बजट: जूता उद्यमियों को रियायतों की आस, पर्यटन कारोबारी निराश, सरकार ने नहीं दिया सहयोग
दो साल पहले कोरोना संक्रमण से पहले जिस ताजनगरी में हर दिन 40 हजार सैलानियों की रौनक रहती थी और पांच हजार विदेशी पर्यटक दीदार ए ताज के लिए पहुंचते थे, वहां कोरोना संक्रमण ने दो साल से सन्नाटा कर दिया।
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कोरोना संक्रमण की तीन लहरों से परेशान फुटवियर उद्योग को एक फरवरी को पेश होने जा रहे आम बजट- 2022 से रियायतों की आस जगी है। चार लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने वाले फुटवियर उद्यमियों को वित्तमंत्री के पिटारे से कुछ ऐसी रियायतों की उम्मीद लगी हुई है, जिनसे वह घरेलू और निर्यात के मोर्चे पर फिर से पटरी पर लौट सकें। वहीं, ताजमहल के शहर में पर्यटन उद्यमी सरकार से निराश हैं और नाउम्मीदी की वजह ये है कि लगातार पांच बजट में आगरा के पर्यटन की झोली खाली रही है। कोरोना संक्रमण काल में कई उद्योगों को रियायतें मिलीं, पर पर्यटन उद्योग के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। इन्हीं कारणों से आम बजट से भी उन्होंने कोई उम्मीद नहीं लगा रखी है। इस कारोबार से भी लगभग चार लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।
जूता उद्योग की आस
- कच्चे माल पर 10 फीसदी का आयात शुल्क हटे
- उत्पादन के आधार पर मिले इंसेटिव योजना का लाभ
- अपग्रेड करने को महंगी मशीनों की खरीद पर मिले सब्सिडी
- 12 फीसदी जीएसटी ने किया है उद्यमियों को परेशान
- जूते का कच्चा माल 35 फीसदी तक हो चुका है महंगा
- 65 फीसदी घरेलू बाजार में है आगरा की भागीदारी
- 27 फीसदी भागीदारी आगरा की जूता निर्यात में
- 5 हजार करोड़ रुपये का हो रहा जूता निर्यात
- 4 लाख लोगों को आगरा में मिला है रोजगार
- 70 देशों को आगरा से जूते का हो रहा है निर्यात
- 400 सालों से आगरा में है जूते बनाने का हुनर
आयात शुल्क हटाया जाए
कच्चे माल पर बीते साल जो 10 फीसदी आयात शुल्क लगाया गया, उसे हटाया जाए। आयकर दाता को सामाजिक सुरक्षा जरूर मिलनी चाहिए। सरकार जो भी टैक्स वसूले, उसका एक हिस्सा करदाता की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा पर लगाए, तभी लोग प्रेरित होंगे। - पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
फुटवियर निर्यात पर पड़ा असर
कोरोना के कारण यूरोपीय बाजारों में फुटवियर निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। सरकार को इंसेंटिव योजना को आकर्षक बनाना चाहिए। लोन पर ब्याज दरों में कमी के साथ इस बजट में घरेलू बाजार और निर्यात के लिए रियायतें देनी होंगी, तभी पटरी पर लौट पाएंगे। नजीर अहमद, जूता निर्यातक
नई तकनीक की जरूरत
फुटवियर उद्योग इस समय बहुत बुरे हालात से जूझ रहा है। नई तकनीक की जरूरत है। मशीनों पर सब्सिडी और उत्पादन आधारित इंसेंटिव दिए जाएं। कोरोना संक्रमण से जोखिम बढ़ा है। इस जोखिम को कम करने में सरकार मदद करे। इस बजट से बहुत उम्मीद लगा रखी हैं। - प्रदीप वासन, जूता निर्यातक
