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भारतीय साहित्य का अद्भुत सितारा ‘दाराशिकोह’
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 24 Feb 2016 01:24 AM IST
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‘मुगल काल में भारतीय साहित्य में दाराशिकोह अद्भुत सितारा बनकर उभरा। अगर मुगलिया सल्तनत की बागडोर दाराशिकोह के हाथ रहती तो देश और साहित्य जगत का भविष्य कुछ और होता, लेकिन तख्तनशींनों का मिजाज बदलने से आगरा उपेक्षित नगर बनकर रह गया।’
फारसी, उर्दू और संस्कृत के विद्वान दाराशिकोह के योगदान और व्यक्तित्व पर मंगलवार को ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तहत दाराशिकोह की लाइब्रेरी में यह विचार व्यक्त किए गए। केआर डिग्री कालेज, मथुरा के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डा. जेड हसन की पुस्तक ‘दाराशिकोह ’ का विमोचन टीएलएफ चेयरममैन हरविजय बाहिया, निदेशक अशोक जैन सीए, सैयद अजमल अली शाह और डा. इख्तियार जाफरी ने किया। डा. जेड हसन ने कहा कि दारा लातिनी, सुरियानी और अरबी भाषा का भी ज्ञाता और लेखक था। फारसी में उसने शायरी की और उसका दीवान सिर्रे अकबर के नाम से प्रकाशित हुआ। उपनिषद का संस्कृत से पहली बार फारसी में उसने खुद अनुवाद किया। इसी ऐतिहासिक लाइब्रेरी में उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया गया। कार्यक्रम में एक और पुस्तक चेहरा-चेहरा का विमोचन भी किया गया। 97 साल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन भी आशीर्वाद देने लाइब्रेरी पहुंचे। इस दौरान डा. ब्रजेश चंद्रा, डा. रचना शर्मा, रूपक गुप्ता, अतुल जैन, संदेश जैन, समी अगाई, इरफान सलीम आदि मौजूद रहे।
कभी नीलाम होने से बची लाइब्रेरी
वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने कहा कि औरंगजेब शासन में लाइब्रेरी परिसर वीरान रहा। 1810 के बाद परिसर कई बार ईस्ट इंडिया कंपनी को हुए घाटे की भरपाई के लिए नीलाम होने से बचा। आगरा में हाईकोर्ट स्थापना के बाद इससे जुड़े कार्यालय के रूप में इसका उपयोग हुआ। 1903 से यहां नगर पालिका का कार्यालय संचालित हुआ।
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जलाकर नष्ट कर दी थीं किताबें
डा. सैयद इख्तियार जाफरी ने कहा कि दाराशिकोह के समय की किताबें जलकर नष्ट हो गईं। जो बचीं, वह खुदाबख्श लाइब्रेरी पानीपत तथा रजा लाइब्रेरी रामपुर में मौजूद हैं। एएमयू के डा. मुहम्मद फुरकान ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं की मीटिंग इसी लाइब्रेरी के बाहर चुंगी के मैदान में हुई। विदेशी कपड़ों की होली जलाने, नमक सत्याग्रह, अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन भी यहीं हुए।
मुगलों में सबसे काबिल, विद्वान शहजादा दारा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फारसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. कमर आलम ने कहा कि दारा शाहजहां का सबसे विद्वान शहजादा था। उत्तराधिकारी भी वही था, लेकिन गद्दी प्राप्त करने के लिए हुई राजनीति में विशुद्व साहित्यकार को मौत की नींद सुला दिया गया। अगर दारा मुगलिया सल्तनत संभालता तो देश का इतिहास कुछ और होता।
बदलेगी दाराशिकोह की लाइब्रेरी की सूरत
