सरकारी जमीन पर कब्जा: आगरा में यमुना किनारे 183 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से फसल कर रहे दबंग
राजस्व रिकॉर्ड में 183 हेक्टेयर अकृषक भूमि दर्ज है, लेकिन दबंग इस जमीन पर कब्जा कर फसल कर रहे हैं। इस मामले में सदर तहसील और राजस्वकर्मियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
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आगरा के बाईंपुर मुस्तकिल में 183 हेक्टेयर सरकारी जमीन को दबंग जोत रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन अकृषक भूमि में दर्ज है, जबकि धरातल पर अवैध रूप से फसल की जा रही है। एक-दो नहीं बल्कि 98 खसरा नंबरों पर दबंगों का कब्जा है। इस पूरे ‘खेल’ में सदर तहसील व राजस्वकर्मियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
सरकारी भूलेख रिकॉर्ड के मुताबिक सिकंदरा स्मारक के पीछे बाईंपुर अहतमाली है। यहां यमुना की रेतीली जमीन है। फसली वर्ष 1425-1430 (सन 2019-20) में सदर तहसील के खाता विवरण में 94 खसरे हैं। जिनमें 183.7780 हेक्टेयर अकृषक भूमि है। लेकिन जमीनी हकीकत यहां जुदा है। मौके पर दबंग सरकारी जमीन को जोत रहे हैं। फसल बोई जा रही हैं। डीजल पंप सेट से यमुना से सिंचाई हो रही है।
अमर उजाला के पास उन खसरों की सूची हैं जिनमें अवैध रूप से फसल की जाती है। पूर्व उप निबंधक सचीश समाधिया ने बताया कि अगर अकृषक भूमि पर कहीं खेती हो रही है तो क्षेत्रीय लेखपाल को इसका विवरण खसरा-खतौनी में दर्ज करना पड़ता है। फसल में नुकसान या दुर्घटना होने पर काश्तकार मुआवजे का हकदार हो जाएगा, जबकि नियम के तहत यह प्रतिबंधित क्षेत्र हैं।
खसरा संख्या 32 में 120 हेक्टेयर जमीन
बाईंपुर मौजा में 94 खसरों में खेती नहीं हो सकती। खसरा संख्या 32 में सबसे ज्यादा 120.2250 हेक्टेयर अकृषक भूमि है। खसरा संख्या 07, 29, 34, 60, 47, 95 ऐसे हैं जिनका क्षेत्रफल एक हेक्टेयर से अधिक है। इन सभी खसरा नंबरों को दबंग अवैध रूप से जोत रहे हैं।
खाद के गड्ढों पर भी कब्जे
बाईंपुर गांव में श्रेणी 6/4 की भूमि है। जो अन्य कारणों से अकृषित है। यहां खसरा 547, 871 और 1564 राजस्व रिकॉर्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है, जबकि मौके पर यहां अस्थाई रूप से घेराबंदी कर पशु बांधे जा रहे हैं। गड्ढे पाट कर समतल हो चुके हैं। करीब 4090 वर्ग मीटर जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। इसी तरह खसरा नंबर 541 और 870 में मृत पशुओं की खाल निकालने के लिए स्थान आरक्षित है। यहां भी 1380 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं।
'जानकारी नहीं, कराएंगे जांच'
सदर तहसील की एसडीएम लक्ष्मी एन. ने बताया कि यह मामला मेरी जानकारी में नहीं हैं। तहसीलदार के नेतृत्व में टीम बनाकर मौका-मुआयना कराया जाएगा। जांच के बाद सरकारी जमीन से कब्जे हटाए जाएंगे। अवरोध उत्पन्न करने पर मुकदमा दर्ज कराएंगे।