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पटाखों पर प्रतिबंध: दिवाली पर आगरा में नहीं सुनाई देगा आतिशबाजी का शोर, बिक्री पर रहेगी रोक

Fri, 08 Oct 2021 09:12 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 08 Oct 2021 09:12 AM IST
सार

आगरा 300 एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) वाले शहरों में शुमार है। इसके कारण जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। जिसके चलते लगातार दूसरी साल कोठी मीना बाजार सहित 27 स्थानों पटाखा बाजार नहीं सजेंगे। 

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firecrackers banned in Agra
आगरा: पटाखों पर प्रतिबंध

विस्तार

ताजनगरी में दिवाली पर पटाखों का शोर सुनाई देगा। न हवा में बारुद का धुआं दिखाई देगा। त्योहार पर वायु प्रदूषण से बचाव के लिए पटाखा बिक्री व इस्तेमाल पर जिला प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है। कोठी मीना बाजार, जीआईसी सहित विभिन्न 27 से अधिक स्थानों पर सजने वाले पटाखा बाजार लगातार दूसरी बार नहीं सजेंगे।

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पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। जिन शहरों में वायु गुणता 300 एक्यूआई है उनमें ताजनगरी शामिल है। जिसके कारण यहां पटाखों की बिक्री बंद हैं। 
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एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने बताया कि दिवाली पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी। पटाखों की अवैध बिक्री व कारोबार करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट व पुलिस टीमें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा, टीटीजेड में पहले से ही वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। नवंबर के पहले सप्ताह में दिवाली है।

आवंटन के बाद निरस्त करनी पड़ी थीं दुकानें
पिछले साल कोरोना काल में पटाखा बाजारों के लिए दुकानें आवंटित होने के बाद डीएम प्रभु एन सिंह को त्योहार से दो दिन पहले आवंटन निरस्त करने पड़े थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश प्राप्त होने के कारण आवंटियों को उनके द्वारा जमा कराई जमानत राशि जिला प्रशासन ने वापस कराई थी। 

50 से 70 करोड़ का कारोबार
ताजनगरी में ऐसा दूसरी बार होगा जब पटाखे नहीं चलेंगे। 2019 और उससे पहले तक दिवाली के त्योहार पर 50 से 70 करोड़ रुपये का पटाखों का कारोबार होता था। घनी बस्तियों से लेकर गांव-देहात तक पटाखा गोदाम हैं। जहां छह महीने पहले से ही पटाखों का निर्माण व स्टॉक शुरू हो जाता था। 
  
हादसों में आएगी कमी
पर्यावरण विशेषज्ञ बृज खंडेलवाल ने बताया कि पटाखों पर स्थाई रोक लगने से त्योहार पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। 2019 में 54 हादसे हुए थे। 24 घंटे जिला अस्पताल व एसएन की इमरजेंसी खुली रहती थीं। ताकि हादसा होने पर घायलों को उपचार मिल सके। 

संवेदनशील क्षेत्र घोषित है शहर
ताज ट्रिपिजयम जोन (टीटीजेड) के तहत पर्यावरणीय दृष्टि से ताजनगरी संवेदनशील क्षेत्र घोषित है। पटाखों में इस्तेमाल होने वाले गंधक, पोटाश व अन्य गोला-बारुद से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ता है। हवा में प्रदूषण बढ़ने से सांस व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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