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विशेषज्ञों ने बताई ताजमहल की विशेज्ञता, भूकंप के हल्के झटकों से नहीं पड़ेगा कोई फर्क
Sun, 24 Nov 2019 02:26 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 24 Nov 2019 02:26 PM IST
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ताजमहल
- फोटो : Self
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शहरों में मॉल खुल रहे हैं, लेकिन एसी और सभी अत्याधुनिक सुविधाओं के बाद भी ग्राहक यहां नहीं पहुंच रहे, जबकि ताज, हवा महल, चारमीनार जैसी इमारतों के पास बने बाजार गुलजार हैं। व्यावसायिक स्थलों के वास्तु को हरियाली और नीले आसमान से जोड़ा जाए, तभी वास्तु कला से आम आदमी जुड़ पाएगा।
होटल होलीडे इन में शनिवार से शुरू हुई दो दिनी आर्किटेक्ट कांफ्रेंस में आर्किटेक्ट रोमेश सपरा ने यह आह्वान किया। इस कांफ्रेंस में देश के जाने-माने वास्तु विशेषज्ञों सहित सवा सौ वास्तुविद सहभागिता कर रहे हैं। इसमें भवन निर्माण से संबंधित नए उत्पादों व तकनीक की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रोफेसर एससी हांडा और आर्किटेक्ट रोमेश सपरा ने संयुक्त रूप से किया। आर्किटेक्ट नेहित विज ने कहा कि आम आदमी की मानसिकता से आर्किटेक्ट और डिजाइन बनाएं। उनके बीच में बेहतर समझ से इस दुनिया को और भी बेहतर डिजाइन मिल सकेंगी।
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होटल होलीडे इन में शनिवार से शुरू हुई दो दिनी आर्किटेक्ट कांफ्रेंस में आर्किटेक्ट रोमेश सपरा ने यह आह्वान किया। इस कांफ्रेंस में देश के जाने-माने वास्तु विशेषज्ञों सहित सवा सौ वास्तुविद सहभागिता कर रहे हैं। इसमें भवन निर्माण से संबंधित नए उत्पादों व तकनीक की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
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प्रदर्शनी का उद्घाटन आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रोफेसर एससी हांडा और आर्किटेक्ट रोमेश सपरा ने संयुक्त रूप से किया। आर्किटेक्ट नेहित विज ने कहा कि आम आदमी की मानसिकता से आर्किटेक्ट और डिजाइन बनाएं। उनके बीच में बेहतर समझ से इस दुनिया को और भी बेहतर डिजाइन मिल सकेंगी।
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बेजोड़ है ताज...
आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रोफेसर एवं नींव विशेषज्ञ डॉ. एससी हांडा ने अजूबा-ए-ताज पर कई जानकारियां वास्तुविदों के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि ताज के प्रवेश द्वार की डिजाइनिंग कुछ ऐसे की गई है कि पच्चीकारी से गढ़े गए फूलों पर जब चांद की दूधिया रोशनी पड़ती है तो ये खिलते हुए प्रतीत होते हैं। कब्र में भी ऐसे ही फूल हैं। ताज की नींव और उसकी डिजाइनिंग इतनी दमदार है कि भूकंप के हल्के झटकों से फर्क नहीं पड़ने वाला।
आईआईटी रुड़की के रिटायर्ड प्रोफेसर एवं नींव विशेषज्ञ डॉ. एससी हांडा ने अजूबा-ए-ताज पर कई जानकारियां वास्तुविदों के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि ताज के प्रवेश द्वार की डिजाइनिंग कुछ ऐसे की गई है कि पच्चीकारी से गढ़े गए फूलों पर जब चांद की दूधिया रोशनी पड़ती है तो ये खिलते हुए प्रतीत होते हैं। कब्र में भी ऐसे ही फूल हैं। ताज की नींव और उसकी डिजाइनिंग इतनी दमदार है कि भूकंप के हल्के झटकों से फर्क नहीं पड़ने वाला।