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फिरोजाबाद : हर तीसरी गर्भवती महिला में खून की कमी
Mon, 29 Jan 2024 02:42 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 29 Jan 2024 02:42 AM IST
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फिरोजाबाद। जिले में गर्भवती महिलाएं खतरे से जूझ रही हैं। 45.8 फीसदी गर्भवती एनीमिया से ग्रसित पाई गई हैं। छह से 59 माह की 73.9 और 19 से 49 साल की 57.7 प्रतिशत महिलाएं इससे पीड़ित हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 5 (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट कुछ ऐसा ही बता रही है। विभागीय जानकारों के अनुसार, प्रसव पूर्व जांच में कई गर्भवती महिलाओं में चार से पांच प्रतिशत ही खून मिल रहा है।
गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए संचालित तमाम योजनाओं की पोल नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट ने खोल दी है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला को गर्भधारण से प्रसव होने तक छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत संतुलित पोषण आहार भी दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में हर माह जांच के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। जब यह योजनाएं नहीं थीं तब वर्ष 2015 के सर्वे में यह संख्या कुल 32.8 फीसदी थी।
14 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए खून
सामान्य तौर पर महिलाओं में 14 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक रक्त होना चाहिए। मगर, अस्पताल में जांच के दौरान तमाम गर्भवती महिलाओं में 10 ग्राम डेसीलीटर और कुछ में इससे भी कम रक्त रहता है। यह बेहद खतरनाक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डाॅ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि खून की कमी गर्भवती के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी घातक है। यही कारण है कि अक्सर प्रसव से पहले महिला को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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खून की कमी के लक्षण
त्वचा का सफेद दिखना।
जीभ, नाखूनों व पलकों के अंदर सफेदी।
कमजोरी महसूस होना।
बहुत अधिक थकावट होना।
चक्कर आना।
बेहोश हो जाना।
सांस फूलना।
हृदयगति का तेज होना। चेहरे व पैरों पर सूजन दिखाई देना।
ये करें महिलाएं
- चुकंदर आयरन की कमी को तुरंत दूर करता है। यह हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
- अनार का जूस या इनके दानों का सुबह-शाम सेवन करें।
- ड्राई फूट्स, अलसी के बीजों का सेवन करें।
- गुड़ खाने से भी आयरन की कमी दूर होती है।
- गर्भवती की समय-समय पर जांच होती है। खान-पान में कमी के कारण महिलाएं रक्त की कमी से जूझ रही हैं। इसके लिए हम आयरन की दवा का वितरण कराते हैं। स्वास्थ्य परिवार संरक्षण की रिपोर्ट में एनीमिक महिलाओं की संख्या बढ़ी है।
-डॉ. बीडी अग्रवाल, एसीएमओ
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गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए संचालित तमाम योजनाओं की पोल नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट ने खोल दी है। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिला को गर्भधारण से प्रसव होने तक छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत संतुलित पोषण आहार भी दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में हर माह जांच के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। जब यह योजनाएं नहीं थीं तब वर्ष 2015 के सर्वे में यह संख्या कुल 32.8 फीसदी थी।
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14 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए खून
सामान्य तौर पर महिलाओं में 14 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक रक्त होना चाहिए। मगर, अस्पताल में जांच के दौरान तमाम गर्भवती महिलाओं में 10 ग्राम डेसीलीटर और कुछ में इससे भी कम रक्त रहता है। यह बेहद खतरनाक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डाॅ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि खून की कमी गर्भवती के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी घातक है। यही कारण है कि अक्सर प्रसव से पहले महिला को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
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खून की कमी के लक्षण
त्वचा का सफेद दिखना।
जीभ, नाखूनों व पलकों के अंदर सफेदी।
कमजोरी महसूस होना।
बहुत अधिक थकावट होना।
चक्कर आना।
बेहोश हो जाना।
सांस फूलना।
हृदयगति का तेज होना। चेहरे व पैरों पर सूजन दिखाई देना।
ये करें महिलाएं
- चुकंदर आयरन की कमी को तुरंत दूर करता है। यह हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
- अनार का जूस या इनके दानों का सुबह-शाम सेवन करें।
- ड्राई फूट्स, अलसी के बीजों का सेवन करें।
- गुड़ खाने से भी आयरन की कमी दूर होती है।
- गर्भवती की समय-समय पर जांच होती है। खान-पान में कमी के कारण महिलाएं रक्त की कमी से जूझ रही हैं। इसके लिए हम आयरन की दवा का वितरण कराते हैं। स्वास्थ्य परिवार संरक्षण की रिपोर्ट में एनीमिक महिलाओं की संख्या बढ़ी है।
-डॉ. बीडी अग्रवाल, एसीएमओ