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ताजनगरी में प्रदूषण को लेकर चौंकाने वाला खुलासा, जानकर दंग रह जाएंगे
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 25 Dec 2017 08:07 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Demo Pic
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ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में शामिल ताजनगरी की हवा में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। प्रदूषण की रोकथाम के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। संभागीय परिवहन विभाग में एक एआरटीओ (तकनीक) पर वाहनों के प्रदूषण को जांचने की जिम्मेदारी है, लेकिन पांच माह से वाहनों के प्रदूषण की जांच ही नहीं हुई है।
सचल दस्ते को दी गई प्रदूषण मशीन वाली सरकारी गाड़ी मथुरा में है। ऐसे में ताजनगरी में प्रदूषण की जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए तमाम बंदिशें लागू हैं, लेकिन उन्हें अमल में लाने वाले सरकारी महकमे लापरवाही बरत रहे हैं। आगरा में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। हवा में कार्बन समेत कई जहरीले तत्व घुले हुए हैं।
टीटीजेड में आगरा के संभागीय परिवहन कार्यालय में एक एआरटीओ (तकनीक) को वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण को जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी। आगरा में छह माह तक एआरटीओ (तकनीक) की तैनाती नहीं थी। अब जुलाई से एआरटीओ (तकनीक) उदयराम हैं, उन पर वाहनों के प्रदूषण को जांचने की जिम्मेदारी है।
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वहीं इस मामले पर एआरटीओ (तकनीक) उदयराम का कहना था कि उनके पास जरूरी उपकरणों का अभाव है, गाड़ी भी नहीं है। ऐसे में प्रदूषण की जांच कैसे की जा सकती है। जब गाड़ी दी जाती है, वे जांच करते हैं।
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सचल दस्ते को दी गई प्रदूषण मशीन वाली सरकारी गाड़ी मथुरा में है। ऐसे में ताजनगरी में प्रदूषण की जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए तमाम बंदिशें लागू हैं, लेकिन उन्हें अमल में लाने वाले सरकारी महकमे लापरवाही बरत रहे हैं। आगरा में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। हवा में कार्बन समेत कई जहरीले तत्व घुले हुए हैं।
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टीटीजेड में आगरा के संभागीय परिवहन कार्यालय में एक एआरटीओ (तकनीक) को वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण को जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी। आगरा में छह माह तक एआरटीओ (तकनीक) की तैनाती नहीं थी। अब जुलाई से एआरटीओ (तकनीक) उदयराम हैं, उन पर वाहनों के प्रदूषण को जांचने की जिम्मेदारी है।
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वहीं इस मामले पर एआरटीओ (तकनीक) उदयराम का कहना था कि उनके पास जरूरी उपकरणों का अभाव है, गाड़ी भी नहीं है। ऐसे में प्रदूषण की जांच कैसे की जा सकती है। जब गाड़ी दी जाती है, वे जांच करते हैं।
वायु गुणवत्ता बेहद खराब
खराब वायु गुणवत्ता
- फोटो : amar ujala
ताजनगरी की हवा में लगातार जहर घुल रहा है। नवंबर-दिसंबर के बीच ताजनगरी देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में दूसरे से 10वें स्थान तक रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक के लिहाज से हवा में पीएम-2, कार्बन कणों की मात्रा बढ़ गई है। शहर में कई दिनों तक स्मॉग की चादर छा जाती है। वायु प्रदूषण बढ़ाने में शहर में दौड़ने वाले डीजल चालित और 15 साल से पुराने वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं भी कम जिम्मेदार नहीं है।
शहर में 10.5 लाख वाहन हैं पंजीकृत
vehicles
- फोटो : अमर उजाला
जनपद में 10.5 लाख से अधिक व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें ट्रक, ट्रोला, कार समेत अन्य वाहन शामिल हैं। इस साल के पंजीकृत वाहन इसमें शामिल नहीं हैं। आरटीओ का कहना है कि हर साल 50 हजार वाहन बढ़ रहे हैं।
प्राइवेट प्रदूषण जांच केंद्रों की मनमानी
Central Pollution Control Board
- फोटो : amar ujala
जिले में 18 से ज्यादा प्रदूषण जांच केंद्रों की दो साल से जांच तक नहीं की गई है। ये केंद्र केवल प्रदूषण नहीं होने का प्रमाणपत्र बांटते हैं। इनके पास भी वाहनों के प्रदूषण को आंकने के उपकरण नहीं हैं।
पेट्रोल पंप पर भी नहीं हैं धुआं जांच केंद्र
Petrol Pump
- फोटो : amar ujala
अब पेट्रोल पंप पर भी धुआं जांच की सुविधा नहीं है। जिले में 188 पंप हैं, लेकिन अब यहां धुआं जांच के लिए कोई सुविधा नहीं है। आगरा पेट्रोल पंप एसोसिएशन के उपेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व में आरटीओ की ओर से सुविधा थी, धुआं जांच के बाद वाहन स्वामी से इसका शुल्क लिया जाता था। अब ये सुविधा नहीं दी जा रही।