फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Cities responsible for 80% of the toxins in the Yamuna; plea filed in Supreme Court seeking a halt

Agra News: यमुना में 80 फीसदी जहर शहरों ने घोला, सुप्रीम कोर्ट से रोक की गुहार

Sat, 24 Oct 2026 02:51 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 02:51 AM IST
विज्ञापन
Cities responsible for 80% of the toxins in the Yamuna; plea filed in Supreme Court seeking a halt
यमुना नदी को जहरीला बना रहे मंटोला नाले से गिरता सीवर और औद्योगिक रसायन। - फोटो : Archive
आगरा। यमुना में दिल्ली से आगरा के बीच 80 फीसदी से ज्यादा प्रदूषण शहरों ने घोला है। नालों के जरिये यमुना में जहर पहुंच रहा है, जिसे रोका जाए। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित पानी भी यमुना और इसकी सहायक नदियों में न छोड़ा जाए। यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में आगरा के पर्यावरणविद और सर्जन डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने दायर की है।
विज्ञापन

मामले में 27 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत तीन जजों की बेंच इस जनहित याचिका की सुनवाई करेगी। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने जनहित याचिका में मांग की है कि भविष्य में विकसित होने वाली नई नगर बस्तियों और औद्योगिक क्षेत्रों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) से शोधित पानी भी नदियों या उनकी सहायक नदियों में न छोड़ा जाए। इसके बजाय इसका इस्तेमाल पार्कों, खेती, वनों के विकास और औद्योगिक कार्यों में किया जाए।
विज्ञापन

यमुना नदी की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन इसमें प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। करीब 80 फीसदी प्रदूषण दिल्ली से आगरा के बीच में घरेलू सीवेज और औद्योगिक रसायनों का है। हजारों करोड़ रुपये खर्च कर लगाए गए ट्रीटमेंट प्लांट से भी पानी की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में केवल प्रदूषण होने के बाद सफाई करने के बजाय नए शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था पहले से बदलने की जरूरत है। उन्होंने जल संसाधन संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 29 फरवरी, 2024 की रिपोर्ट का हवाला दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ताज के पीछे गंदे नाले में बदल गई यमुना



याचिका में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में विचाराधीन मामले में दिए गए यमुना के प्रदूषण का ब्योरा पेश किया गया है। इसमें सीवेज शोधन संयंत्रों के पानी में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषक तत्व पाने की बात सामने आई थी। याचिका में कहा गया है कि यमुना नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित नए शहरी केंद्रों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में विकसित होने वाली नई आवासीय टाउनशिप के अपशिष्ट जल का निस्तारण नदी में न किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed