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Agra News: सरकारी दफ्तर में दिव्यांग को गोद में उठाने की मजबूरी
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आगरा। जब एक बुजुर्ग या दिव्यांग को सरकारी दफ्तर की सीढ़ियां चढ़ने के लिए किसी की गोद या कंधे का सहारा लेना पड़े, तो यह केवल अव्यवस्था नहीं बल्कि मानवता की हार है। सदर तहसील स्थित रजिस्ट्री कार्यालयों की इस बदहाली पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने जिलाधिकारी से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन की ओर से दायर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने यह आदेश जारी किया। जैन ने आयोग को बताया कि सदर तहसील के पहले, दूसरे और पांचवें उप-निबंधक कार्यालय ऊपर की मंजिलों पर स्थित हैं। यहां जाने के लिए न लिफ्ट है और न ही रैंप हैं। सभी को सीढ़ी चढ़कर ही पहुंचना होता है।
ऐसे में करोड़ों का राजस्व लोगों से वसूलने वाले इस विभाग में महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगजन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सार्वजनिक भवनों में सुगम्यता होना अनिवार्य है, लेकिन व्हीलचेयर तक नहीं है। अधिवक्ता जैन ने मांग की है कि या तो इन दफ्तरों को भूतल पर स्थानांतरित किया जाए या लिफ्ट की व्यवस्था हो।
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आयोग ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता को शामिल कर जांच पूरी करें और 6 अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अगली सुनवाई 7 अप्रैल को नियत की गई है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन की ओर से दायर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने यह आदेश जारी किया। जैन ने आयोग को बताया कि सदर तहसील के पहले, दूसरे और पांचवें उप-निबंधक कार्यालय ऊपर की मंजिलों पर स्थित हैं। यहां जाने के लिए न लिफ्ट है और न ही रैंप हैं। सभी को सीढ़ी चढ़कर ही पहुंचना होता है।
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ऐसे में करोड़ों का राजस्व लोगों से वसूलने वाले इस विभाग में महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगजन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सार्वजनिक भवनों में सुगम्यता होना अनिवार्य है, लेकिन व्हीलचेयर तक नहीं है। अधिवक्ता जैन ने मांग की है कि या तो इन दफ्तरों को भूतल पर स्थानांतरित किया जाए या लिफ्ट की व्यवस्था हो।
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आयोग ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता को शामिल कर जांच पूरी करें और 6 अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अगली सुनवाई 7 अप्रैल को नियत की गई है।