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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Big relief for Congress leader: Ram Tandon acquitted in rioting and vandalism case after 36 years

कांग्रेस नेता को बड़ी राहत: 36 साल बाद बलवा, तोड़फोड़ के केस में राम टंडन बरी; मुकर गए चार गवाह

Wed, 02 Apr 2025 09:38 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 02 Apr 2025 09:38 AM IST
सार

जल संस्थान में बलवा और तोड़फोड़ के केस में फंसे कांग्रेस नेता को 36 साल बाद राहत मिली है। उन्हें इस केस में बरी कर दिया गया है। 

 

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Big relief for Congress leader: Ram Tandon acquitted in rioting and vandalism case after 36 years
36 साल पहले हुआ बवाल - फोटो : अमर उजाला आर्काइव

विस्तार

आगरा जल संस्थान में 36 साल पहले कर्मचारियों ने साथ मारपीट, तोड़फोड़ और बलवे के केस में गवाहों ने घटना का समर्थन नहीं किया। एसीजेएम (अष्टम) दीपांकर यादव ने ठोस साक्ष्य के अभाव में कोतवाली थाना क्षेत्र के सेव का बाजार निवासी कांग्रेस नेता राम टंडन बरी करने के आदेश दिए।
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जल संस्थान के तत्कालीन महाप्रबंधक ने थाना न्यू आगरा में तहरीर दी थी। आरोप लगाया कि 22 दिसंबर 1989 को दोपहर 12 बजे कांग्रेस नेता राम टंडन, गोपाल गुरु, भवतोष चक्रवर्ती, अहमद हसन और सुखदेव उर्फ इंद्रा भक्त के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता कार्यालय के अंदर आ गए। तोड़फोड़ करने के बाद कर्मचारियों की पिटाई की। हमले में कर्मचारी जल सिंह, अशरफ खान, निजामुद्दीन खान, गुलाब सिंह, अनिल कुमार अग्रवाल, गेंदा लाल, रामनिवास आदि घायल हुए थे।
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पुलिस ने इनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे
पुलिस ने विवेचना के बाद कांग्रेस नेता राम टंडन, गोपाल गुरु, भवतोष चक्रवर्ती, अहमद हसन, जाहिद हुसैन, सुखदेव उर्फ इंद्रा भक्त हनुमान के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी गोपाल गुरु, भवतोष चक्रवर्ती की मौत हो गई। इस वजह से उनकी व अन्य आरोपियों की पत्रावली अलग हो गई थी।

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सभी गवाह नहीं पहुंचे, चार ने घटना नकारी
मुकदमे में 8 घायलों के अलावा पुलिसकर्मी, जलसंस्थान के कर्मचारी और स्वतंत्र गवाह बनाए गए। मगर 36 साल में जल संस्थान कर्मचारी जल सिंह, निजामुद्दीन, पुलिसकर्मी गया प्रसाद और स्वतंत्र गवाह बीरी सिंह ही गवाही देने के लिए अदालत में पेश हुए। तब अदालत ने अन्य गवाहों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कई बार प्रतिकूल आदेश पारित कर नोटिस भेजे। जिलाधिकारी एवं संयुक्त निदेशक अभियोजन को भी कई बार अवगत कराया था। 4 गवाहों के अलावा अन्य गवाह अदालत में हाजिर नहीं हुए। इन्होंने भी घटना का समर्थन नहीं किया। स्वतंत्र गवाह बीरी सिंह ने कहा कि घटना के समय वह अपने विभागीय कार्य के लिए जल संस्थान पहुंचे थे। तभी पुलिसवालों ने सादा कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे। कहा था कि जल संस्थान के फुटपाथ का निर्माण होना हैं। उन्हें घटना के बारे में जानकारी ही नहीं थी।
 
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