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Agra News: टेरर फंडिंग से खाते में ली रकम, जाना होगा जेल... डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 7.50 लाख
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डिजिटल अरेस्ट एआई।
आगरा। टेरर फंडिंग में नाम आया है। पुलवामा आतंकी हमले से जुड़ी रकम खाते में ली गई है। अब जेल जाना होगा। जांच एजेंसी का सहयोग करेंगी तो बच जाएंगी। किसी को कुछ बताया तो मदद नहीं करेंगे। साइबर अपराधियों ने गुरु तेग बहादुर काॅलोनी, सिकंदरा की शिक्षिका मंजीत काैर को इसी तरह डिजिटल अरेस्ट कर लिया।
इसके बाद 10 दिन तक एक-एक घंटे डराकर जेल भेजने की धमकी देकर दहशत में डाला। चेक से खातों में 7.50 लाख रुपये जमा करा लिए। अपराधियों ने साइबर सेल रकम वापसी के लिए भेजा था। तब उन्हें ठगी का पता चला। शिक्षिका की उम्र 65 साल है। वह एक विद्यालय में पढ़ाती थीं। वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। पति दुकान चलाते थे। तीन बच्चे दिल्ली एनसीआर में रहते हैं।
पुलिस के मुताबिक, 9 मार्च को उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। काॅल करने वाले ने कहा कि तुम्हारा नाम पुलवामा आतंकी हमले में आया है। तुम्हारे खातों में टेरर फंडिंग हुई है। इससे मंजीत काैर घबरा गईं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा क्यों करेंगी। कोई गलतफहमी हो गई है। बाद में उनसे वीडियो काॅल पर बात की गई। बात करने वाला पुलिस की वर्दी में था। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के मामले में कई जांच एजेंसी पड़ताल में जुटी हैं।
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आपके खाते के बारे में पता चला था। इसमें करोड़ों की रकम जमा हुई थी। जांच होने तक आपको डिजिटल अरेस्ट किया जाता है। अगर किसी को बताया तो तत्काल पुलिस आकर गिरफ्तार कर लेगी। पति को भी पकड़ लिया जाएगा। इससे मंजीत और उनके पति घबरा गए। उन्हें एक घंटे के लिए डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। डर की वजह से उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। अगले दिन कॉल कर उनसे रकम मांगी जाने लगी। कहा कि यह रकम वापस कर दी जाएगी। इस पर वो बैंक गई। चेक के माध्यम से रकम जमा कर दी। इस तरह से 19 मार्च तक डिजिटल अरेस्ट कर तीन बार में रकम जमा करा ली गई।
- साइबर सेल पहुंचने पर मिली जानकारी
साइबर क्राइम थाने के मुताबिक, मंजीत काैर का पति के साथ संयुक्त बैंक खाता है। पति व्हाट्सएप नहीं चलाते हैं। मंजीत व्हाट्सएप चलाती हैं। इस कारण ही साइबर अपराधियों ने उन्हें कॉल किया था। रकम भी चेक से जमा कराते थे। पीड़िता ने बताया कि यह रकम सेवानिवृत्त होने के बाद मिली थी। साइबर अपराधियों ने सब कुछ ले लिया। उनसे कहा था कि जो भी रकम ली जा रही है, उसे कुछ दिन बाद पुलिस वापस कर देगी। साइबर सेल जाने पर यह रकम मिल जाएगी। 20 मार्च को वो साइबर सेल पहुंचीं, तब पता चला कि इस तरह पुलिस कभी काॅल नहीं करती है। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कार्रवाई पुलिस नहीं कर सकती। उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जिन खातों में रकम गई है, उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि जिन खातों में रकम जमा हुई, वो किसी सजदा खातून, नयाब सलीम, अजामुद्दीन के नाम से हैं। यह कहां और किसने खुलवाए हैं? इनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। डिजिटल अरेस्ट पुलिस कभी नहीं करती है। अगर यह बात कहकर कोई काॅल करे तो हेल्पलाइन नंबर 1930 और पुलिस से शिकायत करें।
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इसके बाद 10 दिन तक एक-एक घंटे डराकर जेल भेजने की धमकी देकर दहशत में डाला। चेक से खातों में 7.50 लाख रुपये जमा करा लिए। अपराधियों ने साइबर सेल रकम वापसी के लिए भेजा था। तब उन्हें ठगी का पता चला। शिक्षिका की उम्र 65 साल है। वह एक विद्यालय में पढ़ाती थीं। वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। पति दुकान चलाते थे। तीन बच्चे दिल्ली एनसीआर में रहते हैं।
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पुलिस के मुताबिक, 9 मार्च को उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। काॅल करने वाले ने कहा कि तुम्हारा नाम पुलवामा आतंकी हमले में आया है। तुम्हारे खातों में टेरर फंडिंग हुई है। इससे मंजीत काैर घबरा गईं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा क्यों करेंगी। कोई गलतफहमी हो गई है। बाद में उनसे वीडियो काॅल पर बात की गई। बात करने वाला पुलिस की वर्दी में था। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के मामले में कई जांच एजेंसी पड़ताल में जुटी हैं।
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आपके खाते के बारे में पता चला था। इसमें करोड़ों की रकम जमा हुई थी। जांच होने तक आपको डिजिटल अरेस्ट किया जाता है। अगर किसी को बताया तो तत्काल पुलिस आकर गिरफ्तार कर लेगी। पति को भी पकड़ लिया जाएगा। इससे मंजीत और उनके पति घबरा गए। उन्हें एक घंटे के लिए डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। डर की वजह से उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। अगले दिन कॉल कर उनसे रकम मांगी जाने लगी। कहा कि यह रकम वापस कर दी जाएगी। इस पर वो बैंक गई। चेक के माध्यम से रकम जमा कर दी। इस तरह से 19 मार्च तक डिजिटल अरेस्ट कर तीन बार में रकम जमा करा ली गई।
- साइबर सेल पहुंचने पर मिली जानकारी
साइबर क्राइम थाने के मुताबिक, मंजीत काैर का पति के साथ संयुक्त बैंक खाता है। पति व्हाट्सएप नहीं चलाते हैं। मंजीत व्हाट्सएप चलाती हैं। इस कारण ही साइबर अपराधियों ने उन्हें कॉल किया था। रकम भी चेक से जमा कराते थे। पीड़िता ने बताया कि यह रकम सेवानिवृत्त होने के बाद मिली थी। साइबर अपराधियों ने सब कुछ ले लिया। उनसे कहा था कि जो भी रकम ली जा रही है, उसे कुछ दिन बाद पुलिस वापस कर देगी। साइबर सेल जाने पर यह रकम मिल जाएगी। 20 मार्च को वो साइबर सेल पहुंचीं, तब पता चला कि इस तरह पुलिस कभी काॅल नहीं करती है। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कार्रवाई पुलिस नहीं कर सकती। उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जिन खातों में रकम गई है, उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि जिन खातों में रकम जमा हुई, वो किसी सजदा खातून, नयाब सलीम, अजामुद्दीन के नाम से हैं। यह कहां और किसने खुलवाए हैं? इनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। डिजिटल अरेस्ट पुलिस कभी नहीं करती है। अगर यह बात कहकर कोई काॅल करे तो हेल्पलाइन नंबर 1930 और पुलिस से शिकायत करें।