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Agra: जन्म, मृत्यु, निवास, आय, जाति प्रमाणपत्र सब फर्जी बन रहे...तहसील से लेकर निगम तक फैला गिरोह का जाल

Mon, 10 Mar 2025 12:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 10 Mar 2025 12:58 PM IST
सार

सावधान रहें। जन्म, मृत्यु, निवास, आय, जाति प्रमाणपत्र सब फर्जी बन रहे हैं। फतेहाबाद व खेरागढ़ की तर्ज पर हर तहसील, पंचायत और नगर निगम तक गिरोह का जाल फैला है। हैरानी की बात है कि पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भी प्रशासन सभी प्रमाणपत्रों की जांच कराने से कतरा रहा है।
 

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Birth death residence income and caste certificates all being made fake gang network spread tehsil to nigam
फर्जी प्रमाणपत्र - फोटो : freepik-AI

विस्तार

आगरा के चर्चित बोदला जमीन कांड में जिंदा सरदार टहल सिंह को मृत बताकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम से जारी हुआ था। तत्कालीन जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिकारी से लेकर भौतिक सत्यापन करने वाले सुपरवाइजर, लिपिक व एसएफआई की लापरवाही सामने आई थी। कार्रवाई के नाम पर नतीजा शून्य रहा।
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इसके अलावा 123 फर्जी जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र की वेबसाइट पकड़ी जा चुकी हैं। पूर्व में कलेक्ट्रेट में मजिस्ट्रेट के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर से फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र का मामला भी सामने आ चुका है। अब नया मामला फतेहाबाद तहसील में अनुसूचित जाति के 18 फर्जी प्रमाणपत्र और खेरागढ़ में फर्जी जाति व निवास प्रमाणपत्र से जुड़ा है।
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फतेहाबाद मामले में तहसील में तैनात रहे चकबंदी लेखपाल राजीव कुमार और उसके एजेंट बलवीर सिंह के खिलाफ तहसीलदार आशीष त्रिपाठी ने केस दर्ज कराया है। 24 घंटे बाद भी पुलिस ने बलवीर व राजीव से पूछताछ शुरू नहीं की।
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उधर, खेरागढ़ तहसील में राजस्थान के लोगों के प्रधान के फर्जी लेटरपैड से फर्जी जाति व निवास प्रमाणपत्र मामले में लेखपाल दीपक शर्मा ने नरेश, अर्जुन व छोटेलाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इधर, ग्राम पंचायत स्तर पर भी फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।

 

कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहे हौसले
 जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम सिंह का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद भी पुलिस की लीपापोती से आरोपी बच निकलते हैं। जिले में आय, जाति, निवास के अलावा वारिसान, हैसियत और जन्म व मृत्यु के एक लाख से अधिक प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं। तहसीलदार व एसडीएम औचक सत्यापन नहीं करते। जिम्मेदार उच्च अधिकारी ऐसे मामलों में मॉनिटरिंग नहीं करते। इससे फर्जी प्रमाणपत्र गिरोह का नेटवर्क नहीं टूट पा रहा। इस गिरोह में तहसील, पंचायत, कलक्ट्रेट, नगर निगम के कर्मचारी और दलाल शामिल हैं।

प्रमाणपत्रों का कराएंगे सत्यापन
डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि सभी तहसीलों में प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। फर्जी मामलों की जांच की समीक्षा भी की जाएगी।
 
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