पर्यावरण नियमों में ढील दी जाए
पर्यावरण नियमों में कुछ ढील दी जाए। निर्यात के मुकाबले पांच फीसदी आयात करने के पुराने नियम को फिर से लागू किया जाए और कच्चे माल पर आयात शुल्क को पूरी तरह से हटाया जाए। इससे लागत बढ़ रही है। पहले ही कच्चा माल महंगा हो चुका है। - जितेंद्र त्रिलोकानी, जूता निर्यातक
दो साल पहले कोरोना संक्रमण से पहले जिस ताजनगरी में हर दिन 40 हजार सैलानियों की रौनक रहती थी और पांच हजार विदेशी पर्यटक दीदार ए ताज के लिए पहुंचते थे, वहां कोरोना संक्रमण ने दो साल से सन्नाटा कर दिया। लगातार सात महीने तक ताज बंद रहा तो जैसे तैसे बचत के बल पर परिवार का खर्च चला सके। किसी ने रोजगार बदला तो कोई कर्ज लेकर दोबारा होटल चलाने लगा, पर सरकार से कोई राहत नहीं मिली। कें द्र न राज्य सरकार ने बजट में रियायतें दीं, जबकि आगरा में फुटवियर की तरह ही चार लाख लोग सीधे जुड़े हैं। बजट से पहले अमर उजाला ने पर्यटन उद्यमियों से बात की तो पाया कि बजट से वह नाउम्मीद हैं और कोई भी रियायत मिलेगी, ऐसा उन्होंने सोचा ही नहीं। वह चौंक जाएंगे, अगर बजट में कोई घोषणा हो गई।
पर्यटन क्षेत्र- एक नजर में
550 होटल संचालित हैं आगरा में
600 से ज्यादा रेस्टोरेंट चल रहे
40 हजार कारीगर हैंडीक्राफ्ट से जुड़े
04 लाख लोगों की रोजी रोटी ताज से थी
80 लाख सैलानी कोरोना से पहले आते थे ताज
15 लाख ही रह गई अब पर्यटकों की संख्या
35 हजार विदेशी पर्यटक पूरे साल ही आ पाए
सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया
कोरोना संक्र मण को पूरे दो साल हो गए। सबसे बुरा असर पर्यटन पर पड़ा। ताजमहल बंद रहा तो सैलानी आने बंद हो गए। हमने जैसे तैसे इस बुरे समय को काटा, लेकिन सरकार से सहयोग तो नहीं मिला। यूपी सरकार और केंद्र के बजट में पर्यटन को छोड़कर बाकी सब होगा। - रमेश वाधवा, अध्यक्ष, होटल एंड रेस्टोरेंट एसो.
बिजली के बिल नहीं भर पा रहे
यूपी सरकार ने पहले ही उपेक्षित कर दिया है। केंद्र सरकार के बजट में कोई ऐसी योजना नहीं, जिससे कोरोना संक्रमण से जूझते पर्यटन उद्योग को कोई रियायत मिले, जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित पर्यटन ही है। बिजली के बिल भी नहीं भर पा रहे। - अवनीश शिरोमणि, महासचिव, एचआरओए
बजट से कोई उम्मीद नहीं
केंद्र सरकार के सात आम बजट और यूपी सरकार के पांच बजट में मैने तो आगरा के पर्यटन के लिए कोई योजना देखी नहीं। न ही अब कोई उम्मीद है। हमारे इस बुरे दौर में भी जब सरकार से मदद नहीं मिल रही तो कैसे कोई उम्मीद लगाए। - राजीव सक्सेना, उपाध्यक्ष, टूरिज्म गिल्ड
किसी भी चीज में कोई रियायत नहीं
कोई इंसेटिव नहीं, कोई रियायत नहीं। बिजली में न हाउस टैक्स में। कमाई जीरो और खर्चे पूरे होंगे तो कोई भी उद्योग हो, चल नहीं पाएगा। सरकार से उम्म्मीदें लगाई थी, पर दो साल में धराशाई हो गईं। बजट में भी कुछ आ जाए तो अच्छा है, वरना खाली हाथ तो हैं ही। - गौरव चौहान, होटल संचालक