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TTZ: प्रदूषण मुक्त उद्योग की क्या है परिभाषा,  नए सिरे से होगा तय; नीरी की बैठक में होगा मंथन

Fri, 11 Apr 2025 09:54 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 11 Apr 2025 09:54 AM IST
सार

टीटीजेड में नए सिरे से गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा तय होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने हितधारकों संग बैठक की, जिसमें मंथन किया जाएगा। 
 

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definition of pollution free industry it will be decided afresh discussion will be held in NEERI meeting
नीरी विशेषज्ञ समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते उद्यमी व पर्यावरणविद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों को नए सिरे से परिभाषित किया जाएगा। क्या-क्या उद्योग लगेंगे और कौन से उद्योग प्रतिबंधित रहेंगे यह अब नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) विशेषज्ञ समिति परिभाषित करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को समिति ने हितधारकों के साथ मंडलायुक्त सभागार में बैठक की।
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नीरी विशेषज्ञ समिति में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. केवी जॉर्ज, डॉ. आर खेवाल, डॉ. पदमा सहित चार सदस्य और टीटीजेड प्राधिकरण अध्यक्ष मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह शामिल हुए। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, भरतपुर के औद्योगिक संगठन, प्रतिनिधि और पर्यावरणविदों ने सुझाव रखे।
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सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर रोक लगा रखी है। 28 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई है। नीरी की विशेषज्ञ समिति से सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी है। समिति के समक्ष इस मामले के याचिकाकर्ता अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि टीटीजेड में 2016 में उद्योगों का वर्गीकरण हो चुका है।
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सीपीसीबी ने सेक्टोरियल गाइडलाइन भी बनाई थी। व्हाइट, ग्रीन, ऑरेंज व रेड चार श्रेणियों में उद्योगों का वर्गीकरण किया था। लेकिन, यह तथ्य याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से छिपाई। जिस वजह से गैर प्रदूषणकारी उद्योगों को लेकर भ्रम उत्पन्न हुआ। गैर प्रदूषणकारी उद्योगों का अर्थ स्पष्ट करने के लिए आदेश देना पड़ा। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने समिति के समक्ष कहा कि व्हाइट श्रेणी में सिर्फ 36 उद्योग थे। लेकिन, प्रदूषणकारी उद्योगों की श्रेणी रेड में से 13 उद्योग, ऑरेंज में से 83 उद्योगों को अवैध ढंग से गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की व्हाइट श्रेणी में जोड़ दिया गया।

 

साथ ही, उन्होंने सूर सरोवर पक्षी विहार के पास मास्टर प्लान में किए उद्योग क्षेत्र के प्रावधान पर आपत्ति दर्ज कराई। जबकि यह क्षेत्र पूर्व में इको सेंसिटिव जोन था। पर्यावरणविद डॉ. देबाशीष भट्टाचार्य ने टीटीजेड में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की आढ़ में प्रदूषणकारी उद्योग संचालित हो रहे हैं। उन्होंने पेठा, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, जूता, चांदी की ढलाई जैसी उद्योगों को उदाहरण दिया। अवैध निर्माणों से फैल रहे वायु प्रदूषण को वर्गीकृत करने की मांग उठाई।

 

अन्य उद्योगों को किया जा रहा बर्बाद
फिरोजाबाद की माइनॉरिटी ग्लास डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष पारसा ने कहा कि 1996 में जब सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड बनाया था, तब ताजमहल को एक उद्योग माना था, क्योंकि इससे सरकार को राजस्व मिलता है। उन्होंने तर्क दिया कि क्या एक उद्योग के लिए बाकी उद्योग धंधों को बर्बाद करना उचित है। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम रोक के बावजूद प्रदूषणकारी कैमिकल उद्योग की टीटीजेड में अनुमति और गैस आपूर्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा 2016 में वर्गीकृत उद्योगों को जब किसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी, तो फिर इसके पुन: निर्धारण की क्या आवश्यकता है।


 

गैस से बन रहा पेठा, गोशाला जा रहा कचरा
शहीद भगत सिंह कुटीर पेठा एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने समिति के समक्ष पक्ष रखा। कहा कि तीन बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में सवाल उठाए थे। पहला कोयला उपयोग, जिसकी जगह अब गैस से पेठा बन रहा है। दूसरा था पेठा का कचरा, जिसे अब गोशाला में खपाया जा रहा है। तीसरा था नाली में बहता चूना, जिसे नगर निगम डालता है। उन्होंने कहा पेठा आगरा की पहचान है। इसे गैर प्रदूषणकारी उद्योग की श्रेणी में रखा जाए।

 

इन संस्थाओं ने भी दिए प्रत्यावेदन
नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स, लघु उद्योग भारती, आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक), आगरा आयरन फाउंड्री एसोसिएशन, प्लास्टिक पैकेजिंग मैन्युफैक्चरर्स एसो, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, द ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडिकेट के अलावा व्यक्तिगत रूप से रामजी लाल शर्मा, घनश्याम सिंह ने समिति के समक्ष प्रत्यावेदन दिए।
 
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