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नशे की दवाओं के तस्कर, जानिये कौन है आगरा गैंग का सरगना विक्की अरोड़ा जिसे पंजाब पुलिस ने किया गिरफ्तार

Wed, 29 Jul 2020 12:10 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 29 Jul 2020 12:10 AM IST
सार

  • एसएसपी ने कहा - दोनों को ड्रग माफिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है
  • पंजाब पुलिस आगरा गैंग के सरगना विक्की अरोड़ा को लेकर आई आगरा

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Drug Traffickers Vikki Arora In Panjab Police Custudy Investigation In Agra
गिरफ्तार किए गए दवा कारोबारी जितेंद्र उर्फ विक्की अरोड़ा और कपिल अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नशे की दवाइयों की तस्करी में पंजाब में गिरफ्तार आगरा के कमला नगर के दोनों भाई जितेंद्र उर्फ विक्की और कपिल अरोड़ा की संपत्ति को जब्त किया जाएगा। पुलिस संपत्ति का ब्योरा तैयार कर रही है। दोनों को ड्रग माफिया घोषित करने के लिए भी फाइल शुरू कर दी गई है।
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यह जानकारी देते हुए एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि दोनों के बारे में पंजाब पुलिस से भी ब्योरा लिया गया है। दोनों लंबे समय से नशे की दवाइयों की तस्करी कर रहे हैं। ऐसी जानकारी मिली है कि उन्होंने करोड़ों रुपये तस्करी से कमाए हैं। इनकी संपत्ति खरीदी है।
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पुलिस ने सभी माफियाओं की संपत्ति को जब्त कराने का अभियान चला रखा है। इनकी रिपोर्ट बनाकर डीएम को भेजी जा रही है। इसी सूची में इन दोनों का नाम शामिल किया जाएगा।

Drug Traffickers Vikki Arora In Panjab Police Custudy Investigation In Agra
जानकारी देते एसएसपी बबलू कुमार - फोटो : अमर उजाला
कवायद : तस्कर को लेकर आई पंजाब पुलिस, खंगाले रिकॉर्ड
नशे की दवाइयों की तस्करी कर रहे आगरा गैंग के सरगना जितेंद्र उर्फ विक्की अरोड़ा को लेकर पंजाब पुलिस मंगलवार शाम को करीब पांच बजे आगरा आई। उससे पूछताछ की दवाइयों से संबंधित कागजात और अन्य रिकॉर्ड खंगाले।

पंजाब के बरनाला में वह एक बार पुलिस को चकमा देकर भाग गया था। इसके नौ दिन बाद पुलिस ने उसे पकड़ा। अब रिमांड पर लिया है। फरार रहने के नौ दिनों में उसने आगरा आकर तस्करी से संबंधित कई रिकॉर्ड नष्ट कर दिए। पंजाब पुलिस को उसके लैपटॉप में डाटा डिलीट मिला।

पुलिस मंगलवार को उसे लेकर उसके गोदाम में पहुंची। यहां भी कागजात नहीं मिले। गोदाम की बाहर ही बड़ी मात्रा में कागज जले हुए थे। माना जा रहा है कि उसने दवाइयों की बिक्री और पंजाब में सप्लाई का रिकॉर्ड जला दिया है। दस दिन पहले पंजाब के बरनाला में पुलिस ने आगरा गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। विक्की अरोड़ा को भी वहां बुलाया था। वह साथी सौरभ वर्मा और गौरव गर्ग के साथ भाग निकला था। 

डर : टैक्सी लेकर भागा था शातिर 
विक्की के भाग जाने पर बरनाला पुलिस ने चेकिंग की लेकिन वह हाथ नहीं आया। अब पूछताछ में उसने बताया कि वह और उसके साथी पंजाब नंबर की टैक्सी किराए पर लेकर निकल आए। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि पंजाब पुलिस को पूरा सहयोग किया जा रहा है। आगरा पुलिस भी ड्रग माफिया के बारे में अपने स्तर से पड़ताल कर रही है।

कार्रवाई : दस साल से बंद 300 से अधिक दवा फर्मोें की जांच शुरू
फर्जी फर्मों से दवाओं के काले कारोबार का खुलासा होने के बाद अब ड्रग विभाग की नींद टूटी है। दस साल से बंद पड़ी दवा फर्मों की जांच शुरू की जा रही है। इनके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ऐसी करीब 300 से अधिक फर्म हैं, जो बीते दस सालों से बंद हैं।

नकली और नशे की दवाओं के लिए फर्जी फर्म के सहारे बिलिंग की जा रही है। अभी तक चार ऐसी फर्म पकड़ी गईं। इनके लाइसेंस निरस्त करने के बाद अब पिछले दस सालों मेें ऐसी फर्म के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जो बंद हैं। दवा विक्रेताओं ने बताया कि हर साल 30 से 50 नई फर्म खुलती हैं। इसमें से 20 से 30 फर्म साल-दो साल में बंद हो जाती। ऐसी करीब दस साल में 300 फर्म बंद पड़ी हैं।

आगरा फार्मा एसोसिएशन के पुनीत कालरा ने बताया कि नशे की और नशीली दवाओं के लिए फर्जी फर्म और बिल बनाकर सप्लाई की जाती है। ऐसी फर्म की जांच से इस रैकेट पर रोक लग सकती है। ड्रग इंस्पेक्टर राजकुमार शर्मा ने बताया कि फर्जी कंपनियां सामने आने के बाद बंद पड़ी फर्म की जांच की जा रही हैं।

फर्जीवाड़ा : नकली बिल बनाकर करते सप्लाई
नशे की दवाओं के लिए लोग पांच से अधिक फर्म के नाम से फर्जी बिल बनाकर सप्लाई कर रहे हैं। इसमें डॉक्टरों के नाम तक फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं। आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा ने बताया कि दवा माफिया एकमुश्त नशे की दवाएं खरीदकर इनको अलग-अलग फर्म के नाम से बिल बनाते हैं, जिससे भारी मात्रा में स्टॉक आसानी से दूसरे राज्यों तक सप्लाई किया जाता है।

कारस्तानी : छोटे व्यापारियों की फर्म का करते हैं इस्तेमाल
दवा माफिया ऐसे दवा विक्रेताओं को चंगुल में फांसते हैं, जिनका दवा का कारोबार कम चलता है। उनकी फर्म के जरिये बिलिंग कराते हुए उन्हें 20 फीसदी तक का मुनाफा देते हैं। उन्हें के नाम पर दूसरी फर्म बनवाने को भी प्रेरित करते हैं। मुनाफा अधिक होने पर वह नई फर्म भी बना लेते, इन फर्म के जरिये दवा माफिया नशे की दवाओं की दूसरे राज्यों तक करते हैं।

जांच : जीएसटी विभाग से भी मांगी जाएगी जानकारी
आगरा। दवाओं के कारोबार के लिए बिलिंग की जानकारी के लिए जीएसटी विभाग से भी जानकारी मांगी जाएगी। इससे पता चल सकेगा कि किस फर्म के जरिये कितना कारोबार हो रहा है और किस दवा की बिलिंग हो रही है। एक ही शहर में बार-बार विशेष दवा की सप्लाई की जानकारी आसान हो जाएगी।
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