चौधरी बशीर को फिर जाना पड़ सकता है जेल, गबन का मुकदमा भी चलेगा
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पूर्व मंत्री चौधरी बशीर को फिर से जेल जाना पड़ सकता है। उनकी पत्नी नगमा ने कोर्ट में मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराया है। नगमा ने बशीर के खिलाफ बंधक बनाने समेत संगीन धाराओं में केस दर्ज करा रखा है। इसी केस में बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने पुलिस से मांग की है कि उनके शौहर को गिरफ्तार किया जाए।
नगमा इसी तरह का केस वर्ष 2014 में दर्ज करा चुकी हैं। तब चौधरी बशीर को जेल जाना पड़ा था। जमानत पर छूटे थे। इस बार नगमा के तेवर पहले जैसे ही हैं। उन्होंने एक महीने पहले यह केस थाना मंटोला में दर्ज कराया था।
उनका कहना है कि उन्हें घोर यातनाएं दी गई हैं। बंधक बनाकर रखा गया। जान से मारने की कोशिश की गई है। वह पीछे हटने वाली नहीं हैं, कार्रवाई कराकर ही दम लेंगी।
नगमा ने मंगलवार दोपहर बयान दर्ज कराया। यह गोपनीय है। लेकिन इसे दर्ज कराने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पुलिस अभी तक यह कह रही थी कि बयान दर्ज होने के बाद कार्रवाई करेगी। अब तो बयान दर्ज हो गया है। जल्द से जल्द चौधरी बशीर को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
उधर पुलिस सूत्रों का कहना है कि चौधरी बशीर इस मामले में स्टे लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। चौधरी बशीर के खिलाफ उनकी तीसरे नंबर की बीवी रूबीना ने दिल्ली के विकासपुरी थाना में जालसाजी का केस दर्ज करा रखा है। इसकी जांच चल रही है।
पांच शादी कर चुके हैं बशीर - नगमा
नगमा का कहना है कि चौधरी बशीर आए दिन शादी कर रहे हैं। अभी तक पांच शादी कर चुके हैं। ये तो उनकी जानकारी में है। इनके अतिरिक्त और कितनी हैं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। उधर चौधरी बशीर इस आरोप पर पहले ही सफाई दे चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने तीन निकाह किए हैं। इनके अतिरिक्त और कोई निकाह किया है तो लोग उसके साक्ष्य दें।
वहीं मुलायम सिंह की सरकार में मंत्री रहे चौधरी मोहम्मद बशीर पर अब गबन का मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए इससे संबंधित प्रस्ताव को राज्यपाल राम नाईक ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
आगरा से विधायक व मुलायम सरकार में मंत्री रह चुके बशीर पर विधायक निधि से 1.42 करोड़ 29 हजार 600 रुपये के गबन का आरोप है। जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। उनके खिलाफ इस मामले में आगरा के ही थाना ताजगंज में एफआईआर भी दर्ज कराई गई जा चुकी है।
इसकी शिकायत पर लोकायुक्त की जांच में मामला सही मिला। इस पर उन्होंने अपनी अपनी रिपोर्ट में बशीर समेत अन्य लोगों लोगों को दोषी मानते उन पर कार्रवाई करने की संस्तुति के साथ 26 सितंबर, 2007 को रिपोर्ट शासन को भेज दी थी।
इस रिपोर्ट के आधार पर शासन के निर्देश पर 30 जनवरी, 2008 को बशीर समेत 4 अन्य लोगों के खिलाफ आगरा के थाना ताजगंज में धारा 409, 420, 467, 468 समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी।
इसके बाद उप्र सतर्कता अधिष्ठान ने भी अपनी जांच में बशीर व अन्य 4 लोगों को दोषी पाते हुए 9 मई, 2014 को रिपोर्ट शासन को भेज दी थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने यह मामला दबाए रखा। सरकार बदली तो मामला फिर से सामने आया।
इस पर सरकार ने ताजगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित धाराओं में बशीर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति लेने के लिए पत्रावली तैयार कर राज्यपाल के पास भेजी गई थी। राज्यपाल ने इसे मंजूरी दे दी है। इससे बाद वर्षों से लंबित इस मामले में पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।