{"_id":"636d3a9551439227317288f3","slug":"as-soon-as-the-dap-reached-the-committees-long-queues-started-kasganj-news-agr5530732144","type":"story","status":"publish","title_hn":"समितियों पर डीएपी पहुंचते ही, लगी लंबी कतारें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समितियों पर डीएपी पहुंचते ही, लगी लंबी कतारें
विज्ञापन
कासगंज। जिले में बृहस्पतिवार को 1268 मीट्रिक टन डीएपी और 500 एमटी एनपीके की रेक समितियों पर पहुंची। जानकारी होते ही किसानों की सुबह में ही लाइनें समितियों पर लग गईं। भीड़ और धक्का मुक्की के चलते डीएपी के लिए किसानों को खासी दिक्क्तें हुई।
पिछले दस दिनों से डीएपी के लिए किसान परेशान हैं। गेहूं की बुवाई के लिए उन्हें डीएपी की जरूरत है। डीएपी समय से न मिलने से गेहूं की फसल की बुवाई भी पिछड़ रही हैं। किसान इस जुगत में लगा है कि कैसे भी डीएपी मिल जाए तो वह गेहूं की फसल की बुवाई समय से कर सकें। जब किसानों को समितियों पर डीएपी पहुंचने की जानकारी हुई तो किसानों के बीच नोंक झोक पहले लेने के चक्कर में होने लगी। खासी मशक्कत के बाद ही किसानों को डीएपी मिल सकी। किसानों की माने तो जरूरत के मुताबिक अभी डीएपी नहीं पहुंची है। समय से डीएपी नहीं मिली तो गेहूं की पिछैती फसल की बुवाई को मजबूर होना पड़ेगा।
अमांपुर के ग्राम नादरमई पर 300 बोरियां डीएपी की पहुंची। जानकारी होते ही बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए। समिति के कर्मी किसानों की भीड़ के बीच नोंकझोंक होते देख वितरण बंद कर ही चले गए। वहीं पटियाली के खिन्नी नगला सहकारी समिति पर भी किसानों की भीड़ के चलते वितरण रोका गया। जब किसान समझाने पर माने और कतार में आए तब फिर से वितरण शुरु कराया गया।
विज्ञापन
1268 मीट्रिक टन डीएपी एवं 500 मीट्रिक टन एनपीके मिली है। जिसके के वितरण के लिए सभी सहकारी समिति पर 25 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई है। शीघ्र और डीएपी जनपद को मिलने की उम्मीद है। वहीं निजी उर्वरक विक्रेताओं के यहां भी डीएपी उपलब्ध है। किसान जरूरत के अनुसार ही लें, स्टॉक न करें। सुमित कुमार चौहान, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
पिछले दस दिनों से डीएपी के लिए किसान परेशान हैं। गेहूं की बुवाई के लिए उन्हें डीएपी की जरूरत है। डीएपी समय से न मिलने से गेहूं की फसल की बुवाई भी पिछड़ रही हैं। किसान इस जुगत में लगा है कि कैसे भी डीएपी मिल जाए तो वह गेहूं की फसल की बुवाई समय से कर सकें। जब किसानों को समितियों पर डीएपी पहुंचने की जानकारी हुई तो किसानों के बीच नोंक झोक पहले लेने के चक्कर में होने लगी। खासी मशक्कत के बाद ही किसानों को डीएपी मिल सकी। किसानों की माने तो जरूरत के मुताबिक अभी डीएपी नहीं पहुंची है। समय से डीएपी नहीं मिली तो गेहूं की पिछैती फसल की बुवाई को मजबूर होना पड़ेगा।
विज्ञापन
अमांपुर के ग्राम नादरमई पर 300 बोरियां डीएपी की पहुंची। जानकारी होते ही बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए। समिति के कर्मी किसानों की भीड़ के बीच नोंकझोंक होते देख वितरण बंद कर ही चले गए। वहीं पटियाली के खिन्नी नगला सहकारी समिति पर भी किसानों की भीड़ के चलते वितरण रोका गया। जब किसान समझाने पर माने और कतार में आए तब फिर से वितरण शुरु कराया गया।
विज्ञापन
1268 मीट्रिक टन डीएपी एवं 500 मीट्रिक टन एनपीके मिली है। जिसके के वितरण के लिए सभी सहकारी समिति पर 25 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई है। शीघ्र और डीएपी जनपद को मिलने की उम्मीद है। वहीं निजी उर्वरक विक्रेताओं के यहां भी डीएपी उपलब्ध है। किसान जरूरत के अनुसार ही लें, स्टॉक न करें। सुमित कुमार चौहान, जिला कृषि अधिकारी