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लोकल बनी अटल की ड्रीम रेल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:32 AM IST
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दस माह बाद भी सुरक्षा कारणों से सफर करने से कतराते हैं यात्री
- फोटो : अमर उजाला
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चंबल के दुर्गम बीहड़ों से होकर गुजरने और आगरा-भांडई रेल लाइन पर दौड़ने वाली एकमात्र डेमू पैसेंजर अब पूरी तरह लोकल बनकर रह गई है। परियोजना का मकसद बाह, पिनाहट, ऊदी मोड़ के दूरस्थ इलाकों के लोगों को सुगम यातायात का साधन मुहैया कराना था लेकिन अभी तक इस रूट पर कोई दूसरी ट्रेन शुरू नहीं हो सकी है। साथ ही सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा कारण है। यही कारण है कि आगरा कैंट से चलने वाली इस ट्रेन में इटावा तक जाने वाले यात्री चुनिंदा ही होते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 19 साल पहले रेल परियोजना की शुरुआत बीहड़ में विकास की ट्रेन चलाने के मकसद से की थी। 19 साल बाद 24 दिसंबर 2015 को आगरा-भांडई रूट पर डेमू पैसेंजर की शुरुआत हुई। ट्रेन कैंट, करौंधना, शमसाबाद, फतेहाबाद, बटेश्वर, बाह, मानसिंह का पुरा, ऊदी मोड़ होकर इटावा तक का सफर तय करती है लेकिन इस रूट पर यात्रियों को कहीं भी सुरक्षा का अहसास नहीं होता है। ट्रेन में सफर करने वाले नब्बे फीसदी यात्री लोकल होते हैं, जो हाल्ट और स्टेशनों पर उतरने से भी घबराते हैं। कई दफा घटनाएं हो चुकी हैं। यही कारण है कि कैंट से इटावा तक जाने वाले यात्रियों की संख्या गिनी चुनी होती है। इस रेल लाइन पर तीन सुपर फास्ट ट्रेनों का संचालन भी होना था।
चौकियों का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
इस रूट पर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जीआरपी के पूर्व एसपी गोपेशनाथ खन्ना ने बाह, पिनाहट, फतेहाबाद आदि पर जीआरपी चौैकियों का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय भेजा था। आरपीएफ की टीम भी यदा कदा इस रूट पर जाती है मगर स्थायी रूप से यहां सुरक्षा के लिहाज से कुछ नहीं है।
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डेमू पैसेंजर में पथराव की घटना के बाद आरपीएफ को अलर्ट किया गया है। जवान लगाए गए हैं। आगे भी इस रूट पर सुरक्षा के लिए कवायद की जा रही है।
दिलीप कुमार सिंह, अपर मंडल रेल प्रबंधक
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 19 साल पहले रेल परियोजना की शुरुआत बीहड़ में विकास की ट्रेन चलाने के मकसद से की थी। 19 साल बाद 24 दिसंबर 2015 को आगरा-भांडई रूट पर डेमू पैसेंजर की शुरुआत हुई। ट्रेन कैंट, करौंधना, शमसाबाद, फतेहाबाद, बटेश्वर, बाह, मानसिंह का पुरा, ऊदी मोड़ होकर इटावा तक का सफर तय करती है लेकिन इस रूट पर यात्रियों को कहीं भी सुरक्षा का अहसास नहीं होता है। ट्रेन में सफर करने वाले नब्बे फीसदी यात्री लोकल होते हैं, जो हाल्ट और स्टेशनों पर उतरने से भी घबराते हैं। कई दफा घटनाएं हो चुकी हैं। यही कारण है कि कैंट से इटावा तक जाने वाले यात्रियों की संख्या गिनी चुनी होती है। इस रेल लाइन पर तीन सुपर फास्ट ट्रेनों का संचालन भी होना था।
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चौकियों का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
इस रूट पर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए जीआरपी के पूर्व एसपी गोपेशनाथ खन्ना ने बाह, पिनाहट, फतेहाबाद आदि पर जीआरपी चौैकियों का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय भेजा था। आरपीएफ की टीम भी यदा कदा इस रूट पर जाती है मगर स्थायी रूप से यहां सुरक्षा के लिहाज से कुछ नहीं है।
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डेमू पैसेंजर में पथराव की घटना के बाद आरपीएफ को अलर्ट किया गया है। जवान लगाए गए हैं। आगे भी इस रूट पर सुरक्षा के लिए कवायद की जा रही है।
दिलीप कुमार सिंह, अपर मंडल रेल प्रबंधक