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सराफ हत्याकांडः मुठभेड़ की कहानी में भी दिख रहे कई झोल
ब्यूरो/ अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 20 May 2017 06:01 PM IST
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पुलिस लाइन में मीडिया के सामने पेश किए गए गिरफ्तार बदमाश
- फोटो : अमर उजाला
दो सराफों की हत्या कर चार करोड़ का सोना लूटने वाले बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार करके पूरी वारदात के खुलासे का दावा किया है। लेकिन खुलासे पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि लूटा गया माल बरामद नहीं हुआ है लिहाजा सवाल उठने भी लाजमी हैं। मुठभेड़ की कहानी में भी कई झोल हैं।
सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि बदमाश दो काले रंग के बैग में सोने के आभूषण भरकर ले जा रहे हैं। अपनी शर्ट में और जेब में भी पैसा और जेवरात भरे हैं। लेकिन पुलिस जब बदमाशों को गिरफ्तार करती है तो बस कुछ आभूषण ही हाथ लगते हैं। एसएसपी विनोद कुमार मिश्रा ने इन जेवरात की कीमत बीस लाख के करीब बताई है। जबकि लूट चार करोड़ की थी। अब यह माल कहां गया इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
जब एसएसपी से यह पूछा गया तो उनका कहना था कि विकास अग्रवाल के भाई मयंक की तबीयत सुधर रही है। जब वह स्वस्थ्य हो जाएगा तो उससे पूरी जानकारी की जाएगी। सीसीटीवी में देखा जा सकता है कि बदमाशों ने मयंक अग्रवाल की दुकान से जेवरात के दो थैले भरे हैं। गल्ले से भी कैश निकाला गया है। जिस तरह से सोने की चेन के बॉक्स बदमाश थैले में रख रहे हैं उससे साफ है कि माल करोड़ों का है। लेकिन पुलिस ने चंद बॉक्स ही बरामदल कर पाई है। मेघ अग्रवाल की जेब से भी बदमाशों ने सोने की चेन निकाली थी। इस हिसाब से तो माल करोड़ों का होना चाहिए था। इसे लेकर हर कोई सवाल कर रहा है।
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दूसरा सबसे बड़ा सवाल बदमाशों को लेकर है। पुलिस लाइन में मीडिया के सामने पेश किए गए गिरफ्तार बदमाश आयुष ने पुलिस को बताया था कि दो बदमाश बाहर के थे। उनके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। पुलिस की पूरी कहानी में कहीं उन बदमाशों का नाम ही नहीं आ रहा है। बदमाशों ने बताया कि वह तीन मोटरसाइकिलों पर बैठकर वारदात करने गए थे जबकि एसएसपी का कहना है कि वह बाइक पर आए था या नहीं अभी यह साफ नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि पहले बदमाशों ने गोली चलाई थी जबकि बाद में पुलिस ने चलाई। घटना का वक्त भी सुबह का बताया जा रहा है जबकि पुलिस चौबियापाड़ा में रात को बारह बजे पहुंची थी।
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सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि बदमाश दो काले रंग के बैग में सोने के आभूषण भरकर ले जा रहे हैं। अपनी शर्ट में और जेब में भी पैसा और जेवरात भरे हैं। लेकिन पुलिस जब बदमाशों को गिरफ्तार करती है तो बस कुछ आभूषण ही हाथ लगते हैं। एसएसपी विनोद कुमार मिश्रा ने इन जेवरात की कीमत बीस लाख के करीब बताई है। जबकि लूट चार करोड़ की थी। अब यह माल कहां गया इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
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जब एसएसपी से यह पूछा गया तो उनका कहना था कि विकास अग्रवाल के भाई मयंक की तबीयत सुधर रही है। जब वह स्वस्थ्य हो जाएगा तो उससे पूरी जानकारी की जाएगी। सीसीटीवी में देखा जा सकता है कि बदमाशों ने मयंक अग्रवाल की दुकान से जेवरात के दो थैले भरे हैं। गल्ले से भी कैश निकाला गया है। जिस तरह से सोने की चेन के बॉक्स बदमाश थैले में रख रहे हैं उससे साफ है कि माल करोड़ों का है। लेकिन पुलिस ने चंद बॉक्स ही बरामदल कर पाई है। मेघ अग्रवाल की जेब से भी बदमाशों ने सोने की चेन निकाली थी। इस हिसाब से तो माल करोड़ों का होना चाहिए था। इसे लेकर हर कोई सवाल कर रहा है।
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दूसरा सबसे बड़ा सवाल बदमाशों को लेकर है। पुलिस लाइन में मीडिया के सामने पेश किए गए गिरफ्तार बदमाश आयुष ने पुलिस को बताया था कि दो बदमाश बाहर के थे। उनके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। पुलिस की पूरी कहानी में कहीं उन बदमाशों का नाम ही नहीं आ रहा है। बदमाशों ने बताया कि वह तीन मोटरसाइकिलों पर बैठकर वारदात करने गए थे जबकि एसएसपी का कहना है कि वह बाइक पर आए था या नहीं अभी यह साफ नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि पहले बदमाशों ने गोली चलाई थी जबकि बाद में पुलिस ने चलाई। घटना का वक्त भी सुबह का बताया जा रहा है जबकि पुलिस चौबियापाड़ा में रात को बारह बजे पहुंची थी।