टीएलएफ के जरिए शहर के साहित्य, संस्कृति से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई कि दाराशिकोह लाइब्रेरी की सूरत जल्द बदलेगी। हेरिटेज टैग लगने के बाद पहली बार दाराशिकोह की लाइब्रेरी में कोई कार्यक्रम हुआ है। टीएलएफ के हरविजय बाहिया ने सभी से 26 से 28 फरवरी तक होटल क्लार्कशिराज में होने वाले ताज साहित्य उत्सव में शिरकत करने की अपील की।
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फारसी, उर्दू और संस्कृत के विद्वान दाराशिकोह के योगदान और व्यक्तित्व पर मंगलवार को ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तहत दाराशिकोह की लाइब्रेरी में यह विचार व्यक्त किए गए। केआर डिग्री कालेज, मथुरा के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डा. जेड हसन की पुस्तक ‘दाराशिकोह ’ का विमोचन टीएलएफ चेयरममैन हरविजय बाहिया, निदेशक अशोक जैन सीए, सैयद अजमल अली शाह और डा. इख्तियार जाफरी ने किया। डा. जेड हसन ने कहा कि दारा लातिनी, सुरियानी और अरबी भाषा का भी ज्ञाता और लेखक था। फारसी में उसने शायरी की और उसका दीवान सिर्रे अकबर के नाम से प्रकाशित हुआ। उपनिषद का संस्कृत से पहली बार फारसी में उसने खुद अनुवाद किया। इसी ऐतिहासिक लाइब्रेरी में उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया गया। कार्यक्रम में एक और पुस्तक चेहरा-चेहरा का विमोचन भी किया गया। 97 साल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन भी आशीर्वाद देने लाइब्रेरी पहुंचे। इस दौरान डा. ब्रजेश चंद्रा, डा. रचना शर्मा, रूपक गुप्ता, अतुल जैन, संदेश जैन, समी अगाई, इरफान सलीम आदि मौजूद रहे।
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कभी नीलाम होने से बची लाइब्रेरी
वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने कहा कि औरंगजेब शासन में लाइब्रेरी परिसर वीरान रहा। 1810 के बाद परिसर कई बार ईस्ट इंडिया कंपनी को हुए घाटे की भरपाई के लिए नीलाम होने से बचा। आगरा में हाईकोर्ट स्थापना के बाद इससे जुड़े कार्यालय के रूप में इसका उपयोग हुआ। 1903 से यहां नगर पालिका का कार्यालय संचालित हुआ।
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जलाकर नष्ट कर दी थीं किताबें
डा. सैयद इख्तियार जाफरी ने कहा कि दाराशिकोह के समय की किताबें जलकर नष्ट हो गईं। जो बचीं, वह खुदाबख्श लाइब्रेरी पानीपत तथा रजा लाइब्रेरी रामपुर में मौजूद हैं। एएमयू के डा. मुहम्मद फुरकान ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं की मीटिंग इसी लाइब्रेरी के बाहर चुंगी के मैदान में हुई। विदेशी कपड़ों की होली जलाने, नमक सत्याग्रह, अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन भी यहीं हुए।
मुगलों में सबसे काबिल, विद्वान शहजादा दारा
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फारसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. कमर आलम ने कहा कि दारा शाहजहां का सबसे विद्वान शहजादा था। उत्तराधिकारी भी वही था, लेकिन गद्दी प्राप्त करने के लिए हुई राजनीति में विशुद्व साहित्यकार को मौत की नींद सुला दिया गया। अगर दारा मुगलिया सल्तनत संभालता तो देश का इतिहास कुछ और होता।
बदलेगी दाराशिकोह की लाइब्रेरी की सूरत
टीएलएफ के जरिए शहर के साहित्य, संस्कृति से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई कि दाराशिकोह लाइब्रेरी की सूरत जल्द बदलेगी। हेरिटेज टैग लगने के बाद पहली बार दाराशिकोह की लाइब्रेरी में कोई कार्यक्रम हुआ है। टीएलएफ के हरविजय बाहिया ने सभी से 26 से 28 फरवरी तक होटल क्लार्कशिराज में होने वाले ताज साहित्य उत्सव में शिरकत करने की अपील की।