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Dussehra 2023: विजयादशमी पर धर्मनगरी मथुरा में रावण की महाआरती, लंकेश के भक्तों ने किया पुतला दहन का विरोध

Tue, 24 Oct 2023 03:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 24 Oct 2023 03:26 PM IST
सार

विजयादशमी (दशहरा) पर  जहां शहर और कस्बो में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक में रावण के पुतले का दहन किया जाता है, तो वहीं मथुरा में दशानन की पूजा करने वाले भी हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के अनुसार लंकेश भक्त मंडल ने यमुना किनारे स्थित शिव मंदिर पर भगवान शिव की स्तुति कर रावण की महाआरती की। साथ ही पुतला दहन का विरोध किया।
 

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Dussehra 2013 People Worship Ravana In Mathura on vijaydashmi
रावण के स्वरूप की पूजा करते सारस्वत समाज के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में लंकेश भक्त मंडल ने मंगलवार को यमुना किनार स्थित मंदिर में पहले भगवान शिव की आराधना की। इसके बाद रावण की महाआरती की। कई घंटे तक चले पूजन एवं हवन कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
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भगवान शिव के परम भक्त  शिव तांडव स्तोत्र के रचियता दशानन की यमुनापार स्थित शिव मंदिर पर महाआरती की गई। रावण के स्वरूप के द्वारा भगवान भोलेनाथ की उपासना की गई। शिव भक्तों के द्वारा रावण के पुतला दहन का विरोध किया गया। सारस्वत ब्राह्मणों के अलावा अन्य शिव भक्तों ने भी रावण की महाआरती की। रावण के स्वरूप के द्वारा सनातन विधि से शिव लिंग पर जलाभिषेक किया।
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लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने इस मौके पर कहा कि रावण प्रकांड विद्वान महापंडित थे। भगवान श्र राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने हेतु रावण से भगवान भोलेनाथ की पूजा कराई थी। रावण सीताजी को अशोक वाटिका से अपने साथ लेकर आए थे। भगवान श्रीराम ने जब उन्हें अपना आचार्य बनाया था, तो अब हमारे समाज के कुछ लोग उनका पुतला दहन करके क्यों अपमान कर रहे है। 
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हिंदू संस्कृति में एक व्यक्ति का एक बार ही अन्तिम संस्कार किया जाता हैं। महाज्ञानी रावण का पुतला दहन बंद होना चाहिए। जिस तरह सती प्रथा बंद हुई है, उसी तरह रावण का पुतला दहन भी बंद होना चाहिए। रावण का पुतला दहन एक तरह से ब्राह्मणों के साथ-साथ विद्वता का भी अपमान है।


इस अवसर पर संजय सारस्वत, देवेंद्र वर्मा, हरिश्चंद सारस्वत, ब्रजेश सारस्वत, सुनील सारस्वत, एस के सारस्वत, यमुना प्रसाद यादव, चंद्रमोहन सारस्वत देवेंद्र सारस्वत किशन सारस्वत, अनिल सारस्वत, अजय सारस्वत कृष्ण गोपाल सारस्वत मुकेश सारस्वत आदि दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
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