़ित थे और उन्हें बताया गया था कि इस बगीची के कुएं के मीठे पानी से पेट दर्द दूर हो जाता है। 

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बापू यहां सिर्फ दो दिन के लिए आए थे, पर बगीची, कुआं और यमुना का किनारा उन्हें ऐसा भाया कि 11 दिन तक रुके। वर्ष 1948 में बृजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता राम कृष्ण दास मेहरा की स्मृति में बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया।
 

पानी से बापू ठीक, अब लोग दिव्यांग हुए

यमुना किनारे बसे आगरा में भूगर्भ जल को रिचार्ज नहीं करने और अति दोहन से कई मुश्किल आ गईं। जिस आगरा में बापू स्वास्थ्य लाभ के लिए आए, वहां अब पचगाई खेड़ा, पट्टी पचगईं सहित 8 गांवों में फ्लोराइडयुक्त पानी से 1000 लोग दिव्यांग हो गए। 10 हजार से अधिक युवा बीमार हैं। फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा के कारण तीन ब्लॉक में भूगर्भ जल पीने योग्य नहीं है। इनमें सैंया, एत्मादपुर और खंदौली है।
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हाईकोर्ट में लगाई है शुद्ध पानी के लिए गुहार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पट्टी पचगईं निवासी गिरीश चंद्र शर्मा ने याचिका दायर की हुई है। उनकी याचिका में कहा गया है कि पट्टी पचगईं, पचगाई खेड़ा, देवरी, गढ़ी देवरी, नगला, रोहता, रोहता की गढ़ी, अस्तल और नगला भर्ती में करीब 25 हजार आबादी है। 
 

इनमें 1000 बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं दिव्यांग हैं। फ्लोराइडयुक्त पानी से इनके हाथ, पैर की हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो गई हैं। इन आठ गांवों में 10 बार टीटीएसपी, पाइपलाइन और ओवरहेड योजनाएं बनीं लेकिन फेल हो गईं।

22 साल से मांग कर रहे

हम 22 साल से पानी की लड़ाई लड़ रहे हैं। पानी में फ्लोराइड ज्यादा होने से लोगों की हड्डियां टेढ़ी पड़ गईं। दिव्यांग हो गए, लेकिन सरकार को चिंता नहीं। अब तक गंगाजल की सप्लाई नहीं हुई। -गिरीश चंद्र शर्मा, निवासी पट्टी पचगईं

भूगर्भ जल की हालत खराब

यह बेहद दुखद पहलू है कि जिस आगरा में बापू स्वास्थ्य लाभ के लिए आए, वहां की हवा, पानी सब जहरीला हो चुका है। भूगर्भ जल की हालत बेहद खराब है। यमुना नदी का शहर गंगाजल पर निर्भर हो चुका है। -राजीव सक्सेना, सिविल सोसायटी

बारिश का पानी सहेजना होगा

बारिश के पानी को सहेजकर ही आगरा अपनी समस्या दूर कर पाएगा। भूगर्भ जल की अशुद्धियों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से सुधारा जा सकता है। नदियों, तालाबों में पानी रोकेंगे तो भूगर्भ जल स्तर सुधरेगा। -अनिल शर्मा, सिविल सोसायटी

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