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Agra Metro: 391 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा ब्लास्टलेस ट्रैक और फास्टनिंग सिस्टम
Mon, 25 Jan 2021 01:26 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 25 Jan 2021 01:26 PM IST
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आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा मेट्रो रेल की पटरियों को कॉन्क्रीट के ब्लास्टलेस ट्रैक पर बिछाया जाएगा। तेज रफ्तार के लिए फास्टनिंग सिस्टम होगा। इन दोनों कार्यों पर 391.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शनिवार को खुले टेंडर में लार्सन एंड टर्बों (एलएंडटी) ने आगरा में 29 किमी और कानपुर में 32 किमी ब्लास्टलेस ट्रैक और फास्टनिंग सिस्टम के लिए यूपीएमआरसी द्वारा निर्धारित कीमत से 26.2 फीसदी कम लागत की बोली लगाकर टेंडर हासिल किया है।
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पहले चरण में आगरा में सिकंदरा से ताजपूर्वी गेट कॉरिडोर में 14.4 किमी ब्लास्टलेस ट्रैक बिछाया जाएगा। पीएसी डिपो के अंदर भी ब्लास्टलेस ट्रैक बनेगा। आगरा में एलएंडटी दोनों कॉरिडोर के लिए 29.40 किमी ट्रैक बिछाएगी। साथ ही कानपुर के दोनों कॉरिडोर पर 32 किमी ट्रैक बनेगा। अक्तूबर में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने ब्लास्टलेस ट्रैक के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं। 6 कंपनियों ने निविदाएं भरीं।
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दिसंबर में तकनीकी जांच के बाद शनिवार को वित्तीय निविदाएं खोली गईं। यूपीएमआरसी ने कानपुर व आगरा ट्रैक के लिए 530 करोड़ कीमत लगाई थी। इस कार्य को एलएंडटी ने 391.14 करोड़ बोली लगाकर हासिल किया है। यूपीएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक सप्ताह में टेंडर अवार्ड की कागजी कार्रवाई पूरी हो जाएगी।
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48 महीने में पूरा करना होगा काम
एलएंडटी को दोनों परियोजनाओं में चार कॉरिडोर के लिए ब्लास्टलेस ट्रेक व फास्टनिंग सिस्टम की आपूर्ति व स्थापित करने के लिए 48 महीने का समय मिलेगा। 48 महीनों में एलएंडटी को काम पूरा करना पड़ेगा।
ये होता है ब्लास्टलेस ट्रैक
रेलवे में पटरियों के नीचे गिट्टियां बिछाई जाती हैं जबकि मेट्रो रेल की पटरियों को कॉन्क्रीट में जमाया जाता है। गिट्टी रहित कॉन्क्रीट के घोल को खास ब्लास्टलेस तकनीक से तैयार कर रेल के नीचे बिछाया जाता है। इससे पटरियां लंबे समय तक कसी रहती हैं। फास्टनिंग सिस्टम से ट्रेन की स्पीड बढ़ जाती है।
एलएंडटी को दोनों परियोजनाओं में चार कॉरिडोर के लिए ब्लास्टलेस ट्रेक व फास्टनिंग सिस्टम की आपूर्ति व स्थापित करने के लिए 48 महीने का समय मिलेगा। 48 महीनों में एलएंडटी को काम पूरा करना पड़ेगा।
ये होता है ब्लास्टलेस ट्रैक
रेलवे में पटरियों के नीचे गिट्टियां बिछाई जाती हैं जबकि मेट्रो रेल की पटरियों को कॉन्क्रीट में जमाया जाता है। गिट्टी रहित कॉन्क्रीट के घोल को खास ब्लास्टलेस तकनीक से तैयार कर रेल के नीचे बिछाया जाता है। इससे पटरियां लंबे समय तक कसी रहती हैं। फास्टनिंग सिस्टम से ट्रेन की स्पीड बढ़ जाती है।