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‘राष्ट्रीय आपदा घोषित हो सूखा, यूपी इसका केंद्र’

Wed, 14 Oct 2015 01:48 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Wed, 14 Oct 2015 01:48 AM IST
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Drought declared national disaster
देश के सूखा पीड़ित किसानों के दर्द के प्रति संवेदना जगाने को स्वराज अभियान के संयोजक प्रो. योगेंद्र यादव दो अक्तूबर से संवेदना यात्रा लेकर निकले हैं। सूबे में बांदा से प्रवेश कर हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, उन्नाव, रायबरेली कानपुर, इटावा होते हुए यह यात्रा मंगलवार को आगरा आई, जहां प्रो. यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सूखे से निपटने के लिए पत्र लिखकर अपने सुझाव जारी किए। उनकी संवेदना यात्रा 15 अक्तूबर को हरियाणा में समाप्त होगी।
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उन्होंने कहा कि देश में सूखे से सबसे खराब हालात उत्तर प्रदेश के हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के साथ देशभर में सूखा राष्ट्रीय आपदा बन चुका है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें गंभीरता नहीं दिखा रहीं। यूपी इस आपदा का केंद्र है। यहां रबी की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। बारिश न होने से यह फसल भी गई और अब कर्जे में डूबे किसान पर गेहूं, आलू की फसल बोने के लिए रकम नहीं है। यह भयावह हालात हैं। राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप को छोड़कर सभी दलों और सरकारों को इस आपदा से निपटना होगा। वह हर राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का प्रयास करेंगे, ताकि वह सूखे की आपदा पर कदम उठा सकें। सभी एनजीओ, सोशल एक्टिविस्ट को इस समय सूखे के हालातों पर एक मंच पर आना चाहिए। यात्रा के आगरा आगमन के दौरान सुशील गुप्ता, अनिल गर्ग, आमोद सिंह, प्रत्युष, अविक शाह, शारदा, अर्चना, मनीष, परवेज, उत्कर्ष, विमल गुप्ता, सौरभ त्यागी और ब्रह्मजीत मौजूद रहे।
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ये दिए हैं सुझाव
- प्रदेश में सूखे की घोषणा तुरंत की जाए, जिससे कर्नाटक, एमपी की तरह राहत कार्य शुरू हों
- ओलावृष्टि से फसल नुकसान के मुआवजे का एलान और बकाया राशि का भुगतान किया जाए
- सिंचित क्षेत्र के लिए 20 हजार और असिंचित क्षेत्र में 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा हो
- कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के पुराने कर्जों को माफ किया जाए, नए कर्ज की किश्तें स्थगित हों
- सूखाग्रस्त जिले में मनरेगा के तहत हर गांव में काम उपलब्ध हो, 15 दिन में मजदूरी का भुगतान हो
- सूखाग्रस्त क्षेत्र में सभी परिवारों को 35 की जगह 60 किलो खाद्यान्न रियायती दरों पर दिया जाए
- आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार को मुआवजा मिले, तेलंगाना मॉडल अपनाया जाए
- सूखा पीड़ित जिलों में जानवरों के लिए चारा छावनी बने, जहां एकसाथ मवेशियों को चारा-पानी मिले
- सूखाग्रस्त इलाकों में तालाब सूखने से 2 सप्ताह में नलकूप ठीक कराए जाएं, बिजली भरपूर दी जाए
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