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25-26 की रात 41 गांवों पर कहर बन कर टूट पड़े थे अंग्रेज अफसर

Wed, 25 Aug 2021 02:05 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 02:05 AM IST
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englishmen destroyed houses in 41 villages
आगरा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगस्त क्रांति के अगुआ बने ताजनगरी के 41 गांवों पर अंग्रेजों ने जमकर कहर बरपाया था। क्रांतिकारियों की मदद करने वाले लोगों के मकान तोड़ दिए थे। महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार किए थे। पक्के मकानों पर दनादन गोलियां बरसाई गईं। पंचायत घरों को आग लगा दी गई। अंग्रेजों की इस कार्रवाई के बाद जिले से ऐसी ज्वाला उठी कि क्रांतिकारियों ने चमरौली स्टेशन खाक में मिला दिया गया। कई लोग शहीद भी हुए।
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ताजनगरी व आसपास के इलाके में भारत छोड़ो आंदोलन की आग भड़क चुकी थी। नौ अगस्त, 1942 से शुरू हुआ आंदोलन लगातार ही आगे बढ़ता जा रहा था। अंग्रेजों ने जिले के तमाम क्रांतिकारियों को जेल भेज दिया था। युवाओं की टोली जहां खड़ी देखते, उन्हें गाड़ियों में भरकर जंगल में छोड़ आते थे। यह सिलसिला लगातार जारी था। इसी बीच अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों की मदद करने वाले जिले के 41 गांवों को चिन्हित कर लिया। इस गांवों पर 25-26 अगस्त की रात को धावा बोला और घरों में जो मिला, उसे पीटा गया।
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हालांकि अंग्रेजों की इस संभावित कार्रवाई की जानकारी क्रांतिकारियों को मिल गई थी, वे अंडरग्राउंड हो गए थे। उनके घरों पर मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को पुलिस ने नहीं बख्शा। इतिहास के पन्नों में इस तरह की कई काली रातें दर्ज हैं, जब अंग्रेजों की गाड़ियों के तेज आवाज वाले हॉर्न का शोर ग्रामीण इलाकों में गूंज उठता था। तमाम लोगों ने अपने घर तक खाली कर दिए थे। परिवारों को लेकर पलायन तक कर गए थे।
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कई दिनों तक चला अत्याचार
अंग्रेजों ने गांव वालों पर न केवल हजारों रुपये का जुर्माना लगाया था बल्कि उनके घरों में भी तोड़फोड़ की। कच्चे मकानों को ढहा दिया। कई दिनों तक यह अत्याचार चलता रहा।

-प्रो. सुगम आनंद, इतिहासकार
इन गावों में फैलाई थी दहशत
अंग्रेज शासनकाल में फिरोजाबाद भी आगरा का ही हिस्सा था। मुख्य रूप से उस समय एत्मादपुर तहसील के तहत आने वाले गांव बरहन, आंवलखेड़ा, रूपधनुं, चोकरा, बैनई, हसनपुर, ऊंचा, पेसई, बांधनुं, नया बांस, सेकरा, गोवर्धन, सराय जयराम, नगला बेल, गुमानी बांस, नगला पचौरी, नगला धकेल अंग्रेजों के निशाने पर रहे। फिरोजाबाद के गुंधन, रुपासपुर, कुर्रीकप्पा, हैमलेट, बासदेव पुर, बाह के बटेश्वर, पारना, आगरा के मिढ़ाकुर, भांड़ई, बाद, रोहता, पछगांव, फतेहाबाद का शमसाबाद, किरावली के अभैदोंपुरा, पुरामना, रुनकता, रायभा, बाहार, दौरठा और खेरागढ़ के जौनई, मुरखा, सिंकदरपुर, कागारौल में अंग्रेजों ने अत्याचार किया।
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