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UP: महिला की थाने में पिटाई, चार पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा; उनकी तैनाती पर उठे सवाल
Sat, 13 Jun 2026 10:09 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:09 AM IST
सार
महिला की पिटाई के आरोप में कोर्ट के आदेश पर तीन दरोगाओं और एक सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाया है कि आरोपित पुलिसकर्मी अभी भी उसी थाने में तैनात हैं, जहां उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है।
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FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महिला की पिटाई के मामले में सत्र न्यायालय से रिवीजन खारिज होने के बाद थाना सिकंदरा पुलिस फंस गई है। कोर्ट के आदेश पर तीन दरोगा और एक सिपाही के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई मगर आरोपी पुलिसकर्मियों को छह दिन बाद कार्रवाई से छूट मिली हुई है। जिस थाने में पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी है, उसी थाने में अब तक उनकी तैनाती पर पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाए हैं।
किरावली मोड़, रुनकता निवासी सीमा सिकरवार को थाना शाहगंज में दर्ज मारपीट, गालीगलाैज, धमकी सहित अन्य के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने पर 4 जून को गिरफ्तार किया गया था। 5 जून को पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। सीमा सिकरवार ने पुलिस पर पिटाई के आरोप लगाए थे। कहा था कि पुलिस ने बेल्ट से पीटा। कोर्ट के आदेश पर बोर्ड से मेडिकल कराया गया, इसमें तीन जगह चोट की पुष्टि हुई। इस पर कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज दर्ज करने के आदेश किए।
इस आदेश के खिलाफ पुलिस ने सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया। बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया। इस पर देर रात प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें दरोगा सुरजीत सिंह, नीलेश शर्मा, नेहा और आरक्षी नेहा को नामजद किया गया। सीमा सिकरवार ने इन्हीं पर पिटाई के आरोप लगाए थे। आरोपी पुलिसकर्मियों की तैनाती अभी थाने में ही है। पीड़ित सिकरवार का कहना है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से ही न्याय नहीं मिलेगा। दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन पर विभागीय कार्रवाई भी हो। पीड़ित का कहना है कि महिला से मारपीट के लिए इंस्पेक्टर भी जिम्मेदार हैं। थाने में पुलिसकर्मी के कार्य के लिए इंस्पेक्टर ही जिम्मेदार होते हैं।
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विवेचना में दरोगा ने दिखाई तेजी
सीमा सिकरवार के मामले में पुलिस ने जितनी तेजी दिखाई, उतनी धोखाधड़ी और मारपीट के मामले में अमूमन पुलिस नहीं दिखाती है। पूरे खेल के पीछे करोड़ों की दुकानों पर कब्जे का मामला है। पीड़ित सीमा सिकरवार की ओर से दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। विपक्षी की तरफ से 2 जून को दर्ज हुई प्राथमिकी में दरोगा सुरजीत सिंह एक दिन बाद ही 3 जून को नक्शा बनाने पहुंच गए। इस पर पीड़ित ने कई गंभीर आरोप पुलिस पर लगाए हैं। सीमा सिकरवार ने बताया कि वर्ष 2013 में बाह निवासी ज्ञानेंद्र भदाैरिया को अपनी दुकान किराए पर दी थी। इसी के विवाद में पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शांति भंग की कार्रवाई भी हुई। सुरजीत सिंह मामले की विवेचना कर रहे थे। अब पूरे प्रकरण में पुलिस की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
पुलिस पर आरोप, कार्रवाई कुछ नहीं
पुलिस पर पिटाई के आरोप पूर्व में भी लग चुके हैं। मगर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता है। सिर्फ खानापूर्ति ही की जाती है। किरावली थाना में हत्या के मामले में किसान से पूछताछ के दाैरान मारपीट की गई थी। दोनों पैर तोड़ दिए थे। इस मामले में थानाध्यक्ष सहित तीन पर निलंबन करने की कार्रवाई की गई। मगर प्राथमिकी नहीं लिखी गई। बाद में जीवनी मंडी चाैकी में एक दूध विक्रेता को पीटा गया। इस बार शासन में मामला पहुंचने पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। मगर पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। चाैकी से हटाने तक ही मामला सिमट गया। अब फिर से पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। उन्हें थाने से नहीं हटाया गया है।
चाैकी से हटाकर थाने में कराई आमद
एसआई नीलेश शर्मा फैक्टरी एरिया चाैकी पर तैनात थे। पिछले दिनों उन्हें चाैकी से हटाया गया। मगर थाने में ही आमद करा ली। उन्हें थाने से कहीं और नहीं भेजा गया। उन्हें क्यों हटाया, इस पर सवाल ही बना हुआ है।
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किरावली मोड़, रुनकता निवासी सीमा सिकरवार को थाना शाहगंज में दर्ज मारपीट, गालीगलाैज, धमकी सहित अन्य के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने पर 4 जून को गिरफ्तार किया गया था। 5 जून को पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। सीमा सिकरवार ने पुलिस पर पिटाई के आरोप लगाए थे। कहा था कि पुलिस ने बेल्ट से पीटा। कोर्ट के आदेश पर बोर्ड से मेडिकल कराया गया, इसमें तीन जगह चोट की पुष्टि हुई। इस पर कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज दर्ज करने के आदेश किए।
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इस आदेश के खिलाफ पुलिस ने सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल किया। बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया। इस पर देर रात प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें दरोगा सुरजीत सिंह, नीलेश शर्मा, नेहा और आरक्षी नेहा को नामजद किया गया। सीमा सिकरवार ने इन्हीं पर पिटाई के आरोप लगाए थे। आरोपी पुलिसकर्मियों की तैनाती अभी थाने में ही है। पीड़ित सिकरवार का कहना है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से ही न्याय नहीं मिलेगा। दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन पर विभागीय कार्रवाई भी हो। पीड़ित का कहना है कि महिला से मारपीट के लिए इंस्पेक्टर भी जिम्मेदार हैं। थाने में पुलिसकर्मी के कार्य के लिए इंस्पेक्टर ही जिम्मेदार होते हैं।
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विवेचना में दरोगा ने दिखाई तेजी
सीमा सिकरवार के मामले में पुलिस ने जितनी तेजी दिखाई, उतनी धोखाधड़ी और मारपीट के मामले में अमूमन पुलिस नहीं दिखाती है। पूरे खेल के पीछे करोड़ों की दुकानों पर कब्जे का मामला है। पीड़ित सीमा सिकरवार की ओर से दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। विपक्षी की तरफ से 2 जून को दर्ज हुई प्राथमिकी में दरोगा सुरजीत सिंह एक दिन बाद ही 3 जून को नक्शा बनाने पहुंच गए। इस पर पीड़ित ने कई गंभीर आरोप पुलिस पर लगाए हैं। सीमा सिकरवार ने बताया कि वर्ष 2013 में बाह निवासी ज्ञानेंद्र भदाैरिया को अपनी दुकान किराए पर दी थी। इसी के विवाद में पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शांति भंग की कार्रवाई भी हुई। सुरजीत सिंह मामले की विवेचना कर रहे थे। अब पूरे प्रकरण में पुलिस की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
पुलिस पर आरोप, कार्रवाई कुछ नहीं
पुलिस पर पिटाई के आरोप पूर्व में भी लग चुके हैं। मगर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता है। सिर्फ खानापूर्ति ही की जाती है। किरावली थाना में हत्या के मामले में किसान से पूछताछ के दाैरान मारपीट की गई थी। दोनों पैर तोड़ दिए थे। इस मामले में थानाध्यक्ष सहित तीन पर निलंबन करने की कार्रवाई की गई। मगर प्राथमिकी नहीं लिखी गई। बाद में जीवनी मंडी चाैकी में एक दूध विक्रेता को पीटा गया। इस बार शासन में मामला पहुंचने पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। मगर पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। चाैकी से हटाने तक ही मामला सिमट गया। अब फिर से पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। उन्हें थाने से नहीं हटाया गया है।
चाैकी से हटाकर थाने में कराई आमद
एसआई नीलेश शर्मा फैक्टरी एरिया चाैकी पर तैनात थे। पिछले दिनों उन्हें चाैकी से हटाया गया। मगर थाने में ही आमद करा ली। उन्हें थाने से कहीं और नहीं भेजा गया। उन्हें क्यों हटाया, इस पर सवाल ही बना हुआ है।