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कागजों में बेदखल, मौके पर 44 सालों से कब्जा
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आगरा। राजस्व भूमि पर अवैध कब्जा हुआ। तहसीलदार कोर्ट में मुकदमा चला। अवैध कब्जा साबित होने पर तहसीलदार ने कब्जेदारों के विरुद्ध बेदखली के आदेश पारित किए। उनसे जुर्माना भी वसूला गया। अंधेरगर्दी देखिए कि कागजों में बेदखल होने के 44 साल बाद भी मौके पर अवैध कब्जा नहीं हटा। कब्जेदारों की मौत के बाद अब उनके वारिसों का सरकारी भूमि पर कब्जा कायम है। इस मामले में डीएम प्रभु एन सिंह ने एसडीएम से रिपोर्ट मांगी है।
सदर तहसील के मौजा पथौली में यह सब हुआ है। क्षेत्रीय लेखपाल पर कब्जा करने वालों से सांठगांठ के आरोप लगाते हुए मंगलवार को क्षेत्रीय निवासी प्रेम सिंह ने जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह से शिकायत की। प्रेम सिंह ने बताया कि ग्राम सभा गाटा संख्या 296 पर सन 1977 में नेम सिंह, देवी सिंह, राधेश्याम व नाहर सिंह ने अवैध कब्जा किया। जिसके विरुद्ध धारा 122बी/115 सी में मुकदमा चला। 28 नवंबर 1978 को तत्कालीन तहसीलदार डीके तोमर ने चारों कब्जेदारों को जमीन से बेदखल व जुर्माना करने के आदेश दिए।
कागजों में बेदखली व जुर्माना वसूली हो गई, लेकिन धरातल पर हकीकत नहीं बदली। 44 साल पहले जिन कब्जेदारों को कागजों में बेदखल किया गया उनकी मृत्यु के बाद उनकी संतानों का वहां कब्जा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले 20 साल में 100 से अधिक प्रार्थनापत्र दे चुका हूं, लेकिन तहसील स्तर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्रशासनिक संवेदनहीनता व राजस्वकर्मियों की लापरवाही के विरुद्ध प्रेम सिंह ने हाईकोर्ट में मुकदमा किया। 14 सितंबर 2021 को हाईकोर्ट प्रयागराज ने इस मामले में एसडीएम को एक महीने में अवैध कब्जा हटाने के आदेश दिए। तीन महीने बाद भी आदेश पर अमल नहीं होने पर मंगलवार को पीड़ित ने डीएम को कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
हाईकोर्ट का ऑर्डर देखा है। अवैध कब्जा हटेगा। शिकायत दर्ज कर ली गई है। एसडीएम से रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
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सदर तहसील के मौजा पथौली में यह सब हुआ है। क्षेत्रीय लेखपाल पर कब्जा करने वालों से सांठगांठ के आरोप लगाते हुए मंगलवार को क्षेत्रीय निवासी प्रेम सिंह ने जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह से शिकायत की। प्रेम सिंह ने बताया कि ग्राम सभा गाटा संख्या 296 पर सन 1977 में नेम सिंह, देवी सिंह, राधेश्याम व नाहर सिंह ने अवैध कब्जा किया। जिसके विरुद्ध धारा 122बी/115 सी में मुकदमा चला। 28 नवंबर 1978 को तत्कालीन तहसीलदार डीके तोमर ने चारों कब्जेदारों को जमीन से बेदखल व जुर्माना करने के आदेश दिए।
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कागजों में बेदखली व जुर्माना वसूली हो गई, लेकिन धरातल पर हकीकत नहीं बदली। 44 साल पहले जिन कब्जेदारों को कागजों में बेदखल किया गया उनकी मृत्यु के बाद उनकी संतानों का वहां कब्जा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले 20 साल में 100 से अधिक प्रार्थनापत्र दे चुका हूं, लेकिन तहसील स्तर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्रशासनिक संवेदनहीनता व राजस्वकर्मियों की लापरवाही के विरुद्ध प्रेम सिंह ने हाईकोर्ट में मुकदमा किया। 14 सितंबर 2021 को हाईकोर्ट प्रयागराज ने इस मामले में एसडीएम को एक महीने में अवैध कब्जा हटाने के आदेश दिए। तीन महीने बाद भी आदेश पर अमल नहीं होने पर मंगलवार को पीड़ित ने डीएम को कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
हाईकोर्ट का ऑर्डर देखा है। अवैध कब्जा हटेगा। शिकायत दर्ज कर ली गई है। एसडीएम से रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी