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खाने को दूषित भोजन, पीने को गंदा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Sep 2016 01:34 AM IST
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केंद्रीय हिंदी संस्थान पर छात्रों का धरना
- फोटो : अमर उजाला
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कथित बीफ प्रकरण, ओडिशा के छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के बाद अब केंद्रीय हिंदी संस्थान की शाख पर एक और बट्टा लगा। इस बार त्रिनिदाद एंड टोबेगो की छात्रा ने अपने देश में संस्थान में खाने-पीने से लेकर हास्टल में अव्यवस्थाओं की पोल खोली। उसकी यह समस्या वहां के त्रिनिदाद एक्सप्रेस न्यूजपेपर ने प्रमुखता से छापी हैं। छात्रा बीच में ही पढ़ाई छोड़कर अपने देश रवाना हो गई है। इस मामले को भारत सरकार ने गंभीरता से लेते हुए संस्थान को नोटिस भेजा है।
दरअसल, त्रिनिदाद की रेणुका बल्देव (25) ने 12 बिंदुओं पर अपने पिता प्रेमचंद बल्देव को पत्र लिखा। जिसने उसने किचन में चूहे-कुत्तों के घूमने की बात कही। कहा, विरोध करते तो कहा जाता, यहां सामान्य बात है। ऐसे माहौल में बने भोजन को खाने के लिए विवश किया जाता। नलों से आने वाला दूषित पानी पीने के लिए दिया जाता। हास्टल में गंदगी की भरमार है। इससे बीमार होने पर एंबुलेंस तक नहीं बुलाई। एसी तक नहीं है, सिर्फ पंखा ही लगा है।
र पांच मिनट बाद वाई-फाई सेवा ठप हो जाती। आए दिन बिजली खराब होने पर गर्मी में रहना पड़ता। यहां तक कि संस्थान छोड़ने पर उसे दिल्ली एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचाया गया, ऐसे में अकेली टैक्सी में जाना पड़ा। जबकि दिल्ली में रेप की घटनाएं देख वह डरी-सहमी हुई थी। पत्र मिलने पर प्रेमचंद्र ने अपने त्रिनिदाद एबेंसी और विदेश मंत्रालय भारत सरकार से शिकायत कर बेटी को घर लाने की गुजारिश की। छात्रा बीते शुक्रवार को संस्थान छोड़ चुकी है।
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दुकानदार ने की मदद
छात्रा ने यहीं के एक दुकानदार की तारीफ भी की है। कहा कि किसी भी समस्या पर दुकानदार ने आगे बढ़कर मदद की। उसका आभार भी जताया।
बिना जांच के दी दवाएं
दूषित पानी और भोजन से उल्टी-दस्त हुए। ब्लीडिंग भी होने लगी। डाक्टर आया, जिसने किसी भी तरह की जांच नहीं कराई। सिर्फ एक टैबलेट देकर सावधानी बरतने को कहा।
छात्रा अपने देश जा चुकी है। समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है। प्रत्येक छात्रा को पांच लीटर शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रो. एनके पांडे निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान
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दरअसल, त्रिनिदाद की रेणुका बल्देव (25) ने 12 बिंदुओं पर अपने पिता प्रेमचंद बल्देव को पत्र लिखा। जिसने उसने किचन में चूहे-कुत्तों के घूमने की बात कही। कहा, विरोध करते तो कहा जाता, यहां सामान्य बात है। ऐसे माहौल में बने भोजन को खाने के लिए विवश किया जाता। नलों से आने वाला दूषित पानी पीने के लिए दिया जाता। हास्टल में गंदगी की भरमार है। इससे बीमार होने पर एंबुलेंस तक नहीं बुलाई। एसी तक नहीं है, सिर्फ पंखा ही लगा है।
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र पांच मिनट बाद वाई-फाई सेवा ठप हो जाती। आए दिन बिजली खराब होने पर गर्मी में रहना पड़ता। यहां तक कि संस्थान छोड़ने पर उसे दिल्ली एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचाया गया, ऐसे में अकेली टैक्सी में जाना पड़ा। जबकि दिल्ली में रेप की घटनाएं देख वह डरी-सहमी हुई थी। पत्र मिलने पर प्रेमचंद्र ने अपने त्रिनिदाद एबेंसी और विदेश मंत्रालय भारत सरकार से शिकायत कर बेटी को घर लाने की गुजारिश की। छात्रा बीते शुक्रवार को संस्थान छोड़ चुकी है।
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दुकानदार ने की मदद
छात्रा ने यहीं के एक दुकानदार की तारीफ भी की है। कहा कि किसी भी समस्या पर दुकानदार ने आगे बढ़कर मदद की। उसका आभार भी जताया।
बिना जांच के दी दवाएं
दूषित पानी और भोजन से उल्टी-दस्त हुए। ब्लीडिंग भी होने लगी। डाक्टर आया, जिसने किसी भी तरह की जांच नहीं कराई। सिर्फ एक टैबलेट देकर सावधानी बरतने को कहा।
छात्रा अपने देश जा चुकी है। समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है। प्रत्येक छात्रा को पांच लीटर शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रो. एनके पांडे निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान