{"_id":"59bffa074f1c1b26688b54b0","slug":"family-in-agra-fighting-for-their-rights","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"43 साल से भारत-पाकिस्तान के कड़वे रिश्तों का दंश झेल रहा आगरा का ये परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
43 साल से भारत-पाकिस्तान के कड़वे रिश्तों का दंश झेल रहा आगरा का ये परिवार
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 19 Sep 2017 10:26 AM IST
विज्ञापन
अमीरउद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और पाकिस्तान के बीच चली आ रही रिश्तों की कड़वाहट का दंश आगरा का एक परिवार 43 साल से झेल रहा है। गृह मंत्रालय उनके पाकिस्तानी होने का सुबूत जुटा रहा है तो वहीं ये लोग खुद की संपत्ति बचाने में जुटे हैं। जांच दर जांच चल रही हैं लेकिन अब भी तक इस बारे में निर्णय नहीं हो सका है।
बताया गया है कि आगरा के हकीमान गली गुदड़ी मंसूर खां में जफरउद्दीन और नूरूद्दीन अहमद 43 साल से अपनी संपत्ति को शत्रु संपत्ति नहीं है, यह साबित करने में जुटे हुए हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय का कहना है कि उक्त दोनों भाइयों का परिवार पाकिस्तान में है। इसलिए इनकी संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित की जानी चाहिए।
इसके लिए जिलाधिकारी के माध्यम से इनके बारे में एलआईयू रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि जफरउद्दीन लंदन और नूरूद्दीन अमेरिका में परिवार सहित रह रहे हैं। इनके भतीजे अमीरउद्दीन संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय को जवाब देते-देते परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बताया गया है कि आगरा के हकीमान गली गुदड़ी मंसूर खां में जफरउद्दीन और नूरूद्दीन अहमद 43 साल से अपनी संपत्ति को शत्रु संपत्ति नहीं है, यह साबित करने में जुटे हुए हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय का कहना है कि उक्त दोनों भाइयों का परिवार पाकिस्तान में है। इसलिए इनकी संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित की जानी चाहिए।
विज्ञापन
इसके लिए जिलाधिकारी के माध्यम से इनके बारे में एलआईयू रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि जफरउद्दीन लंदन और नूरूद्दीन अमेरिका में परिवार सहित रह रहे हैं। इनके भतीजे अमीरउद्दीन संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय को जवाब देते-देते परेशान हैं।
विज्ञापन
पढ़िए पूरा मामला
घर
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि हिंदुस्तान-पाक का य मामला आगरा की गली हकीमान के मकान नंबर 32/63 का है। हाल ही में लखनऊ स्थित शुत्र संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से जिलाधिकारी के यहां एक पत्र आया है। कार्यालय का कहना है कि उक्त मकान निवासी जफरउद्दीन अहमद, नूरूद्दीन अहमद कुरैशी, मुमताज पत्नी हकीम पीर, इरफान अहमद शाह, खुर्शीद फातिमा पत्नी शहीद अहमद अली पुत्र एवं पुत्रियां शेख फरीदउद्दीन पाकिस्तान जा चुके हैं।
इन सभी की एलआईयू जांच कराकर मांगी है, ताकि 32/63 संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया जा सके। इस संबंध में पूर्व में भी कई नोटिस भेजे जा चुके हैं, जबकि जफरउद्दीन पाकिस्तान नहीं ब्रिटिश के नागरिक हैं। उन्होंने 1974 में ही वहां की नागरिकता ली थी।
उनके भतीजे अमीरउद्दीन वर्ष 2015 में इसका प्रमाण भी अभिरक्षक कार्यालय को उपलब्ध करा चुके हैं। वर्तमान में इस मकान पर उन्हीं का कब्जा है। उनका कहना है कि उनके चाचा जफरउद्दीन के जाने के बाद से ही उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने की कवायद चल रही है।
इन सभी की एलआईयू जांच कराकर मांगी है, ताकि 32/63 संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया जा सके। इस संबंध में पूर्व में भी कई नोटिस भेजे जा चुके हैं, जबकि जफरउद्दीन पाकिस्तान नहीं ब्रिटिश के नागरिक हैं। उन्होंने 1974 में ही वहां की नागरिकता ली थी।
उनके भतीजे अमीरउद्दीन वर्ष 2015 में इसका प्रमाण भी अभिरक्षक कार्यालय को उपलब्ध करा चुके हैं। वर्तमान में इस मकान पर उन्हीं का कब्जा है। उनका कहना है कि उनके चाचा जफरउद्दीन के जाने के बाद से ही उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित करने की कवायद चल रही है।
यह हमारी पैतृक संपत्ति
अमीरउद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
अमीरउद्दीन का कहना है कि यह उनकी दादा की पैतृक संपत्ति है। वह लगातार इस मकान में ही रहे हैं। जफरउद्दीन भी इस बारे में लिखकर दे चुके हैं। स्थायी निस्तारण के लिए वर्ष 2010 में अमीरउद्दीन कोर्ट भी गए। जहां से उनके पक्ष में ही फैसला हुआ। इसके बावजूद हर एक-दो साल में शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से उनके पास नोटिस आ जाता है।
शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से आये नोटिस के बाद स्थानीय स्तर पर हुई जांच के दौरान साक्ष्य उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सीधे कार्यालय को भी सभी साक्ष्य भेजे जा चुके हैं। कोर्ट के फैसले से भी अवगत करा दिया है। इसके बाद भी नोटिस पीछा नहीं छोड़ रहे।
शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से आये नोटिस के बाद स्थानीय स्तर पर हुई जांच के दौरान साक्ष्य उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सीधे कार्यालय को भी सभी साक्ष्य भेजे जा चुके हैं। कोर्ट के फैसले से भी अवगत करा दिया है। इसके बाद भी नोटिस पीछा नहीं छोड़ रहे।