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तीन दिन पहले होना था दिव्य का अपहरण

Sat, 19 Mar 2016 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 19 Mar 2016 01:40 AM IST
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Divya kidnapping will be happnen three days before
‌द‌िव्‍य - फोटो : अमर उजाला आगरा
दिव्य को 10 मार्च को कोठी से उठाने की तैयारी थी। मगर, मुबीन का साथी समीर नहीं आया। इस कारण मुबीन ने अपना प्लान बदल दिया।
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सीओ सदर असीम चौधरी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों से पता चला है कि शमसाबाद के मुबीन की झांसी में सुसराल है। उसी ने अपहरण की प्लानिंग की थी। दस मार्च की तारीख तय थी। झांसी के समीर को कार चलानी थी क्योंकि वह कार चलाने में एक्सपर्ट है। मुबीन का भाई इंदौर में रहता है। समीर उसके पास गया था। वहां से समीर को आगरा आना था लेकिन वह ग्वालियर में ही उतर गया। मुबीन ने उसे कॉल की लेकिन वह नहीं आया। मुबीन, अज्जो, बब्बू, शमसाबाद के बल्लू और नसीम आ चुके थे। समीर के न आने के कारण प्लान बदलना पड़ा।

बोले, पापा ने भेजा है...
बल्लू और समीर ने ही बाइक से दिव्य का घर से अपहरण किया। बोलेरो से मुबीन अन्य साथियों के साथ आया। उस समय अज्जो गाड़ी चला रहा था। बोदला से निकलते ही मुबीन ने दिव्य को गाड़ी में लिया तो वह रोने लगा। इस पर उससे कहा कि पापा ने भेजा है। मैं तुम्हें घर लेकर चलता हूं। फोन पर बात करने का नाटक भी किया। इससे दिव्य चुप हो गया। खेरागढ़ पहुंचने पर समीर ने कार ड्राइव की। इसके बाद अज्जो बाइक से वापस आगरा आ गया।
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कमजोर कड़ी था बल्लू
गैंग में सबसे कमजोर कड़ी था बल्लू। एक तो वह सीसीटीवी फुटेज में नजर आ गया, दूसरा वह डर भी रहा था। इसलिए मुबीन ने उसे अपने भाई के पास इंदौर भेज दिया। उससे कहा कि उसका काम हो जाएगा। भाई उसकी नौकरी लगवा देगा।
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बाप के बाद बेटे ने संभाली मोहन डॉन के गैंग की कमान
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला है कि बदमाश मोहन डॉन की एनकाउंटर में मौत के बाद उसके दाहिने हाथ मुबीन और फीरोजाबाद के डाक्टर (आरोपी समीर का पिता, इसी नाम से जाना जाता है) ने गैंग की कमान संभाल ली। मगर, डाक्टर ने कई साल पहले अपराध की दुनिया से किनारा कर लिया। उसके बेटे समीर ने मुबीन के साथ गैंग की कमान संभाली। समीर से उसके भाई ने भी दूरी बना रखी है। वह अलग रहकर संजय प्लेस में नौकरी करता है।


राजनीत में पैर जमाना चाहता था मुबीन
हिस्ट्रीशीटर मुबीन राजनीति में भी पैर जमाना चाहता था। इसलिए सभासद का चुनाव भी लड़ा था। कसबा में वह मेंबर नाम से चर्चित है। उसे लोग चेयरमैन नाम से भी बुलाते हैं।
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