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एससी-एसटी एक्ट में लिखाया झूठा मुकदमा, अब आयोग करेगा मुआवजे की वसूली
Tue, 01 Jan 2019 06:39 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 01 Jan 2019 06:39 PM IST
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आगरा के थाना बाह में दर्ज कराया गया मारपीट, छेड़छाड़ और एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा पुलिस की जांच में झूठा निकला। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग की सुनवाई में भी यह झूठा पाया गया।
इस पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में रिपोर्ट दे दी। महिला को आर्थिक सहायता के 50 हजार रुपये दिए जा चुके हैं। अब आयोग ने इस धनराशि की वसूली के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
बाह थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने पिछले दिनों मारपीट, छेड़छाड़, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी और एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया था। 12 दिसंबर को इस मामले की उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग में सुनवाई हुई।
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इस पर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में रिपोर्ट दे दी। महिला को आर्थिक सहायता के 50 हजार रुपये दिए जा चुके हैं। अब आयोग ने इस धनराशि की वसूली के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
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बाह थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने पिछले दिनों मारपीट, छेड़छाड़, गालीगलौज, जान से मारने की धमकी और एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया था। 12 दिसंबर को इस मामले की उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग में सुनवाई हुई।
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पुलिस ने लगाई फाइनल रिपोर्ट
इस दौरान सीओ बाह सत्यम भी उपस्थित हुए। महिला को भी बुलाया गया था। इसमें पता चला कि महिला ने अपने विरोधी के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। झूठा मुकदमा लिखाने पर महिला के खिलाफ धारा 182 की कार्रवाई के लिए कोर्ट में रिपोर्ट दी गई है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद महिला को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भुगतान कर दिया गया था। आयोग के मुताबिक, चूंकि मुकदमा असत्य था। इसलिए महिला को सहायता राशि का भुगतान नहीं होना चाहिए था। आर्थिक सहायता उस समय देय है, जबकि घटना सत्य हो। केवल प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से ही आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं है, जब तक यह विवेचना सत्यापित नहीं होती।
अब आयोग ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि महिला से आर्थिक सहायता की प्रथम किस्त के 50 हजार रुपये की वसूली की जाए। अगर असत्य एफआईआर पर आर्थिक सहायता दी जाएगी तो गलत रिपोर्ट लिखाने के लिए लोग प्र्रेरित होंगे।
मुकदमा दर्ज होने के बाद महिला को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भुगतान कर दिया गया था। आयोग के मुताबिक, चूंकि मुकदमा असत्य था। इसलिए महिला को सहायता राशि का भुगतान नहीं होना चाहिए था। आर्थिक सहायता उस समय देय है, जबकि घटना सत्य हो। केवल प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से ही आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं है, जब तक यह विवेचना सत्यापित नहीं होती।
अब आयोग ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि महिला से आर्थिक सहायता की प्रथम किस्त के 50 हजार रुपये की वसूली की जाए। अगर असत्य एफआईआर पर आर्थिक सहायता दी जाएगी तो गलत रिपोर्ट लिखाने के लिए लोग प्र्रेरित होंगे।